असम की राजधानी गुवाहाटी एक बार फिर जांच एजेंसियों की नजर में है, और इस बार वजह है शहर का संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के एक ट्रांजिट प्वाइंट के तौर पर इस्तेमाल होना। पलटन बाजार इलाके के एक लॉज से 10 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिए जाने के बाद यह आशंका और मजबूत हो गई है कि सीमावर्ती राज्यों के रास्ते भारत में दाखिल होने वाले लोग इस शहर को कुछ देर रुकने और आगे की यात्रा के अड्डे के रूप में काम में ला रहे हैं।
बंगाल से ट्रेन पकड़कर पहुंचे असम
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए लोग कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की सीमा के रास्ते भारत में घुसे और वहां से ट्रेन पकड़कर असम तक आ गए। पहले की पड़तालों में भी यह बात सामने आती रही है कि संदिग्ध घुसपैठिए मेघालय और त्रिपुरा के रास्तों का सहारा लेकर गुवाहाटी तक पहुंचते रहे हैं। इससे साफ है कि मामला किसी एक सीमा मार्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों से होकर गुजरने वाला एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
गुवाहाटी क्यों बन रहा है पसंदीदा ठिकाना
भौगोलिक स्थिति और आवागमन की सुविधा इस शहर को ऐसे नेटवर्कों के लिए बेहद अहम बना देती है। यहां बड़ा रेलवे स्टेशन है, अंतरराज्यीय बसों का संपर्क है, सस्ते लॉज मौजूद हैं और देश के दूसरे हिस्सों से जुड़ाव भी आसान है। यही वजह है कि एजेंसियां मान रही हैं कि संदिग्ध तौर पर अवैध रूप से दाखिल हुए लोग यहां कुछ समय रुकते हैं, स्थानीय स्तर पर शरण लेते हैं और फिर फर्जी पहचान पत्रों या दस्तावेजों के सहारे देश के दूसरे इलाकों की ओर बढ़ जाते हैं।
बिचौलियों और फर्जी दस्तावेज गिरोहों पर शक
ताजा मामले ने बिचौलियों और नकली दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन लोगों को सीमा पार कराने, गुवाहाटी तक लाने, लॉज में ठहराने और आगे की यात्रा का इंतजाम करने में किन-किन लोगों का हाथ रहा। एजेंसियां इस नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन, यात्रा के तरीके और इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की भी बारीकी से छानबीन कर रही हैं।
बड़े घुसपैठ रोधी अभियान का हिस्सा
सुरक्षा एजेंसियां, बॉर्डर ब्रांच और स्थानीय पुलिस इस मामले को एक व्यापक अवैध घुसपैठ रोधी अभियान के तौर पर देख रही हैं। उनका ध्यान सिर्फ पकड़े गए लोगों की पहचान और नागरिकता की पुष्टि पर नहीं है, बल्कि उन संगठित नेटवर्कों को तोड़ने पर भी है जो अवैध प्रवेश, फर्जी दस्तावेज और राज्यों के बीच आवाजाही को आसान बनाते हैं। गुवाहाटी से सामने आया यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सीमावर्ती राज्यों से आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों की निगरानी, दस्तावेज सत्यापन और ट्रांजिट ठिकानों पर नजर रखना अब एजेंसियों के लिए कितना जरूरी हो गया है।













