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गांधीनगर की निर्माणाधीन साइट पर बड़ा हादसा, क्रेन गिरने से मलबे में दबे दर्जनों मजदूरगुजरात
9 सित॰ 2026, 11:09 pm (3 दिन पहले)· 3

गांधीनगर की निर्माणाधीन साइट पर बड़ा हादसा, क्रेन गिरने से मलबे में दबे दर्जनों मजदूर

गांधीनगर के कुडासन इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत का हिस्सा गिरने से बड़ा हादसा हो गया है। मलबे में दबे 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि कई अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका है।

गांधीनगर के कुडासन इलाके में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान एक भयंकर हादसा सामने आया है, जहां एक निर्माणाधीन इमारत का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। इस दुर्घटना के बाद से वहां अफरातफरी मच गई और कई श्रमिक मलबे के नीचे दब गए। प्रशासनिक अमला और राहत दल तुरंत हरकत में आ गए और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया गया।

मलबे से निकाले गए घायल मजदूर

हादसे के तुरंत बाद चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुल 12 मजदूरों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बाहर निकाले गए इन श्रमिकों को मामूली चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए पास के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, शुरुआती अनुमानों के मुताबिक अभी भी 10 से 15 मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका बनी हुई है, जिनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

क्रेन टूटने और स्लैब गिरने से हुआ हादसा

प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दुर्घटना उस वक्त घटी जब इमारत की ऊपरी मंजिल पर स्लैब ढालने का काम चल रहा था। इसी निर्माण कार्य के दौरान अचानक एक भारी क्रेन अपना संतुलन खो बैठी और सीधे नीचे आ गिरी, जिससे ढांचे का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। घटना की सूचना मिलते ही डिप्टी सीएम हर्ष संघवी व्यक्तिगत रूप से हालात का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए।

फायर डिपार्टमेंट और प्रशासन की मुस्तैदी

गांधीनगर के फायर ऑफिसर राजेश पटेल ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कुडासन क्षेत्र में स्थित इस निर्माणाधीन इमारत का ढांचा ढहने के बाद दमकल विभाग की कई टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई थीं। वर्तमान में मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने का कार्य अत्यंत तेजी से किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है और विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है।

दिल्ली हादसे की यादें ताजा

यह ताजा दुर्घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश की राजधानी दिल्ली में हुए एक अन्य दर्दनाक इमारत हादसे के घाव अभी भरे भी नहीं थे। कुछ दिन पहले ही दिल्ली में एक पांच मंजिला पुरानी इमारत अचानक ढह गई थी, जिसके मलबे में दबने से सात लोगों की जान चली गई थी। उस जर्जर इमारत के भीतर एक पीजी का संचालन किया जा रहा था, जिसने शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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सवाल-जवाब

गांधीनगर में हादसा किस इलाके में हुआ?
यह हादसा गांधीनगर के कुडासन इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत पर हुआ।
हादसे के वक्त इमारत में क्या काम चल रहा था?
घटना के समय इमारत में स्लैब डालने का निर्माण कार्य चल रहा था।
मलबे से कितने मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया है?
अब तक 12 मजदूरों को मलबे से जिंदा बाहर निकाला जा चुका है जिन्हें हल्की चोटें आई हैं।
मलबे में अभी कितने लोगों के दबे होने की आशंका है?
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 10 से 15 मजदूरों के अभी भी मलबे में दबे होने की खबर है।
घटनास्थल पर राहत कार्य के लिए कौन पहुंचे?
डिप्टी सीएम हर्ष संघवी और दमकल विभाग की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·2 दिन पहले

गांधीनगर की इस दुर्घटना ने शहरी क्षेत्रों में निर्माण स्थलों की सुरक्षा और बुनियादी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनोरंजन जगत की तरह ही मीडिया को भी ऐसे गंभीर हादسات पर जन-जागरूकता बढ़ाने और जवाबदेही तय करने के लिए लगातार गंभीर कवरेज जारी रखनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकी जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

गांधीनगर के कुडासन में हुआ यह हादसा निर्माण क्षेत्र में गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को उजागर करता है। क्रेन संतुलन खोने और स्लैब गिरने जैसी घटनाएं न केवल श्रमिकों की जान जोखिम में डालती हैं, बल्कि कॉरपोरेट और रियल एस्टेट सेक्टर की साख को भी भारी नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसे हादसों से परियोजनाओं में देरी होती है, लागत बढ़ती है और निवेशकों का विश्वास डगमगाता है। प्रशासन और डेवलपरों को अब कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाने होंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

गांधीनगर की इस घटना से शहरी विकास और रियल एस्टेट क्षेत्र में सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जब तक निर्माण स्थलों पर तकनीकी ऑडिट और श्रम कानूनों का सख्त पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा। इस दुर्घटना के बाद अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है और भविष्य के लिए नीतिगत स्तर पर क्या कड़े कदम उठाए जाते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

गांधीनगर की इस घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और तकनीकी ऑडिट की अनिवार्य्ता को रेखांकित किया है। भारी मशीनों के संचालन के दौरान लापरवाही और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी अक्सर इस तरह की आपदाओं का कारण बनती है। उप मुख्यमंत्री के त्वरित दौरे के बाद अब यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन केवल बचाव कार्य तक सीमित न रहे, बल्कि ठेकेदारों और बिल्डरों की जवाबदेही तय करते हुए पूरे राज्य में अनियोजित और असुरक्षित निर्माण गतिविधियों की कड़ी निगरानी करे ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला अब आईपीसी और संबंधित श्रम कानूनों के तहत सख्त आपराधिक लापरवाही का बनता है। हमारी जांच में यह सामने आना चाहिए कि क्या भारी क्रेन का उपयोग करते समय अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट और लोड कैपेसिटी की जांच की गई थी या नहीं। यदि जांच में बिल्डर और ठेकेदार की ओर से सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लोक सुरक्षा से खिलवाड़ के तहत एफआईआर दर्ज कर त्वरित कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, तभी ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

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