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ग्वालियर में विवेकानंद तिराहे के पास बस में आग, 25 यात्रियों ने कूदकर बचाई जानमध्य प्रदेश
6 सित॰ 2026, 7:27 am (7 दिन पहले)· 2

ग्वालियर में विवेकानंद तिराहे के पास बस में आग, 25 यात्रियों ने कूदकर बचाई जान

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से भोपाल जा रही एक बस विवेकानंद तिराहे के पास शनिवार रात अचानक आग की चपेट में आ गई, जिसमें सवार करीब 25 यात्रियों ने कूदकर अपनी जान बचाई और उनका सामान जलकर खाक हो गया।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से भोपाल के लिए निकली एक बस शनिवार रात अचानक आग की चपेट में आ गई, जिससे बस में सवार करीब 25 यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और उन्हें जान बचाने के लिए बस से कूदना पड़ा।

यह वाकया ग्वालियर के चेतक पुरी इलाके में विवेकानंद तिराहे के पास पेश आया, जहां से यह वीडियो कोच बस भोपाल के लिए रवाना हुई थी। बताया जा रहा है कि रास्ते में अचानक बस से धुआं और आग की लपटें उठने लगीं, जिसे देखकर बस में मौजूद हर यात्री दहशत में आ गया।

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आग की लपटों के बीच यात्रियों ने बचाई जान

बस में सवार करीब 25 यात्रियों के लिए वे कुछ पल बेहद डरावने थे। आग तेजी से फैलने लगी और यात्रियों के पास बाहर निकलने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। एक-एक कर सभी यात्री बस से नीचे कूद गए ताकि खुद को बचा सकें। राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी भी यात्री की जान नहीं गई और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ। हालांकि यात्रियों के पास मौजूद बैग, कपड़े और अन्य सामान आग की भेंट चढ़ गया और देखते ही देखते राख में तब्दील हो गया।

ड्राइवर और क्लीनर की भूमिका पर उठे सवाल

हादसे के बाद बस में सवार यात्रियों ने ड्राइवर और क्लीनर के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यात्रियों का कहना है कि सफर शुरू होने से पहले ही बस में कोई तकनीकी खराबी सामने आई थी, जिसे स्टाफ ने रवाना होने से पहले जैसे-तैसे ठीक किया था। उनका आरोप है कि जैसे ही बस से धुआं उठता दिखा, ड्राइवर और क्लीनर बिना किसी यात्री को आगाह किए खुद ही छलांग लगाकर बाहर निकल गए। इससे पीछे बैठे बाकी यात्रियों में और ज्यादा दहशत फैल गई, क्योंकि उन्हें समझ ही नहीं आया कि अचानक क्या हो रहा है। स्टाफ के इस तरह चुपचाप बस छोड़ देने से यात्रियों में गुस्सा भी साफ देखा गया।

राहगीरों और पुलिसकर्मियों ने संभाला मोर्चा

इस दौरान आस-पास से गुजर रहे राहगीरों, अन्य वाहन चालकों और उस समय ड्यूटी पर न रहे कुछ पुलिसकर्मियों ने फौरन मदद के लिए हाथ बढ़ाया। इन लोगों ने यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की और अपने स्तर पर आग बुझाने की शुरुआती कोशिशें भी कीं। कुछ ही देर बाद घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। दमकलकर्मियों को आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन तब तक बस लगभग पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।

सवाल-जवाब

यह घटना कब और कहां हुई?
शनिवार रात मध्य प्रदेश के ग्वालियर में चेतक पुरी इलाके के विवेकानंद तिराहे के पास हुई, जब ग्वालियर से भोपाल जा रही एक वीडियो कोच बस में आग लग गई।
बस में कितने यात्री सवार थे?
बस में करीब 25 यात्री सवार थे।
क्या इस हादसे में कोई हताहत हुआ?
नहीं, गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, हालांकि यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया।
यात्रियों ने ड्राइवर और क्लीनर पर क्या आरोप लगाए?
यात्रियों का आरोप है कि बस में पहले से तकनीकी खराबी थी और धुआं दिखते ही ड्राइवर व क्लीनर बिना किसी को बताए बस से कूद गए।
आग पर काबू कैसे पाया गया?
शुरुआत में आस-पास के लोगों, वाहन चालकों और ड्यूटी पर न रहे पुलिसकर्मियों ने मदद की, बाद में फायर ब्रिगेड की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
क्या बस पूरी तरह जल गई?
हां, फायर ब्रिगेड के आने तक बस लगभग पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

यह घटना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि व्यावसायिक वाहनों की सुरक्षा जांच और परिवहन विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यात्रियों के आरोप यदि सही हैं कि स्टाफ ने समस्या को नजरअंदाज कर यात्रा शुरू की, तो यह आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को इस बस के फिटनेस सर्टिफिकेट, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और परमिट की तुरंत गहन जांच करनी चाहिए। यदि वाहन ऑपरेटर और चालक-परिचालक की ओर से सुरक्षा नियमों का ऐसा खुला उल्लंघन साबित होता है, तो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस निरस्तीकरण की सख्त कार्रवाई अपेक्षित है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

यह हादसा अंतर-जिला मार्गों पर दौड़ने वाली स्लीपर और वीडियो कोच बसों में बढ़ती मनमानी को उजागर करता है। परिवहन विभाग की कागजी चेकिंग और फिटनेस निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं, जिसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ता है। यदि ऐसे मामलों में बस ऑपरेटरों और परमिट धारकों पर सख्त आर्थिक दंड के साथ आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं किए गए, तो इस तरह की लापरवाही थमती नहीं दिखेगी।

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