दिल्ली में सर्दियों के आगमन के साथ ही गहराने वाले स्मॉग और जहरीली हवा से निपटने के लिए सरकार ने व्यापक कार्ययोजना पेश की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को चार महीने तक चलने वाले विंटर एक्शन प्लान की रूपरेखा साझा की, जो 1 नवंबर से प्रभावी होकर 28 फरवरी तक लागू रहेगा। इस अवधि में राष्ट्रीय राजधानी के भीतर पर्यावरण को सुरक्षित रखने के मकसद से कई कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, ताकि हर साल गंभीर स्तर पर पहुंचने वाले वायु प्रदूषण पर समय रहते लगाम लगाई जा सके।
बाहरी बीएस3 और बीएस4 वाहनों के दिल्ली आने पर रोक
सर्दियों के महीनों में दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। तय योजना के मुताबिक 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली की सीमा में बाहर से आने वाले ऐसे किसी भी वाहन को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी जो बीएस6 मानकों के अनुकूल नहीं हैं। इसका सीधा असर पड़ोसी राज्यों से आने वाले बीएस3 और बीएस4 निजी व व्यावसायिक वाहनों पर पड़ेगा। अगर आपकी गाड़ी दिल्ली में पंजीकृत नहीं है और वह इन पुराने उत्सर्जन मानकों पर चलती है, तो अगले तीन महीनों तक शहर में उसका प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा।
ईंधन भराने के लिए वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र अनिवार्य
राजधानी के भीतर पहले से चल रही गाड़ियों के लिए भी नियमों को बेहद सख्त कर दिया गया है। दिल्ली में पंजीकृत जिन वाहनों के मानक बीएस6 से पुराने हैं, उनके चालकों के पास वैध पीयूसीसी यानी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र होना अनिवार्य किया गया है। अगर किसी वाहन का पीयूसीसी प्रमाणपत्र नवीनीकृत नहीं पाया जाता है, तो पेट्रोल पंपों पर उसे पेट्रोल, डीजल अथवा सीएनजी देने से साफ मना कर दिया जाएगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर की सड़कों पर दौड़ने वाला प्रत्येक पुराना वाहन तय उत्सर्जन सीमा के भीतर ही काम कर रहा हो।
निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक और एआई निगरानी
धूल जनित प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक सभी प्रकार की निर्माण गतिविधियों और ढांचों को गिराने यानी तोड़फोड़ के कार्यों पर मुकम्मल पाबंदी लगा दी है। शहर में किसी भी गुप्त या अनधिकृत निर्माण गतिविधि को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइट मॉनिटरिंग तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके साथ ही सड़कों पर गाड़ियों का बोझ घटाने के लिए निजी व सरकारी दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम लागू करने और कार्यालयों के समय में बदलाव करने का प्रावधान भी इस योजना का मुख्य हिस्सा बनाया गया है।
सार्वजनिक परिवहन और सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर
प्रदूषण के स्तर को नीचे लाने के लिए सरकार ने स्वच्छ आवागमन विकल्पों के इस्तेमाल की अपील की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए दिल्ली मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और कार पूलिंग जैसे माध्यमों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सांस लेने के हमारे अधिकार के लिए, हर कदम मायने रखता है और हमारी दिल्ली हमारी जिम्मेदारी है। प्रशासन का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही वायु गुणवत्ता में टिकाऊ सुधार लाया जा सकता है।
















