धार्मिक नगरी हरिद्वार में साल 2027 में आयोजित होने वाले विशाल अर्धकुंभ मेले की प्रशासनिक तैयारियां धरातल पर शुरू हो चुकी हैं। इस महाआयोजन में देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी करोड़ों श्रद्धालुओं के पवित्र गंगा स्नान के लिए जुटने की उम्मीद है। इतनी बड़ी तादाद में लोगों के आगमन से सुरक्षा व्यवस्था और व्यापक भीड़ प्रबंधन प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरते हैं। विशेषकर हर की पौड़ी जैसे अत्यंत संवेदनशील और धार्मिक दृष्टि से मुख्य क्षेत्र में यदि अचानक दबाव बढ़ता है या किसी कारणवश भगदड़ जैसी अनहोनी घटती है, तो जनहानि को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसी गंभीर पहलू को हल करने के लिए हर की पौड़ी के ठीक सामने स्थित हरिद्वार डैम के किनारे एक समर्पित ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण की रूपरेखा पर काम तेज कर दिया गया है।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभागों का साझा कदम
इस महत्वपूर्ण निकासी मार्ग का निर्माण उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग आपसी समन्वय के साथ कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने इस परियोजना के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह केंद्र सरकार की योजना का एक अभिन्न अंग है, जिस पर दोनों पड़ोसी राज्य मिलकर काम कर रहे हैं। हरिद्वार क्षेत्र में बहने वाली प्रमुख गंगा कैनाल तथा उससे जुड़े कई मुख्य ढांचे ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र में स्थित हैं। वहीं दूसरी ओर, समूचे मेले के संचालन, सुरक्षा निगरानी और श्रद्धालुओं के संपूर्ण प्रबंधन की वैधानिक जिम्मेदारी उत्तराखंड शासन और स्थानीय प्रशासन के पास रहती है। इसी दोहरे प्रशासनिक स्वरूप के कारण दोनों राज्य आपसी तालमेल बनाकर इस परियोजना को तेजी से धरातल पर उतार रहे हैं ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।
जल क्षेत्रों के बीच भगदड़ के खतरे को कम करने की कवायद
हर की पौड़ी पर विशेष स्नान पर्वों के दिन श्रद्धालुओं का जमघट अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है। ऐसे में सीमित स्थान पर अत्यधिक भीड़ एकत्र हो जाने से स्थिति को संभालना किसी भी सुरक्षा दल के लिए बेहद पेचीदा काम बन जाता है। यदि ऐसे हालात में जरा सी भी अफवाह या हलचल से भगदड़ की स्थिति बनती है, तो लोग बदहवासी में सुरक्षित रास्तों की तलाश में इधर-उधर भागने लगते हैं। चूंकि हर की पौड़ी के आसपास गहरा जल प्रवाह और कई जल क्षेत्र मौजूद हैं, इसलिए किसी भी अनियंत्रित भगदड़ की स्थिति में श्रद्धालुओं के जीवन पर सीधा खतरा उत्पन्न हो जाता है। इस जानलेवा जोखिम को खत्म करने के उद्देश्य से ही हरिद्वार डैम की परिधि में यह वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग विकसित किया जा रहा है। इसका प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात परिस्थिति में भीड़ को एक ही स्थान पर घुटने देने के बजाय तुरंत बाहर निकाल दिया जाए।
आस्था पथ से चंडी पुल होते हुए बैरागी कैंप तक कनेक्टिविटी
परियोजना के मार्ग प्रारूप के बारे में विवरण देते हुए अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने स्पष्ट किया कि डैम किनारे बनने वाला यह ग्रीन कॉरिडोर सीधे आस्था पथ से जुड़ेगा। वहां से यह मार्ग चंडी पुल तक पहुंचेगा और आगे बढ़ते हुए बैरागी कैंप के विशाल खुले मैदानी क्षेत्र में जाकर समाप्त होगा। हर की पौड़ी के मुख्य घाटों से निकाले गए लोगों को इस कॉरिडोर के जरिए सीधे चंडी पुल पार कराकर बैरागी कैंप भेजा जा सकेगा। बैरागी कैंप एक विस्तृत खुला इलाका होने के कारण वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बिखरने और सामान्य गति से आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सकेगी, जिससे मुख्य घाटों पर दबाव तुरंत घट जाएगा।
सालाना स्नान पर्वों और कांवड़ मेले में भी मिलेगा स्थायी लाभ
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह बुनियादी ढांचा केवल साल 2027 के अर्धकुंभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक दीर्घकालिक स्थायी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। हरिद्वार में हर साल आयोजित होने वाले विशाल कांवड़ मेले के अलावा सोमवती अमावस्या और मौनी अमावस्या जैसे प्रमुख स्नान तिथियों पर भी लाखों श्रद्धालुओं का तांता लगता है। ऐसे सभी बड़े धार्मिक अवसरों पर यह नया ग्रीन कॉरिडोर भीड़ के आवागमन को सुगम बनाए रखने और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने में सुरक्षा बलों का मुख्य सहारा साबित होगा।



















