अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र उछाल दर्ज किया गया है। न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स 2.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आसपास पहुंच गया। यह पिछले एक महीने से अधिक समय का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके साथ ही कच्चा तेल अपने लगभग पांच महीने के उच्च स्तर 102.11 डॉलर के बेहद करीब पहुंच चुका है। ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में आ रहे लगातार व्यवधानों और समुद्री परिवहन मार्गों पर बढ़ते हमलों ने तेल की कीमतों में बड़ा रिस्क प्रीमियम जोड़ दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और समुद्री नाकेबंदी की चेतावनी
वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले समुद्री मार्गों में सुरक्षा की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में दो तेल टैंकरों को बारूदी सुरंगों के जरिए निशाना बनाया गया, जिससे जहाजों में आग लग गई और उनका आवागमन रुक गया। हालांकि नौसेना ने घटना की सटीक तारीख का खुलासा नहीं किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से दुनिया का सबसे अहम चोकपॉइंट है, जहां से दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या जहाजों पर हमले सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजार को झकझोर कर रख देते हैं।
तनाव को और बढ़ाते हुए ईरान ने इस सप्ताहांत चेतावनी जारी की है कि वह अपनी नाकेबंदी का दायरा केवल फारस की खाड़ी तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और स्वेज नहर तक बढ़ा सकता है। ईरानी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका और इज़राइल की ओर से संभावित हमलों के जवाब में जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। यदि लाल सागर के मुहाने पर स्थित बाब अल-मंदेब और भूमध्य सागर को जोड़ने वाली स्वेज नहर में जहाजों का आवागमन बाधित होता है, तो एशिया और यूरोप के बीच होने वाला संपूर्ण कंटेनर तथा ईंधन परिवहन गंभीर संकट में पड़ जाएगा। जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाकर लंबा मार्ग चुनना पड़ेगा, जिससे ढुलाई लागत और आपूर्ति का समय दोनों अत्यधिक बढ़ जाएंगे।
रूसी तेल अवसंरचना पर यूक्रेनी हमले और आपूर्ति का दबाव
मध्य पूर्व के अतिरिक्त पूर्वी यूरोप में भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं उभर आई हैं। यूक्रेन ने रूसी तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे पर अपने हमले दोबारा शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही यूक्रेन ने अमेरिका पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। रूस दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है, और उसके शोधन संयंत्रों तथा पाइपलाइनों पर होने वाले हमले वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता और तैयार ईंधन की उपलब्धता पर सीधा असर डालते हैं। एक ही समय में दो प्रमुख ऊर्जा उत्पादक और परिवहन क्षेत्रों में सैन्य टकराव की वजह से तेल की कीमतों में नरमी के संकेत बेहद कमजोर नजर आ रहे हैं।
दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेतक और अहम ट्रेडिंग स्तर
डब्ल्यूटीआई यूएस ऑयल के दैनिक चार्ट का विश्लेषण करने पर बाजार का रुझान निकट भविष्य में काफी तेजी का संकेत दे रहा है। वर्तमान में यह अनुबंध 100.49 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। तकनीकी संरचना को मजबूती इस बात से मिल रही है कि कीमतें अपने 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 93.79 डॉलर से काफी ऊपर बनी हुई हैं। हाल की तीव्र अस्थिरता के बावजूद लंबी अवधि का अपट्रेंड पूरी तरह सुरक्षित दिखाई दे रहा है। 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 66.38 के स्तर पर बना हुआ है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाजार सकारात्मक दायरे में मजबूती से टिका हुआ है, हालांकि यह अभी ओवरबॉट जोन में प्रवेश करने से कुछ कदम दूर है। इससे यह साफ होता है कि तेजी की गति निरंतर बनी हुई है, भले ही कीमतें तकनीकी रूप से खिंचाव का सामना कर रही हों।
नीचे की ओर गिरावट की स्थिति में सबसे पहला और महत्वपूर्ण सपोर्ट 20 दिवसीय EMA 93.79 डॉलर पर स्थित है। यदि बाजार में कोई सुधारात्मक गिरावट आती है, तो खरीदार इस स्तर के पास अपने लॉन्ग पोजिशन की रक्षा करने के लिए सक्रिय हो सकते हैं। जब तक कीमतें इस मजबूत डिमांड जोन के ऊपर बनी रहती हैं, तब तक किसी भी गिरावट पर खरीदारी करने की रणनीति को आक्रामक बिकवाली के मुकाबले प्राथमिकता दी जाएगी। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी प्रकार का कंसोलिडेशन केवल व्यापक तेजी के बीच एक ठहराव होगा, न कि ट्रेंड रिवर्सल का संकेत।
डब्ल्यूटीआई क्रूड की बुनियादी विशेषताएं और वैश्विक भूमिका
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में खरीदे और बेचे जाने वाले कच्चे तेल के प्रमुख ग्रेड्स में से एक है। वैश्विक बाजार में मुख्य रूप से तीन प्रमुख ऑयल बेंचमार्क माने जाते हैं, जिनमें डब्ल्यूटीआई के साथ ब्रेंट और दुबई क्रूड शामिल हैं। डब्ल्यूटीआई को उद्योग में लाइट और स्वीट क्रूड के रूप में जाना जाता है। इसका कारण इसका कम घनत्व (लाइट) और अपेक्षाकृत बहुत कम सल्फर सामग्री (स्वीट) है। कम सल्फर और हल्के घनत्व के कारण इस प्रकार के कच्चे तेल को रिफाइन करना काफी आसान और सस्ता होता है, जिससे इससे उच्च गुणवत्ता वाले गैसोलीन और डीजल का उत्पादन अधिक मात्रा में किया जा सकता है।
डब्ल्यूटीआई क्रूड का उत्पादन मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के तेल क्षेत्रों में होता है। इसका वितरण और मूल्य निर्धारण ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग हब के माध्यम से संचालित होता है। कुशिंग को तेल उद्योग में दुनिया का पाइपलाइन चौराहा माना जाता है, क्योंकि यहां देश भर से तेल लाने और ले जाने वाली प्रमुख पाइपलाइनों और विशाल स्टोरेज टैंकों का विशाल नेटवर्क मौजूद है। यह अमेरिकी बाजार के साथ-साथ दुनिया भर के ऊर्जा व्यापारियों, रिफाइनरियों और सट्टेबाजों के लिए एक मानक बेंचमार्क का काम करता है, जिसके मूल्य का नियमित रूप से वित्तीय मीडिया में विश्लेषण किया जाता है।
तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
अन्य वित्तीय और भौतिक संपत्तियों की तरह कच्चे तेल की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से संचालित होती हैं। वैश्विक आर्थिक विकास दर में तेजी से औद्योगिक उत्पादन, माल ढुलाई और यात्रा में वृद्धि होती है, जिससे ऊर्जा की खपत और मांग बढ़ती है। इसके विपरीत, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी या कमजोरी के दौर में होती है, तो ईंधन की मांग घट जाती है जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। दूसरी तरफ, राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं, जिससे बाजारों में भय का माहौल बनता है और कीमतें तेजी से ऊपर की ओर भागती हैं।
कच्चे तेल के मूल्य निर्धारण में ओपेक (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) के निर्णय बेहद निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ओपेक 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो हर छह महीने में होने वाली बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है और तेल के दाम बढ़ जाते हैं। इसके विपरीत, उत्पादन बढ़ाने के निर्णय से बाजार में कच्चा तेल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो जाता है और कीमतें घटने लगती हैं। इसके अलावा ओपेक प्लस समूह में रूस सहित 10 अन्य गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं, जो वैश्विक उत्पादन के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करते हैं और बाजार की दिशा तय करते हैं।
अमेरिकी डॉलर के मूल्य का भी डब्ल्यूटीआई की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में तय होता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले आयातकों के लिए तेल खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग को बढ़ावा मिलता है। वहीं, डॉलर के मजबूत होने से गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए तेल महंगा हो जाता है, जिससे खपत सीमित हो सकती है।
इन्वेंट्री रिपोर्ट्स और उनके बाजार प्रभाव
कच्चे तेल के व्यापारी अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (API) और ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्टों पर पैनी नजर रखते हैं। ये आंकड़े अमेरिकी वाणिज्यिक भंडारण में कच्चे तेल और ईंधन के स्टॉक की स्थिति दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में इन्वेंट्री में अप्रत्याशित कमी दिखाई देती है, तो इसका तात्पर्य यह निकाला जाता है कि मांग मजबूत बनी हुई है या आपूर्ति घट रही है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आती है। इसके विपरीत, इन्वेंट्री में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि मांग सुस्त है और आपूर्ति बढ़ रही है, जिससे कीमतों में नरमी आती है।
एपीआई अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी ईआईए अपनी रिपोर्ट अगले दिन यानी बुधवार को सार्वजनिक करती है। आमतौर पर दोनों एजेंसियों के नतीजे एक-दूसरे के काफी समान होते हैं और 75 प्रतिशत मौकों पर उनके आंकड़ों में अंतर एक प्रतिशत के भीतर ही रहता है। हालांकि ईआईए एक आधिकारिक सरकारी संस्था होने के कारण संस्थागत निवेशक और बाजार के बड़े भागीदार इसके आंकड़ों को अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय मानते हैं।
वैश्विक वित्तीय बाजारों, मुद्राओं और बॉन्ड यील्ड की स्थिति
कच्चे तेल में आई तेजी के बीच अन्य वैश्विक वित्तीय संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को एशियाई सत्र के दौरान मुद्रा जोड़े AUD/USD में मजबूती दर्ज की गई और यह 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ा। बेहतर बाजार धारणा और अमेरिकी डॉलर की तेजी में ठहराव ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम और आगामी एआई टेक अर्निंग रिपोर्ट के प्रति सतर्कता इस बढ़त को सीमित रख सकती है।
उधर जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY 158.50 के स्तर के आसपास स्थिर दिखाई दिया। शुक्रवार को जारी होने वाले जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई आंकड़ों से पहले निवेशक किसी बड़ी दिशा में दांव लगाने से बचते दिखे। इस बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर ने येन के मुकाबले डॉलर को मजबूती प्रदान की है।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला है। यूरोपीय कारोबार के दौरान सोना फिसलकर लगभग 4,120 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सुधार और कच्चे तेल के बढ़ते भाव ने कीमती धातुओं की सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग को थोड़ा प्रभावित किया। अमेरिका के 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 0.35 प्रतिशत गिरकर 5.13 प्रतिशत के पास दर्ज की गई, हालांकि सोमवार को इसमें 1.2 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया था। वहीं डिजिटल एसेट बाजार में नियर प्रोटोकॉल की कीमत में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जो पिछले सत्र की गिरावट के समान थी। इसके बावजूद संस्थागत मांग स्थिर बनी रही और बिटवाइज़ के नियर-केंद्रित ईटीएफ में सोमवार को 5 मिलियन डॉलर से अधिक का ताजा निवेश दर्ज किया गया।















