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हिमाचल प्रदेश के झीड़ी में जारी रहेगा फ्लाईओवर का निर्माण, हाईकोर्ट ने रोक लगाने से किया साफ इनकारहिमाचल प्रदेश
16 सित॰ 2026, 11:21 am (6 दिन पहले)· 1

हिमाचल प्रदेश के झीड़ी में जारी रहेगा फ्लाईओवर का निर्माण, हाईकोर्ट ने रोक लगाने से किया साफ इनकार

मंडी जिले के झीड़ी में 33 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे फ्लाईओवर और अंडरपास के निर्माण कार्य पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने से मना कर दिया है। अदालत ने पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं ताकि काम में कोई बाधा न आए।

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के झीड़ी में कीतरपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे फ्लाईओवर और अंडरपास का रास्ता साफ हो गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस निर्माण कार्य पर रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया है, जिससे प्रोजेक्ट को बड़ी राहत मिली है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 33 करोड़ रुपये की लागत आ रही है, और अदालत के इस निर्णय के बाद निर्माण कार्य के जल्द गति पकड़ने की उम्मीद है।

हाईकोर्ट ने क्या दिए निर्देश

न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत में 10 सितंबर को इस मामले पर सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कार्यों पर रोक लगाना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। अदालत ने मंडी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे निर्माण स्थल पर पहुंचाई जा रही किसी भी प्रकार की बाधा को तुरंत दूर करें और वहां पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराएं। इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 अक्तूबर को तय की गई है। तब तक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, जिला प्रशासन और पुलिस को अपनी प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

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क्यों हो रहा है स्थानीय स्तर पर विरोध

इस फ्लाईओवर के निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी विरोध देखने को मिल रहा है। झीड़ी इलाके के कुछ लोग लगातार इस निर्माण का विरोध कर रहे हैं और उनका तर्क है कि इस संरचना के खड़ा होने से उनके स्थानीय व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण भूख हड़ताल जैसे कदम भी उठा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह है कि फ्लाईओवर की जगह पर एक रोटरी का निर्माण किया जाए। स्थानीय लोगों के विरोध के दबाव के चलते एनएचएआई द्वारा शुरू किया गया निर्माण कार्य बीच में ही बंद करवाना पड़ा था।

प्रशासन और अदालत का पक्ष

प्रशासन और परियोजना से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह फ्लाईओवर कम अंडरपास फोरलेन के केवल एक हिस्से पर ही तैयार किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से सुगम और सुरक्षित बनाना है। वर्तमान में इस तरह की उचित सुविधा न होने की वजह से राहगीरों और वाहन चालकों को फोरलेन पर आवाजाही करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण आए दिन हादसे भी पेश आ रहे हैं। इन्हीं सुरक्षा और यातायात संबंधी कारणों को ध्यान में रखते हुए यह मामला अदालत तक पहुंचा था। इससे पहले भी इस फ्लाईओवर के निर्माण को रोकने के लिए एक याचिका दायर की गई थी जिसे अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। ताजा आदेश के साथ ही अदालत ने एक बार फिर निर्माण कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने का फरमान सुनाया है।

सवाल-जवाब

झिड़ी में किस प्रोजेक्ट के तहत काम चल रहा है?
यहाँ कीतरपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण किया जा रहा है।
इस परियोजना पर कुल कितनी लागत आ रही है?
इस फ्लाईओवर कम अंडरपास के निर्माण पर लगभग 33 करोड़ रुपये की लागत आ रही है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या निर्देश दिए हैं?
अदालत ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने से इनकार करते हुए प्रशासन और पुलिस को सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए हैं।
स्थानीय लोग इस निर्माण का विरोध क्यों कर रहे हैं?
लोगों का तर्क है कि फ्लाईओवर बनने से उनके व्यापार पर विपरीत असर पड़ेगा और वे इसके बजाय रोटरी बनाने की मांग कर रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को निर्धारित की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·5 दिन पहले

किरातपुर-मनाली मार्ग पर निर्बाध आवाजाही केवल राष्ट्रीय राजमार्ग का विकास नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के पर्यटन उद्योग की रीढ़ है। पर्यटकों की सुरक्षा और यात्रा के समय में कमी के लिहाज से झीड़ी फ्लाईओवर का निर्माण अत्यंत आवश्यक है, खासकर पीक टूरिज्म सीजन में जब ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाएं बड़ी चुनौती बनती हैं। हालाँकि, स्थायी पर्यटन विकास के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों के आजीविका के हितों को संतुलित करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि विकास का लाभ पूरी घाटी के इकोसिस्टम को मिल सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और स्थानीय आजीविका के बीच का संतुलन हमेशा से शासन व्यवस्था के लिए एक जटिल चुनौती रहा है। हाईकोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि राष्ट्रीय महत्व की सार्वजनिक सुरक्षा परियोजनाओं को अनिश्चितकाल के लिए रोका नहीं जा सकता। हालांकि, पुलिस बल के सहयोग से निर्माण कार्य पूरा कराना एक तात्कालिक समाधान है, लेकिन प्रशासन के लिए वास्तविक चुनौती स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आर्थिक चिंताओं का व्यावहारिक समाधान खोजना होगा। विकास की गति बनाए रखने के साथ-साथ जनविश्वास जीतना ही प्रभावी लोक नीति की पहचान है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

अर्जुन की बात आगे बढ़ाते हुए बुनियादी ढांचे के वित्तीय और व्यावसायिक पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। कीरतपुर-मनाली फोरलेन कॉरिडोर पर 33 करोड़ रुपये की इस परियोजना में देरी न केवल लागत बढ़ाती है, बल्कि क्षेत्र की लॉजिस्टिक्स और पर्यटन अर्थव्यवस्था की गति को भी बाधित करती है। न्यायिक आदेश ने पूंजी के सही इस्तेमाल और राजमार्ग सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। हालांकि, स्थायी समाधान के लिए स्थानीय व्यापार को ढांचागत योजना का हिस्सा बनाना होगा। फ्लाईओवर के साथ सर्विस रोड या वेंडर ज़ोन विकसित कर स्थानीय व्यवसायों की सुरक्षा और राष्ट्रीय विकास के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

विकास परियोजनाओं और स्थानीय व्यापारिक हितों के बीच संतुलन का यह मामला राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की जटिलताओं को रेखांकित करता है। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप स्पष्ट संदेश देता है कि सार्वजनिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को विरोध के कारण रोका नहीं जा सकता। अब मंडी जिला प्रशासन और NHAI के लिए असली चुनौती 15 अक्टूबर की समयसीमा से पहले पुलिस सुरक्षा के बीच निर्माण की गति बनाए रखने और स्थानीय लोगों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

कानून-व्यवस्था और न्यायिक आदेश के क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट द्वारा पुलिस बल की तैनाती का निर्देश दिए जाने के बाद अब मंडी जिला पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह कानून का पालन सुनिश्चित कराए। बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और हादसों को रोकने के लिए फ्लाईओवर जरूरी है, लेकिन पुलिस के लिए असली परीक्षा यह होगी कि वह किसी भी संभावित टकराव या हिंसा की स्थिति को रोके और 15 अक्टूबर की स्टेटस रिपोर्ट से पहले निर्माण कार्य को बिना किसी अव्यवस्था के सुरक्षित ढंग से आगे बढ़ाए।

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