पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हाल
देवघर के किसानों को सलाह, सितंबर में नर्सरी की एक चूक से बर्बाद हो सकती है सब्जियों की पूरी फसलझारखंड
8 सित॰ 2026, 4:03 pm (17 दिन पहले)· 2

देवघर के किसानों को सलाह, सितंबर में नर्सरी की एक चूक से बर्बाद हो सकती है सब्जियों की पूरी फसल

देवघर में सर्दी की सब्जियों के लिए किसान नर्सरी तैयार करने में जुटे हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञ वकील यादव की मानें तो सही तकनीक न अपनाने पर महंगे हाइब्रिड बीज भी बेकार जा सकते हैं।

झारखंड के देवघर जिले में किसान अभी से ठंड के मौसम की सब्जियों की तैयारी में जुट गए हैं। कुछ ही हफ्तों में तापमान गिरना शुरू होगा और बाजार में टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और मिर्च जैसी सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ेगी। सर्दी के इस सीजन में सही समय पर अच्छी नर्सरी तैयार करने वाले किसान ही बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा कमा पाते हैं, और इसके लिए सितंबर का महीना सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान पौध तैयार करने का काम शुरू होता है जो अगले कुछ हफ्तों में खेत तक पहुंचनी है।

महंगे हाइब्रिड बीज खरीदने के बाद भी क्यों बिगड़ जाता है खेल

देवघर में कई किसान इन दिनों नर्सरी तैयार करने में लगे हैं, लेकिन एक आम गलती अक्सर उनकी पूरी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद कर देती है। किसान बाजार से महंगे और अच्छी क्वालिटी वाले हाइब्रिड बीज तो खरीद लेते हैं, मगर नर्सरी तैयार करने के सही तरीके को नजरअंदाज कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि कई बीज अंकुरित ही नहीं हो पाते, जबकि कुछ पौधे शुरुआती अवस्था में ही गलकर बर्बाद हो जाते हैं। इससे किसानों को दोहरा झटका लगता है, एक तरफ बीज पर खर्च की गई रकम बेकार चली जाती है और दूसरी तरफ आगे चलकर फसल की पैदावार पर भी सीधा असर पड़ता है। कई बार तो किसानों को यह अंदाजा भी नहीं होता कि नुकसान की असली वजह बीज नहीं बल्कि नर्सरी की तैयारी में हुई चूक है।

ये भी पढ़ें

कृषि विशेषज्ञ बोले, पहले नर्सरी को मजबूत बनाएं

देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव का कहना है कि सब्जियों की खेती से अच्छी कमाई का पूरा गणित नर्सरी की गुणवत्ता पर टिका होता है। स्वस्थ और मजबूत पौधा ही आगे चलकर बेहतर फसल और ज्यादा उत्पादन दे सकता है। उनके मुताबिक किसान अक्सर सिर्फ बीज की कीमत और किस्म पर ध्यान देते हैं, जबकि नर्सरी तैयार करने की प्रक्रिया को उतनी गंभीरता से नहीं लेते, और यही छोटी सी चूक बाद में बड़े नुकसान की वजह बन जाती है। उनका कहना है कि नर्सरी में तैयार पौधे जितने स्वस्थ होंगे, खेत में रोपाई के बाद उनकी बढ़वार उतनी ही तेज और मजबूत होगी। इसलिए किसानों को बीज की खरीद के साथ-साथ यह भी सीखना जरूरी है कि नर्सरी को किस तरीके से तैयार किया जाए।

रेज्ड बेड और प्रो-ट्रे, नर्सरी तैयार करने के दो तरीके

वकील यादव के अनुसार सब्जियों की नर्सरी मुख्य रूप से दो तरीकों से तैयार की जाती है। पहला तरीका पारंपरिक है, जिसमें खेत में उठी हुई क्यारी यानी रेज्ड बेड बनाकर उसमें बीज बोए जाते हैं। दूसरा और अपेक्षाकृत नया तरीका प्रो-ट्रे में नर्सरी तैयार करने का है, जिसे उन्होंने किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद बताया। प्रो-ट्रे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पोर्टेबल होती है, यानी जरूरत पड़ने पर इसे एक जगह से दूसरी जगह आसानी से खिसकाया जा सकता है। अगर लगातार तेज बारिश हो रही हो और पौधों के भीगकर खराब होने का डर हो, तो किसान प्रो-ट्रे को झटपट किसी छांव वाली या सुरक्षित जगह पर रख सकते हैं, जिससे नाजुक पौधे बारिश और अन्य नुकसान से बचे रहते हैं। पारंपरिक क्यारी में यह सुविधा नहीं मिलती, क्योंकि एक बार बीज बो देने के बाद पूरी क्यारी को मौसम की मार से बचाना आसान नहीं होता।

जड़ों को कम नुकसान, इसलिए तेज होती है ग्रोथ

रेज्ड बेड में तैयार पौधों के साथ एक दिक्कत यह रहती है कि रोपाई के वक्त जड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। पौधों को क्यारी से बाहर निकालते समय जड़ टूट सकती है या मिट्टी से अलग होने पर पौधे को झटका लग सकता है, जिसका सीधा असर उसकी सेहत और आगे की ग्रोथ पर पड़ता है। इसके मुकाबले प्रो-ट्रे में तैयार पौधों को मिट्टी समेत आसानी से बाहर निकाला जा सकता है, इसलिए जड़ें ज्यादातर सुरक्षित बनी रहती हैं। यही वजह है कि खेत में रोपाई के तुरंत बाद ऐसे पौधे जल्दी संभल जाते हैं, नई मिट्टी में जल्दी जड़ पकड़ लेते हैं और उनकी ग्रोथ भी रेज्ड बेड के पौधों के मुकाबले काफी बेहतर देखी जाती है। इससे फसल जल्दी तैयार होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक अगर किसान ठंड के मौसम की सब्जियों से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो उन्हें शुरुआत नर्सरी से ही सही तरीके से करनी होगी। मजबूत जड़ और स्वस्थ पौधा ही आगे चलकर अच्छी फलन की नींव बनते हैं। इसलिए सलाह दी जा रही है कि सितंबर में नर्सरी तैयार करते वक्त जल्दबाजी या लापरवाही से बचें और जहां संभव हो, प्रो-ट्रे विधि अपनाएं। थोड़ी सी सतर्कता और सही तकनीक अपनाकर किसान कमजोर पौधों की वजह से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं और ठंड के सीजन में सब्जियों की बेहतर पैदावार के साथ-साथ अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं। महंगे बीज खरीदना भर काफी नहीं है, असली फर्क नर्सरी की देखभाल और सही तकनीक चुनने से ही पड़ता है।

सवाल-जवाब

नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे अहम महीना कौन सा माना जाता है?
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सितंबर का महीना ठंड के मौसम की सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
किसान अक्सर कौन सी गलती कर बैठते हैं?
महंगे हाइब्रिड बीज खरीदने के बावजूद कई किसान नर्सरी तैयार करने के सही तरीके पर ध्यान नहीं देते, जिससे बीज अंकुरित नहीं होते या पौधे शुरुआती अवस्था में ही गलकर खराब हो जाते हैं।
सब्जियों की नर्सरी किन तरीकों से तैयार की जा सकती है?
मुख्य रूप से दो तरीकों से, रेज्ड बेड यानी उठी हुई क्यारी में और प्रो-ट्रे में।
प्रो-ट्रे नर्सरी का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
प्रो-ट्रे पोर्टेबल होती है, जिसे तेज बारिश या खराब मौसम में आसानी से सुरक्षित या छायादार जगह पर रखा जा सकता है।
रेज्ड बेड नर्सरी में क्या दिक्कत आती है?
रोपाई के समय पौधों को क्यारी से निकालने पर जड़ें टूट सकती हैं या पौधे को झटका लग सकता है, जिससे उनकी सेहत प्रभावित होती है।
प्रो-ट्रे में तैयार पौधे रोपाई के बाद कैसा प्रदर्शन करते हैं?
इन पौधों को मिट्टी समेत निकाला जाता है, इसलिए जड़ों को कम नुकसान होता है और खेत में रोपाई के बाद इनकी ग्रोथ तेज और बेहतर होती है।
यह सलाह किसने दी है?
देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने यह जानकारी दी है।
ठंड के मौसम में मुख्य रूप से कौन सी सब्जियां उगाई जाती हैं?
टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और मिर्च जैसी सब्जियां ठंड के मौसम में किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बनती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

यह मुद्दा कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा है। जब किसानों की फसल शुरुआती लापरवाही से नष्ट होती है, तो वे कर्ज के जाल में फंसते हैं और कई बार आपराधिक या गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति पैदा होती है। ऐसे मामलों में प्रशासनिक और कृषि विभागों को समय पर तकनीकी सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि किसानों का शोषण और नुकसान रुके।

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

यह खबर ग्रामीण इलाकों की गहरी आर्थिक हकीकत को उजागर करती है। उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों में भी जब किसान महंगे बीज खरीदने के बाद तकनीकी जानकारी के अभाव में फसल गंवाते हैं, तो उन पर कर्ज का दबाव बढ़ जाता है। प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध कृषि प्रशिक्षण और ब्लॉक मुख्यालयों से मिलने वाली मदद की निगरानी बहुत जरूरी है, ताकि किसानों को वित्तीय तंगी और संकट से बचाया जा सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp