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हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास बड़ा बाजार में मिलता है पूजा के सामान से लेकर गहनों तक सब कुछउत्तराखंड
25 सित॰ 2026, 8:16 pm (42 दिन पहले)· 1

हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास बड़ा बाजार में मिलता है पूजा के सामान से लेकर गहनों तक सब कुछ

धर्मनगरी हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु हर की पौड़ी के पास स्थित ऐतिहासिक बाजारों से पूजा सामग्री, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और स्थानीय खान-पान की चीजें खरीदते हैं। ब्रिटिश काल से मशहूर इन बाजारों में थोक और फुटकर दामों पर हर जरूरत का सामान उपलब्ध रहता है।

उत्तराखंड की प्रसिद्ध धर्मनगरी हरिद्वार में पूरे साल देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। यहां पहुंचने वाले लोग गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाते हैं, धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराते हैं तथा अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और अस्थि विसर्जन जैसे कर्मकांड करते हैं। अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा को पूरा करने और इसे यादगार बनाने के बाद, पर्यटकों की निगाहें हर की पौड़ी के आसपास फैले बाजारों पर टिक जाती हैं।

ब्रिटिश काल से चला आ रहा खरीदारी का केंद्र

ब्रिटिश काल से अपनी विशिष्ट पहचान संजोए रखे ये बाजार आज भी देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और रोजमर्रा की आवश्यकताओं का सबसे विश्वसनीय केंद्र बने हुए हैं। हर की पौड़ी से महज दो मिनट की दूरी पर स्थित बड़ा बाजार अपनी विविधता के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इस क्षेत्र के स्थानीय व्यापारी अनिल कुमार अग्रवाल बताते हैं कि यहां आने वाले ग्राहकों के लिए हर प्रकार की दुकानें उपलब्ध हैं, जिनमें खान-पान की वस्तुएं, बच्चों के खेलने के खिलौने, भगवान का प्रसाद, पूजा के बर्तन, धार्मिक अनुष्ठान की सामग्री और आर्टिफिशियल ज्वेलरी मुख्य रूप से शामिल हैं।

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प्रसाद और खान-पान के मशहूर विकल्प

अनिल कुमार अग्रवाल के अनुसार, पर्यटक इन तमाम वस्तुओं को हरिद्वार यात्रा की एक खास निशानी और प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। इस व्यस्त बाजार में खरीदारी के साथ-साथ पर्यटकों को लजीज खान-पान का भी बेहतरीन अनुभव मिलता है। यहां मोहन जी पूरी वाले, प्रसिद्ध जैन चाट भंडार और प्रकाश लोक की लस्सी जैसी पुरानी और लोकप्रिय दुकानें ग्राहकों को आकर्षित करती हैं। व्यापारी यह भी बताते हैं कि उनकी अपनी दुकान पर पूजा-पाठ का सामान, बच्चों के खिलौने, असली रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य जरूरी वस्तुएं बेहद किफायती होलसेल दामों पर मिल जाती हैं।

विविधता और गुणवत्ता से भरपूर दुकानें

बाजार के एक अन्य व्यापारी गिरीश गुप्ता का कहना है कि उनकी दुकान पर पूजा के बर्तनों के अलावा तांबे-पीतल के लोटे, कलश, अष्टधातु से बनी आकर्षक मूर्तियां, महिलाओं के लिए चूड़ी, कंगन, रुद्राक्ष की माला और पवित्र तुलसी की मालाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उनके यहां से खरीदारी करने वाले ग्राहक हमेशा मिलने वाले सामान की गुणवत्ता और उसके उचित दामों की प्रशंसा करते हैं। बाजार में कंबल और अन्य सामान के विक्रेता अंकित अरोड़ा बताते हैं कि यहां हर प्रकार का सामान थोक यानी होलसेल और रिटेल दोनों ही माध्यमों से आसानी से मिल जाता है।

एक ही छत के नीचे मिलती है हर जरूरत की चीज

इस ऐतिहासिक बाजार में केवल पूजा-पाठ का सामान ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय नग, नगीने, विभिन्न प्रकार की मालाएं, अष्टधातु की मूर्तियां, प्रसाद और लजीज मिठाइयां भी प्रचुर मात्रा में मिलती हैं। यहां पहुंचने वाले ग्राहक सामान की बेहतरीन गुणवत्ता और किफायती दामों से पूरी तरह संतुष्ट होकर लौटते हैं। घर-गृहस्थी की छोटी-बड़ी जरूरतों से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों की हर छोटी-बड़ी सामग्री तक, सब कुछ एक ही जगह पर मिल जाने के कारण श्रद्धालुओं के लिए यह बाजार खरीदारी का प्रमुख गंतव्य बना हुआ है।

सवाल-जवाब

हर की पौड़ी से बड़ा बाजार की दूरी कितनी है?
बड़ा बाजार हर की पौड़ी से सिर्फ 2 मिनट की दूरी पर स्थित है।
इस बाजार में किस प्रकार का सामान मिलता है?
यहां पूजा के बर्तन, पूजा सामग्री, बच्चों के खिलौने, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और खाने-पीने का सामान मिलता है।
क्या यहां सामान थोक दाम पर मिलता है?
हां, इस बाजार में कई दुकानें पूजा का सामान और अन्य वस्तुएं होलसेल और रिटेल दोनों दामों पर बेचती हैं।
बाजार के कौन से खान-पान के स्थान प्रसिद्ध हैं?
यहां मोहन जी पूरी वाले, जैन चाट भंडार और प्रकाश लोक की लस्सी काफी प्रसिद्ध हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·41 दिन पहले

हरिद्वार में सिर्फ पढ़ाई और करियर की ही नहीं, बल्कि वहां के खान-पान और इस पुराने बाजार की रौनक की यादें भी ताजा हो गईं। जब भी उधर जाना होता है, मोहन जी की पूरी और लस्सी के बिना ट्रिप अधूरा रहता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 दिन पहले

हरिद्वार जाओ और बड़े बाज़ार से कुछ न खरीदो, ऐसा हो ही नहीं सकता। बचपन से लेकर अब तक वहाँ का मज़ा वही है, चाहे पूजा का सामान हो या फिर प्रकाश लोक की लस्सी। पुरानी यादें ताज़ा हो गईं।

Ravikash Gupta@ravikash·41 दिन पहले

अर्जुन भाई, प्रकाश लोक की लस्सी वाली बात ने एकदम से बचपन की यादें ताज़ा कर दीं, वहाँ जाना ही इसी के लिए होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·41 दिन पहले

हरिद्वार के इस बड़े बाजार में ब्रिटिश काल से दुकानें हैं, पर क्या यहां आज भी असली रुद्राक्ष की पहचान करने का कोई सरकारी या स्थानीय तरीका है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 दिन पहले

रोहन भाई, अनिल कुमार अग्रवाल जी की दुकान पर असली रुद्राक्ष की बात तो है, पर सरकारी पहचान का कोई जिक्र नहीं दिखा।

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