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दिल्ली में नकली अधिकारियों का 'स्पेशल 26' छापा बेनकाब: रोहिणी की महिला ने फर्जी सीबीआई रेड को 90 मिनट में किया नाकामदिल्ली
19 अग॰ 2026, 11:58 pm (26 दिन पहले)· 2

दिल्ली में नकली अधिकारियों का 'स्पेशल 26' छापा बेनकाब: रोहिणी की महिला ने फर्जी सीबीआई रेड को 90 मिनट में किया नाकाम

दिल्ली के रोहिणी में फिल्म की तर्ज पर 8 से 10 नकली अधिकारियों ने कारोबारी के घर सीबीआई रेड का नाटक किया। सतर्क महिला ने पहचान पत्र और सर्च वारंट मांगा, जिसके बाद पड़ोसियों के दबाव में जालसाज भाग खड़े हुए।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में बॉलीवुड फिल्म 'स्पेशल 26' की कहानी जैसा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) का अधिकारी बताने वाले 8 से 10 लोगों के एक गिरोह ने कारोबारी के मकान पर फर्जी छापेमारी का प्रयास किया। गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे इन ठगों ने अपने कड़क रवैये और फर्जी पहचान पत्रों के दम पर परिवार में दहशत फैलाने की पूरी कोशिश की। हालांकि, कारोबारी की पत्नी की सूझबूझ, हिम्मत और कड़े रुख के सामने शातिरों का पूरा खेल बिगड़ गया। लगभग 90 मिनट तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का अंत तब हुआ जब पड़ोसियों की भीड़ जुट गई और फर्जी टीम मौके से भाग खड़ी हुई।

गाड़ियों का काफिला और सीबीआई का फर्जी ढोंग

घटना की शुरुआत तब हुई जब रोहिणी स्थित कारोबारी की रिहाइशी इमारत के बाहर अचानक कई गाड़ियों का लंबा काफिला आकर रुका। इन वाहनों में से लगभग 8 से 10 लोग बाहर निकले, जिनका पहनावा और हाव-भाव पूरी तरह से किसी उच्च स्तरीय जांच एजेंसी के अधिकारियों जैसा लग रहा था। इन सभी लोगों के कपड़ों पर केंद्रीय जांच एजेंसी का आधिकारिक लोगो लगा हुआ था और उनके गलों में पहचान पत्र लटके हुए थे। उनके चलने का अंदाज और सख्त बॉडी लैंग्वेज देखकर पहली नज़र में कोई भी धोखा खा सकता था कि यह सीबीआई की कोई आधिकारिक और त्वरित कार्रवाई है। बिना किसी पूर्व सूचना के इस तरह की टीम का पहुंचना इलाके में हलचल पैदा करने के लिए काफी था।

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दरवाजे पर डटी रही महिला: ऑथराइजेशन की रखी मांग

संदिग्ध टीम ने कारोबारी के घर की घंटी बजाई। जैसे ही कारोबारी की पत्नी ने दरवाजा खोला, बाहर खड़े लोगों ने खुद को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया और तुरंत मुख्य द्वार खोलने का आदेश दिया। उनके तेवर इतने आक्रामक और सख्त थे कि आम तौर पर कोई भी परिवार घबराकर दरवाजा खोल देता। लेकिन कारोबारी की पत्नी ने असाधारण संयम का परिचय दिया। उन्होंने मुख्य द्वार खोलने से साफ इनकार कर दिया और उनसे अपने असली आधिकारिक दस्तावेज और पहचान पत्र दिखाने की मांग की। महिला ने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें संतुष्ट करने वाले वैध ऑथराइजेशन कागजात नहीं दिखाए जाते, वह घर का मेन गेट किसी भी कीमत पर नहीं खोलेंगी।

व्हाट्सएप पर फर्जी नोटिस और स्क्रीनशॉट की होशियारी

जब फर्जी अधिकारियों का सीधा दबाव काम नहीं आया, तो उन्होंने परिवार को कानूनी कार्रवाई में फंसाने और डराने के लिए एक नई डिजिटल चाल चली। गिरोह के सदस्यों ने कारोबारी के पिता के व्हाट्सएप नंबर पर एक नोटिस भेजा। इस नोटिस पर केंद्रीय जांच एजेंसी के डायरेक्टर का नाम और बकायदा डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज थे, ताकि नोटिस पूरी तरह असली लगे। ठगों को उम्मीद थी कि इस आधिकारिक दस्तावेज को देखकर परिवार डर जाएगा और दरवाजा खोल देगा। अपनी चालाकी को छुपाने के लिए जालसाजों ने नोटिस भेजने के तुरंत बाद उसे 'डिलीट फॉर एवरीवन' भी कर दिया ताकि कोई सबूत न रहे। लेकिन कारोबारी की पत्नी ने मुस्तैदी दिखाते हुए मैसेज डिलीट होने से ठीक पहले उस फर्जी नोटिस का स्क्रीनशॉट ले लिया।

पड़ोसियों का घेराव और जालसाजों का पलायन

बंद दरवाजे के बाहर सड़क पर यह तनावपूर्ण स्थिति करीब डेढ़ घंटे (90 मिनट) तक बनी रही। समय बीतने के साथ ही आसपास के पड़ोसी और इलाके के लोग भी मौके पर एकत्र होने लगे। भीड़ बढ़ती देखकर फर्जी अधिकारियों के हाव-भाव बदलने लगे। जब पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर अधिकारियों से छापेमारी का वैध सर्च वारंट और कागजात की हार्ड कॉपी पेश करने को कहा, तो फर्जी टीम के होश उड़ गए। खुद को चारों तरफ से घिरता देख संदिग्धों ने बहाना बनाया कि असली वारंट और फाइलें उनकी गाड़ी में रखी हैं। इसके बाद असली कागजात लाने का ढोंग करते हुए सभी जालसाज अपनी गाड़ियों में बैठकर मौके से तेजी से फरार हो गए।

आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल और पुलिस जांच

फर्जी टीम के भागते ही पीड़ित परिवार ने बिना समय गंवाए आपातकालीन नंबर 112 पर संपर्क किया और दिल्ली पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की। घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज में संदिग्धों के चेहरे, उनकी गाड़ियाँ और उनके सीबीआई लोगो वाले कपड़े स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हो चुके हैं। पीड़ित परिवार ने दिल्ली पुलिस को सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ व्हाट्सएप पर आए फर्जी नोटिस का स्क्रीनशॉट भी सौंप दिया है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस फिलहाल फुटेज के आधार पर गाड़ियों के नंबर और आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

सवाल-जवाब

रोहिणी में फर्जी रेड का मामला क्या है?
दिल्ली के रोहिणी में 8 से 10 नकली अधिकारियों ने सीबीआई का लोगो पहनकर एक कारोबारी के घर छापेमारी का नाटक किया, जिसे परिवार की समझदारी ने नाकाम कर दिया।
कारोबारी की पत्नी ने जालसाजों को घर में घुसने से कैसे रोका?
महिला ने आधिकारिक पहचान पत्र और सर्च वारंट की हार्ड कॉपी दिखाए बिना मुख्य दरवाजा खोलने से साफ इनकार कर दिया।
ठगों ने परिवार को डराने के लिए क्या डिजिटल चाल चली?
उन्होंने कारोबारी के पिता के व्हाट्सएप पर सीबीआई डायरेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर वाला नोटिस भेजा और बाद में उसे 'डिलीट फॉर एवरीवन' कर दिया।
फर्जी सीबीआई टीम मौके से क्यों भाग गई?
90 मिनट के ड्रामे के बाद जब स्थानीय पड़ोसी इकट्ठा हो गए और कागजात मांगने लगे, तो जालसाज कार से असली वारंट लाने का बहाना बनाकर फरार हो गए।
मामले में पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है?
दिल्ली पुलिस ने आपातकालीन नंबर 112 पर सूचना मिलने के बाद सीसीटीवी फुटेज और फर्जी नोटिस के स्क्रीनशॉट के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·26 दिन पहले

यह घटना साबित करती है कि बॉलीवुड की फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि अपराधियों के लिए मैनुअल बन चुकी हैं, और 'स्पेशल 26' का यह खौफनाक रीमेक अब ओटीटी थ्रिलर का प्लॉट लग रहा है। जिस तरह महिला ने रील लाइफ के तरीकों को रियल लाइफ में समझकर 90 मिनट तक मुकाबला किया, वह बॉक्स ऑफिस पर किसी ब्लॉकबस्टर क्लाइमेक्स से कम नहीं है। ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि पॉप कल्चर अब हमारे समाज और अपराध के तरीकों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। आने वाले समय में मेकर्स इस हाई-वोल्टेज ड्रामे पर जरूर कोई वेब सीरीज बनाना चाहेंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

यह घटना न केवल संगठित अपराध की बदलती शैली को दर्शाती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिकों के बीच डिजिटल साक्षरता की महत्ता को भी रेखांकित करती है। जब तक केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणालियों और उनके डिजिटल दस्तावेजों के सत्यापन के लिए सार्वजनिक सुरक्षा तंत्र मजबूत नहीं किया जाता, तब तक ऐसे गिरोह शहरी इलाकों में आम नागरिकों को आसानी से निशाना बनाते रहेंगे। इस तरह के मामलों से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और बीट स्तर की खुफिया निगरानी में तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·26 दिन पहले

अर्जुन मेहता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि ऐसे संगठित अपराध शहरी सुरक्षा में सेंध लगाने के नए तरीके हैं। फिल्म 'स्पेशल 26' की तर्ज पर दिल्ली के रोहिणी में हुई यह घटना दर्शाती है कि फर्जी दस्तावेजों और डिजिटल चालों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में इस तरह की वारदातों को रोकने के लिए स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस गश्त को अधिक सक्रिय करना होगा, ताकि इस प्रकार के गिरोहों पर लगाम कस सके और नागरिकों की सुरक्षा पुख्ता हो सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे संगठित अपराधी अब बॉलीवुड फिल्मों की तर्ज पर डिजिटल और भौतिक हथकंडों का मिला-जुला इस्तेमाल कर रहे हैं। जिस तरह से व्हाट्सऐप पर फर्जी नोटिस भेजकर 'डिलीट फॉर एवरीवन' का इस्तेमाल किया गया, वह इस बात का संकेत है कि साइबर धोखाधड़ी और पारंपरिक जबरन वसूली का यह नया खतरनाक मिश्रण है। आगे की पुलिस जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि क्या इस गिरोह के तार किसी अंदरूनी सूत्र से जुड़े थे और क्या इन्होंने पहले भी इसी मॉड्यूल का इस्तेमाल कर राष्ट्रीय राजधानी में किसी अन्य परिवार को निशाना बनाया है।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला राजधानी में बढ़ रहे संगठित अपराध के उस खतरनाक ट्रेंड को उजागर करता है जहाँ अपराधी योजनाबद्ध तरीके से घरों को निशाना बना रहे हैं। यह घटना स्पष्ट करती है कि आज के दौर में केवल भौतिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि डिजिटल दस्तावेजों और तकनीकी चालों के प्रति जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक हो चुकी है। इस मामले में पुलिस जांच का दायरा केवल इस गिरोह तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी खंगालना होगा कि इनके पास ऐसे कौन से साधन थे जिससे वे बिना किसी पूर्व सूचना के इस स्तर की योजना को अंजाम देने का दुस्साहस कर सके।

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