राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित ऐतिहासिक पटेल मैदान इस बार विजयादशमी के मौके पर न केवल भव्य आतिशबाजी और पुतला दहन का गवाह बनेगा, बल्कि आपसी भाईचारे की अनूठी कहानी भी पेश करेगा। नगर निगम की देखरेख में आयोजित होने वाले इस दशहरा उत्सव की तैयारियां अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में जलाए जाने वाले रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशालकाय पुतलों को आकार देने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से आए मुस्लिम कारीगरों ने संभाली है। हिंदू पर्व के लिए मुस्लिम शिल्पकारों का यह समर्पण दोनों समुदायों के बीच दशकों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सद्भाव को जीवंत करता है।
फतेहपुर सीकरी में तीन महीने तक चला निर्माण कार्य
पुतलों के निर्माण का जिम्मा संभाल रहे मुख्य कारीगर जाकिर अहमद के अनुसार, इस पूरे आयोजन की रूपरेखा काफी समय पहले ही तय कर ली गई थी। उत्सव को भव्य रूप देने के लिए पुतलों का प्राथमिक ढांचा और सजावट से जुड़ा अधिकांश कार्य पिछले तीन महीने से उत्तर प्रदेश स्थित उनके पैतृक गांव फतेहपुर सीकरी में चल रहा था। पुतलों में लगने वाला अधिकतर साजो-सामान ट्रकों के जरिए सड़क मार्ग से अजमेर पहुंचाया गया है। जाकिर अहमद अपनी पूरी टीम के साथ पिछले पांच दिनों से अजमेर के पटेल मैदान में डेरा डाले हुए हैं, जहां बांस की खपच्चियों, मजबूत रस्सियों, कागजों और चमकीले कपड़ों को जोड़कर अंतिम रूप दिया जा रहा है।
65 फीट का रावण और 45 फीट ऊंचे कुंभकरण-मेघनाथ
पटेल मैदान में खड़े किए जा रहे पुतलों का आकार इस बार दर्शकों को दूर से ही आकर्षित करेगा। कारीगरों ने मुख्य रावण के पुतले की कुल ऊंचाई लगभग 65 फीट तय की है, जो मैदान के केंद्र में स्थापित होगा। इसके अगल-बगल कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले खड़े किए जाएंगे, जिनकी ऊंचाई करीब 45-45 फीट रखी गई है। इन भीमकाय ढांचों को दूर से आकर्षक दिखाने के लिए विशेष चमकदार कागजों और रंग-बिरंगे कपड़ों का उपयोग किया जा रहा है। तेज हवा या वजन से पुतले झुकें नहीं, इसके लिए बुनियादी ढांचे की मजबूती की बार-बार तकनीकी जांच की जा रही है।
आंखें झपकाएगा और तलवार लहराएगा हाईटेक रावण
इस वर्ष का पुतला दहन पारंपरिक आयोजनों की तुलना में अधिक रोमांचक और हाईटेक तकनीक से लैस रहेगा। कारीगरों ने रावण के पुतले के भीतर विशेष यांत्रिक प्रणालियां जोड़ी हैं, जिससे दशहरा मेले में मौजूद दर्शकों को यह पुतला अपनी आंखें झपकाता हुआ दिखाई देगा। इसके साथ ही रावण के हाथ में थमाई गई विशालकाय तलवार भी तकनीकी तालमेल की बदौलत हवा में लहराती नजर आएगी। पुतले के मुंह से अंगारे और चिंगारियां निकलने का विशेष प्रबंध भी किया गया है, जो दहन से ठीक पहले दृश्य को बेहद जीवंत बना देगा।
रिमोट कंट्रोल का बटन दबाते ही हवा में उड़ेंगे 10 सिर
आतिशबाजी के मामले में भी इस बार आधुनिक सुरक्षा और तकनीकी उपाय अपनाए गए हैं। कारीगर जाकिर अहमद ने बताया कि रावण के सभी दस सिरों को एक साथ आग लगाने के बजाय उन्हें नियंत्रित करने के लिए रिमोट कंट्रोल प्रणाली लगाई गई है। जैसे ही मंच से रिमोट का बटन दबाया जाएगा, रावण के सभी दस सिर एक-एक करके सिलसिलेवार ढंग से हवा में उड़ते हुए नजर आएंगे। यह विशेष दृश्य मैदान में उमड़ने वाले हजारों दर्शकों के लिए सबसे बड़ा कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनेगा।
पीढ़ियों से अजमेर आ रहा है जाकिर का परिवार
इन पुतलों को तैयार करने के पीछे किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का साझा श्रम लगा हुआ है। जाकिर अहमद बताते हैं कि उनका परिवार बीते कई सालों से नियमित रूप से अजमेर आकर दशहरा पुतलों का निर्माण करता आ रहा है। परिवार के सभी सदस्यों के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से बंटी हुई हैं। कुछ सदस्य बांस के भारी ढांचे को संतुलित और मजबूत बनाने में जुटे रहते हैं, जबकि अन्य सदस्य सजावट, रंगाई-पुताई और कागज चिपकाने का बारीक काम संभालते हैं। दिन-रात की इस सामूहिक मेहनत के दम पर विजयादशमी की तय तारीख तक तीनों पुतलों को दहन के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा।



















