विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे स्विस फ्रैंक के मुकाबले इसकी बढ़त थम गई। कारोबारी सत्र के दौरान 0.8270 के स्तर पर कड़े प्रतिरोध का सामना करने के बाद यह मुद्रा जोड़ी फिसलकर 0.8250 के नीचे आ गई। बाजार प्रतिभागी अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में ठहराव की संभावना को देखते हुए सतर्क रुख अपना रहे हैं। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई क्षेत्र में अत्यधिक मूल्यांकन को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भी अमेरिकी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बनाया है, जिससे यह अपने मासिक ट्रेडिंग दायरे के निचले छोर 0.8225 की ओर अग्रसर दिख रही है।
फेडरल रिजर्व की नीति और व्यापक आर्थिक माहौल का असर
अमेरिकी डॉलर की हालिया कमजोरी केवल तकनीकी कारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक आर्थिक रुझान भी काम कर रहे हैं। निवेशक अगले हफ्ते होने वाली फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक की तैयारी कर रहे हैं, जहां इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि नीति निर्माता उधारी लागत में किसी तरह का बदलाव नहीं करेंगे। लंबे समय से बनी ऊंची दरों के चक्र में ठहराव आने की संभावना से डॉलर के प्रति आकर्षण कुछ हद तक धीमा पड़ा है। इसके अलावा वैश्विक वित्तीय बाजारों में तकनीकी शेयरों और विशेष रूप से एआई आधारित परिसंपत्तियों के मूल्यांकन पर उठ रहे सवालों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग को प्रभावित किया है। ऐसी अनिश्चितता की स्थिति में स्विस फ्रैंक जैसी पारंपरिक सुरक्षित संपत्तियों को स्वाभाविक समर्थन मिलता है।
दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड से सामने आए आर्थिक आंकड़ों ने घरेलू अर्थव्यवस्था की मिलीजुली तस्वीर पेश की है। सितंबर महीने के दौरान स्विट्जरलैंड का व्यापार अधिशेष घटकर 1.309 अरब स्विस फ्रैंक पर आ गया, जो कि अगस्त महीने के संशोधित 4.185 अरब स्विस फ्रैंक से काफी कम है। निर्यात में आई मामूली बढ़ोतरी के मुकाबले आयात में तेज उछाल आने से यह अधिशेष संकुचित हुआ है। हालांकि विदेशी मुद्रा बाजार में स्विस फ्रैंक पर इन आंकड़ों का सीधा असर बेहद सीमित रहा, क्योंकि वैश्विक व्यापक आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रा नीति की दिशा ने व्यापार संतुलन के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया।
तकनीकी परिदृश्य और प्रमुख स्तरों का विश्लेषण
चार्ट विश्लेषण के अनुसार यह मुद्रा जोड़ी फिलहाल एक मध्यम मंदी के दौर में कारोबार कर रही है। चार घंटे के समय सीमा वाले चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 38.43 के स्तर पर दिखाई दे रहा है, जो कमजोर गति का संकेत देता है। वहीं दूसरी ओर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी एमएसीडी ऑसिलेटर मामूली रूप से सकारात्मक दायरे में पहुंचा है, जिससे पता चलता है कि गिरावट की गति धीमी तो पड़ रही है लेकिन किसी निर्णायक उलटफेर के स्पष्ट संकेत अभी नहीं मिले हैं। लाइव बाजार संकेतकों में आरएसआई 49 पर स्थिर बना हुआ है और दैनिक धुरी स्तर 0.8253 के करीब है, जिसके नीचे बने रहने पर बिकवाली हावी रहने का जोखिम है।
तकनीकी विश्लेषकों का ध्यान 0.8390 के इलाके में बने डबल टॉप पैटर्न पर टिका है। यदि मौजूदा गिरावट जारी रहती है और भाव 0.8225 के स्तर से नीचे फिसल जाता है, तो इस डबल टॉप पैटर्न की पुष्टि हो जाएगी। 0.8225 का स्तर 2 अक्टूबर और 16 अक्टूबर के निचले स्तरों से मेल खाता है और यह इस पैटर्न की नेकलाइन के रूप में काम कर रहा है। यदि यह सहारा टूटता है, तो विक्रेताओं का मनोबल मजबूत होगा और वे 16 व 22 सितंबर के निचले स्तर 0.8180 की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। इस तकनीकी संरचना का मापा गया अंतिम लक्ष्य 9 सितंबर के निचले स्तर 0.8070 के आसपास खुलता है। तेजी की वापसी के लिए खरीदारों को सबसे पहले सत्र के उच्च स्तर 0.8270 को पार करना होगा, जिसके बाद ही 0.8315 और अंततः 0.8390 के स्तर की राह प्रशस्त हो सकेगी।
वैश्विक मुद्रा बाजार का मिजाज और अन्य संपत्तियों की चाल
वैश्विक मुद्रा परिदृश्य पर नजर डालें तो स्विस फ्रैंक ने प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अपनी मजबूती दर्ज की है, जिसमें यूरो के मुकाबले इसका प्रदर्शन सबसे दमदार रहा। अन्य प्रमुख जोड़ियों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मजबूती देखी गई और एशियाई सत्र के दौरान एयूडी यूएसडी 0.7000 के स्तर की तरफ बढ़ता नजर आया। बाजार के सुधरते माहौल और अमेरिकी डॉलर की रिकवरी में आई रुकावट ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया, हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम और प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय घोषणाओं को लेकर सतर्कता ने इसकी बढ़त को सीमित रखा।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.50 के आसपास स्थिर कारोबार करता दिखा, जहां व्यापारी शुक्रवार को आने वाले जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले किसी बड़े दांव से बच रहे हैं। हालांकि ऊंची अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल दरें येन के मुकाबले डॉलर को निचली सतह पर सहारा दे रही हैं। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन नरमी दर्ज की गई, क्योंकि पश्चिम एशिया के तनाव से कच्चे तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक मुद्रास्फीति जोखिम को बढ़ा रही हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने की संभावना बनी हुई है। डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में नियर प्रोटोकॉल में दो प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि बिटवाइज़ के नियर केंद्रित ईटीएफ में 50 लाख डॉलर से अधिक का संस्थागत प्रवाह दर्ज किया गया।
















