उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्थित सीमावर्ती निचलौल-झूलनीपुर मार्ग वर्तमान में भारी बदहाली का सामना कर रहा है। सड़क के दोनों किनारों पर उगी घनी झाड़ियों और खरपतवारों के व्यापक प्रसार ने इस प्रमुख रास्ते को अत्यधिक संकरा कर दिया है, जिससे यह एक पतली पगडंडी की तरह दिखाई देने लगा है। सड़क की चौड़ाई घट जाने से दैनिक आवागमन करने वाले वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों को आवाजाही में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
सीमावर्ती इलाकों के लिए बढ़ा खतरा
निचलौल और झूलनीपुर को जोड़ने वाला यह मार्ग आसपास के सीमावर्ती गांवों के लोगों के लिए परिवहन की मुख्य कड़ी है। इस रास्ते से रोजाना सैकड़ों वाहन और राहगीर गुजरते हैं। कई स्थानों पर झाड़ियों का फैलाव इतना अधिक है कि वे सड़क के मुख्य हिस्से तक पहुंच चुकी हैं। इस वजह से दो वाहनों को एक साथ गुजरने के लिए बेहद कम स्थान मिल पाता है। इसके अलावा, सड़क के किनारों पर बनी सफेद पट्टियां पूरी तरह से झाड़ियों के नीचे दब गई हैं। पट्टियों के छिप जाने से रात के समय चालकों को सड़क की वास्तविक सीमा का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे गाड़ियां नीचे उतरने का जोखिम बना रहता है।
मिनी बाबा धाम जाने वाले श्रद्धालु परेशान
धार्मिक दृष्टिकोण से भी इस मार्ग का विशेष महत्व है, क्योंकि यह प्रसिद्ध इटहिया पंचमुखी शिव मंदिर तक पहुंचने का प्राथमिक रास्ता है। इस पवित्र स्थान को क्षेत्र में मिनी बाबा धाम के नाम से भी जाना जाता है। सावन के महीने में निचलौल और निकटवर्ती क्षेत्रों से रोजाना हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक एवं दर्शन के लिए इसी मार्ग से होकर यात्रा करते हैं। सावन के दौरान वाहनों और पैदल यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। रास्ता संकरा होने के कारण आमने-सामने से आ रहे वाहनों के बीच पार निकलने की जगह नहीं बचती, जिसके चलते बार-बार यातायात ठप हो जाता है।
झाड़ियों की कटाई की उठी मांग
बढ़ती असुविधा और हादसों की आशंका को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने प्रशासनिक अधिकारियों से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। निवासियों का कहना है कि अगर प्रशासन ने शीघ्र ही झाड़ियों की कटाई और मार्ग की सफाई का कार्य शुरू नहीं किया, तो आने वाले दिनों में स्थिति अधिक विकट हो सकती है। लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द सफाई अभियान चलाकर सड़क को सुचारू और सुरक्षित बनाया जाए ताकि श्रद्धालुओं और आम यात्रियों को राहत मिल सके।



















