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दिल्ली के कनॉट प्लेस में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर बड़ी कार्रवाई, 20 लोग हिरासत में लिए गएदिल्ली
23 अग॰ 2026, 11:11 pm (22 दिन पहले)· 6

दिल्ली के कनॉट प्लेस में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर बड़ी कार्रवाई, 20 लोग हिरासत में लिए गए

राजधानी के कनॉट प्लेस में बिना अनुमति के आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर जुटे करीब 300 लोगों पर पुलिस ने शिकंजा कसा है और 20 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में रविवार को अचानक उस वक्त गहमागहमी बढ़ गई जब सैकड़ों लोग बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के इकट्ठा हो गए। आरक्षण प्रणाली में संशोधन की मांग को लेकर हुए इस आयोजन में लगभग 300 नागरिक शामिल हुए थे। इन लोगों का मुख्य तर्क था कि सरकारी लाभ और अवसर जातिगत आधार के बजाय सीधे तौर पर व्यक्ति की माली हालत या आर्थिक पिछड़ेपन से जुड़े होने चाहिए। प्रदर्शनकारियों का मानना था कि तंगी का सामना हर समुदाय के जरूरतमंद लोग कर रहे हैं, इसलिए सहायता का पैमाना भी आर्थिक होना जरूरी है।

क्रीमी लेयर और अधिनियमों में समीक्षा की मांग

कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल में तख्तियां लेकर पहुंचे आंदोलनकारियों ने साफ किया कि उनका मकसद पूरी तरह से आरक्षण को खत्म करना नहीं है, बल्कि मौजूदा व्यवस्था में व्यावहारिक बदलाव लाना है। प्रदर्शन के दौरान रखी गई प्रमुख मांगों में कई बड़े नीतिगत बिंदु शामिल थे।

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  • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़ी नीतियों के दायरे में क्रीमी लेयर के नियम को सख्ती से लागू किया जाए।
  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ढांचे तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की नए सिरे से समीक्षा की जाए।
  • रोजगार और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में सभी नागरिकों को समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए व्यापक नीतियां बनाई जाएं।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सोशल मीडिया कनेक्शन

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बिना अनुमति जुटने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए फौरी कदम उठाए। नियमों का उल्लंघन कर विरोध प्रदर्शन करने के मामले में सुरक्षा बलों ने 20 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

यह पूरा विरोध प्रदर्शन इंस्टाग्राम पर सक्रिय 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' नामक डिजिटल पेज के जरिए संचालित कैंपेन का हिस्सा बताया जा रहा है। इस ऑनलाइन मंच के करीब 56 लाख यानी 5.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इसी बैनर तले कुछ दिन पहले जंतर-मंतर पर भी विरोध जताया गया था, जहां से पुलिस ने कई लोगों को उठाया था। हालांकि, रामलीला मैदान में होने वाले जलसे के लिए आयोजकों ने प्रशासन से लिखित अनुमति ली थी, जहां एक तय सीमा के तहत लोगों को जुटने की छूट मिली थी।

सवाल-जवाब

कनॉट प्लेस में लोग क्यों इकट्ठा हुए थे?
कनॉट प्लेस में करीब 300 लोग बिना पुलिस अनुमति के आरक्षण प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर एकत्र हुए थे।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या थी?
उनकी मुख्य मांग थी कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय व्यक्ति की आर्थिक स्थिति होना चाहिए ताकि जरूरतमंदों को लाभ मिले।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
बिना अनुमति प्रदर्शन करने के कारण दिल्ली पुलिस ने 20 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
यह आंदोलन किसके जरिए चलाया जा रहा था?
यह आंदोलन इंस्टाग्राम पर सक्रिय एक पेज के माध्यम से चलाया जा रहा था जिसके लाखों फॉलोअर्स हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·21 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे सोशल मीडिया अब क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सीमाओं से परे बड़े आंदोलनों को संगठित कर रहा है। 5.6 मिलियन फॉलोअर्स वाले डिजिटल पेज का इस तरह सड़कों पर उतरना यह संकेत देता है कि आने वाले समय में नीतिगत मुद्दों पर पारंपरिक राजनीतिक दलों के बजाय ऐसे ऑनलाइन मंच ही जमीनी राजनीति की दिशा तय करेंगे। उत्तर भारत के कई राज्यों में इस तरह के डिजिटल कैंपेन प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बन रहे हैं, जिससे पुलिस को अपनी खुफिया तंत्र प्रणाली और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को और अधिक मजबूत करना होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 दिन पहले

कनॉट प्लेस में बिना अनुमति हुआ यह प्रदर्शन डिजिटल मोबिलाइजेशन की ताकत और प्रशासन के लिए नई चुनौती को रेखांकित करता है। साढ़े पाँच मिलियन से अधिक फॉलोअर्स वाले इंस्टाग्राम पेज के जरिए इतने कम समय में भीड़ जुटाना यह बताता है कि पारंपरिक रैलियों की जगह अब सोशल मीडिया आधारित रणनीतियाँ ले रही हैं। यदि ऐसे अनधिकृत आयोजनों पर रोक नहीं लगी, तो राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए एक निरंतर चुनौती बन जाएगा।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·22 दिन पहले

अर्जुन जी का यह विश्लेषण बिल्कुल सटीक है कि डिजिटल मोबिलाइजेशन अब पारंपरिक रैलियों की जगह ले रहा है। खगोलीय गणित की तरह, जब ग्रहों की स्थिति अचानक बदलती है तो उसका प्रभाव समाज पर भी तीव्रता से दिखता है। पांच मिलियन से अधिक फॉलोअर्स वाले इस वर्चुअल नेटवर्क का प्रभाव यह दर्शाता है कि भविष्य में प्रशासनिक प्रणालियों को केवल भौतिक सीमाओं तक सीमित रहने के बजाय डिजिटल माध्यमों की गति और एल्गोरिदम को भी समझना होगा, अन्यथा अनधिकृत आयोजनों की यह श्रृंखला कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर और निरंतर चुनौती बनी रहेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

राजधानी में इंस्टाग्राम आधारित अभियानों का ज़मीनी विरोध में बदलना यह दर्शाता है कि डिजिटल मोबिलाइजेशन अब कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है। 56 लाख फॉलोअर्स वाले इस पेज का कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर पर बिना अनुमति जुटना प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर संकेत है। आर्थिक आधार पर आरक्षण और क्रीमी लेयर की मांग पर यह उबाल आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों के क्षेत्रीय समीकरणों और नीतिगत बहसों पर भी गहरा असर डाल सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों की बढ़ती प्रवृत्ति जांच एजेंसियों और कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। 56 लाख फॉलोअर्स वाले डिजिटल पेज के माध्यम से बिना अनुमति भीड़ जुटाना यह साबित करता है कि अब पारंपरिक खुफिया तंत्र के साथ-साथ साइबर पेट्रोलिंग को भी उतना ही मजबूत करना होगा। यदि इस प्रकार के असंगठित और डिजिटल रूप से संचालित विरोध प्रदर्शनों पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था के लिए आने वाले समय में एक बड़ी प्रशासनिक और कानूनी समस्या का रूप ले सकता है, जिससे सार्वजनिक शांति खतरे में पड़ सकती है।

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