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दिल्ली मेट्रो में गूंजी दादा की जानी-पहचानी आवाज तो चौंक पड़ा नन्हा रुशान, शम्मी नारंग ने सुनाई भावुक कहानीभारत
5 अक्तू॰ 2026, 10:36 am (50 मिनट पहले)· 0

दिल्ली मेट्रो में गूंजी दादा की जानी-पहचानी आवाज तो चौंक पड़ा नन्हा रुशान, शम्मी नारंग ने सुनाई भावुक कहानी

दूरदर्शन के पूर्व एंकर और दिल्ली मेट्रो के मशहूर अनाउंसर शम्मी नारंग जब अपने पोते रुशान को पहली बार मेट्रो में ले गए, तो कोच में अपनी ही आवाज सुनकर बच्चे का मासूम रिएक्शन चर्चा का विषय बन गया।

राजधानी की लाइफलाइन कही जाने वाली ट्रेन में सफर करते समय दरवाजे दायीं तरफ खुलेंगे की गंभीर और जानी-पहचानी आवाज हर यात्री के कानों में रोज पड़ती है। कई दशकों से यात्रियों का मार्गदर्शन कर रही इस प्रतिष्ठित ध्वनि के पीछे का चेहरा दूरदर्शन के जाने-माने एंकर और वॉइस आर्टिस्ट शम्मी नारंग हैं। हाल ही में यही ऐतिहासिक आवाज एक बेहद निजी और दिल छू लेने वाले पारिवारिक अनुभव का जरिया बन गई, जब उन्होंने अपने छोटे पोते को पहली बार मेट्रो की सैर कराई।

गोद में दादा और स्पीकर से आती वही आवाज

शम्मी नारंग अपने नन्हे पोते रुशान को पहली बार मेट्रो ट्रेन की यात्रा पर लेकर निकले थे। घर में अपने दादू के साथ खेलने और रोज उनसे बातें करने वाला रुशान उस वक्त पूरी तरह हैरान रह गया, जब वही जानी-पहचानी आवाज अचानक मेट्रो के डिब्बे में लगे स्पीकरों से गूंज उठी। बच्चा उस वक्त खुद अपने दादा की गोद में बैठा हुआ था, लेकिन अपने सामने मौजूद शख्स की आवाज को ट्रेन की आधिकारिक घोषणा के रूप में सुनकर वह चकित होकर इधर-उधर डिब्बे में देखने लगा। वह समझ नहीं पा रहा था कि जो आवाज वह सिर्फ घर की चारदीवारी में सुनता था, वह इस विशाल सार्वजनिक ट्रेन में कैसे बोल रही है।

पीढ़ियों के सफर पर भावुक हुए शम्मी नारंग

इस यादगार सफर के बाद शम्मी नारंग ने एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए अपने जज्बात बयां किए। उन्होंने कहा, "मुझे बहुत गर्व है कि मेरी आवाज एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाएगी।"

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने साझा किया कि वह खुद इन ट्रेनों में हमेशा सफर नहीं कर पाएंगे, लेकिन उनकी यह आवाज विरासत के रूप में जीवित रहेगी। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि यह आवाज न सिर्फ उनके पोते रुशान तक, बल्कि भविष्य में शायद उसके बच्चों और पोतों तक तथा उससे भी आगे कई पीढ़ियों तक इसी तरह सफर करती रहेगी। नन्हे बच्चे के लिए यह पहला अनुभव जितना अचरज भरा था, परिवार के लिए उतना ही भावुक और यादगार बन गया।

एक आवाज जो बन चुकी है शहर की पहचान

दिल्ली मेट्रो की हिंदी उद्घोषणाओं को अपनी आवाज देने वाले शम्मी नारंग की यह ध्वनि अब केवल एक निर्देश भर नहीं है, बल्कि करोड़ों मुसाफिरों की दैनिक दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बन चुकी है। कोच के भीतर जब भी कोई सूचना प्रसारित होती है, तो लोग बिना देखे ही उस आवाज की गंभीरता और स्पष्टता को पहचान लेते हैं। ऐसे में जब परिवार की नई पीढ़ी ने सार्वजनिक व्यवस्था में अपने ही बुजुर्ग की मौजूदगी को महसूस किया, तो यह क्षण एक पारिवारिक विरासत के खूबसूरत पड़ाव में तब्दील हो गया।

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सवाल-जवाब

शम्मी नारंग कौन हैं?
शम्मी नारंग दूरदर्शन के जाने-माने एंकर और दिल्ली मेट्रो में हिंदी घोषणाओं के प्रसिद्ध वॉइस आर्टिस्ट हैं।
शम्मी नारंग के पोते का नाम क्या है?
उनके नन्हे पोते का नाम रुशान है।
मेट्रो में रुशान क्यों हैरान रह गया था?
रुशान अपने दादा की आवाज घर पर तो रोज सुनता था, लेकिन मेट्रो के स्पीकर से उनकी घोषणा सुनकर वह आश्चर्यचकित होकर इधर-उधर देखने लगा।
शम्मी नारंग ने सोशल मीडिया पर क्या संदेश लिखा?
उन्होंने लिखा कि उन्हें गर्व है कि उनकी आवाज एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक, उनके पोते और उसके बाद तक सफर करेगी।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 मिनट पहले

शम्मी जी की आवाज़ वाकई दिल्ली की पहचान बन चुकी है। जब मैं खुद रोज़ मेट्रो से घर लौटता हूँ, तो दरवाज़ा खुलने की वो आवाज़ कान में आते ही दिनभर की थकान मिट जाती है। सोचता हूँ कि उनके पोते के लिए कितना हैरान करने वाला रहा होगा जब उसने अपने दादा को पूरी ट्रेन से बात करते सुना होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·23 मिनट पहले

करण भाई, सच कहा आपने! वो 'दरवाजे दायीं तरफ खुलेंगे' वाली आवाज सचमुच दिनभर की भागदौड़ के बाद सुकून देती है।

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