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झारखंड का पसंदीदा नाश्ता मसाला मुड़ी कैसे बनाएं, बोकारो की शेफ शालू से जानिए 5 मिनट की रेसिपीझारखंड
19 सित॰ 2026, 3:30 pm (6 दिन पहले)· 1

झारखंड का पसंदीदा नाश्ता मसाला मुड़ी कैसे बनाएं, बोकारो की शेफ शालू से जानिए 5 मिनट की रेसिपी

कम समय और सीमित रसोई सामग्री के साथ सुबह या शाम के लिए एक स्वादिष्ट नाश्ता तैयार किया जा सकता है। बोकारो के एक फूड कैफे की शेफ ने झारखंड शैली की मसाला मुड़ी बनाने की बेहद आसान विधि साझा की है।

हल्की भूख मिटाने के लिए अगर किसी ऐसे नाश्ते की तलाश है जो मिनटों में बनकर तैयार हो जाए, तो पारंपरिक मसाला मुड़ी एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आती है। झारखंड के अधिकांश परिवारों में इस व्यंजन को रोजमर्रा के नाश्ते के रूप में खूब चाव से खाया जाता है। इसे तैयार करने में न तो बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता होती है और न ही घंटों रसोई में खड़े रहना पड़ता है। बोकारो स्थित इंडियन-विदेशी फूड कैफे से जुड़ी शेफ शालू ने इस पारंपरिक डिश को केवल 5 मिनट में तैयार करने की विधि समझाई है।

नाश्ते के लिए जरूरी सामग्री

इस व्यंजन को बनाने के लिए घर की रसोई में आसानी से मिलने वाली चीजों की जरूरत पड़ती है। मुख्य घटक के रूप में मुड़ी ली जाती है। इसके साथ ही मूंगफली के दाने, बारीक कटा हुआ प्याज, बारीक कटा टमाटर, ताजा हरा धनिया पत्ता, करी पत्ता, साबुत जीरा और सरसों का तेल जुटाना होता है। पकवान का रंग और स्वाद निखारने के लिए हल्दी पाउडर का प्रयोग किया जाता है।

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तड़के और मसाले की तैयारी

व्यंजन बनाने की शुरुआत एक साफ कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म करने के साथ होती है। तेल गर्म होने पर जीरा और करी पत्ता डाला जाता है, जिससे धीमी आंच पर हल्की खुशबू आने तक भुना जाता है। इसके तुरंत बाद बारीक कटा प्याज और टमाटर कढ़ाई में मिलाया जाता है। इसी समय थोड़ी सी हल्दी डालकर पूरे मिश्रण को अच्छी तरह रोस्ट किया जाता है। जब प्याज और टमाटर हल्के नरम पड़ जाएं, तब इसमें मूंगफली के दाने मिलाए जाते हैं और लगभग 2 मिनट तक पकाया जाता है ताकि मूंगफली में कुरकुरापन आ जाए।

मुड़ी मिलाने की खास तकनीक और परोसने का तरीका

इस रेसिपी का सबसे महत्वपूर्ण चरण मुड़ी को शामिल करना है। मुड़ी को हल्के पानी में डुबोकर तुरंत बाहर निकाल लिया जाता है, जिससे वह नमी सोख ले लेकिन घुले नहीं। अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकलने के बाद, मुड़ी को कढ़ाई में तैयार भूने हुए मसाले के साथ डाला जाता है। इसे कढ़ाई में अच्छी तरह मिलाया जाता है ताकि सभी मसाले और सब्जियां मुड़ी पर समान रूप से लिपट जाएं। आखिर में ऊपर से ताजा बारीक कटा हरा धनिया पत्ता डालकर आंच बंद कर दी जाती है।

केवल 5 मिनट की मेहनत में यह स्वादिष्ट व्यंजन परोसने के लिए तैयार हो जाता है। सुबह की चाय के साथ या शाम के नाश्ते में इसे कभी भी खाया जा सकता है। स्वाद को और अधिक चटपटा बनाने के लिए इसमें ऊपर से सेव या भुनी हुई मिर्च जोड़ी जा सकती है। इसके अलावा कई लोग इसे आम के पारंपरिक अचार, तीखे मिर्च के अचार अथवा अतिरिक्त कटे प्याज के साथ खाना पसंद करते हैं।

सवाल-जवाब

मसाला मुड़ी तैयार करने में कितना समय लगता है?
इस रेसिपी के अनुसार पूरी मसाला मुड़ी मात्र 5 मिनट में बनकर तैयार हो जाती है।
यह रेसिपी किस शेफ द्वारा साझा की गई है?
यह विधि बोकारो के इंडियन-विदेशी फूड कैफे की शेफ शालू ने साझा की है।
इस डिश को बनाने के लिए मुख्य रूप से क्या सामग्री चाहिए?
इसके लिए मुड़ी, मूंगफली, प्याज, टमाटर, धनिया पत्ता, करी पत्ता, जीरा, हल्दी और सरसों तेल की जरूरत होती है।
मुड़ी को कढ़ाई में डालने से पहले क्या करना होता है?
मुड़ी को हल्के पानी में डालकर तुरंत बाहर निकाल लिया जाता है और उसका अतिरिक्त पानी सोखने दिया जाता है।
मसाला मुड़ी का स्वाद बढ़ाने के लिए क्या चीजें जोड़ी जा सकती हैं?
अतिरिक्त स्वाद के लिए इसमें सेव, मिर्च, आम का अचार या अतिरिक्त कटे प्याज शामिल किए जा सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·5 दिन पहले

यह पारंपरिक व्यंजन स्थानीय खानपान और त्वरित खाद्य संस्कृति के बीच बेहतरीन तालमेल को दर्शाता है। अमेरिका में भी व्यस्त दिनचर्या के बीच ऐसे क्षेत्रीय और झटपट बनने वाले व्यंजनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, जो कम लागत और न्यूनतम संसाधनों में स्वस्थ पोषण का विकल्प देते हैं। भविष्य में इस प्रकार के व्यंजनों का वैश्विक खाद्य बाज़ार में विस्तार होने की पूरी संभावना है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह पारंपरिक व्यंजन इस बात का उदाहरण है कि कैसे क्षेत्रीय खान-पान स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और कम लागत वाले घरेलू अवयवों पर निर्भर रहकर आर्थिक रूप से सुलभ स्नैकिंग विकल्प प्रदान करता है। बोकारो जैसे उभरते औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों में ऐसे स्थानीय व्यंजन स्ट्रीट फूड और कैफे संस्कृति के जरिए छोटे पैमाने के उद्यमों और अनौपचारिक आतिथ्य क्षेत्र को बढ़ावा दे रहे हैं, जो क्षेत्रीय सूक्ष्मअर्थव्यवस्था में अनूठा योगदान देता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह स्थानीय व्यंजन इस बात का उदाहरण है कि कैसे क्षेत्रीय खाद्य पद्धतियां न्यूनतम संसाधनों के साथ पोषण और आजीविका दोनों को समर्थन देती हैं। झारखंड के औद्योगिक और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय खाद्य संस्कृति का यह प्रसार सूक्ष्म उद्यमों को मजबूत करने के साथ-साथ घरेलू अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

एक क्राइम रिपोर्टर के तौर पर हमारा काम जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज से जुड़े हर उस पहलू पर नजर रखना होता है जो जनता के दैनिक जीवन और सांस्कृतिक ताने-बाने को प्रभावित करता है। इस तरह की जीवनशैली और खान-पान से जुड़ी खबरें स्थानीय संस्कृति को उजागर करती हैं और पाठकों को जोड़ती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

सहकर्मी करण मल्होत्रा के इस विचार को आगे बढ़ाते हुए, झारखंड की यह मसाला मुड़ी रेसिपी केवल एक खान-पान की शैली नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय खाद्य संस्कृति और घरेलू अर्थव्यवस्था का एक जीवंत उदाहरण है। उत्तर प्रदेश की तरह ही झारखंड में भी लघु और मध्यम खान-पान के व्यवसाय ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आजीविका का बड़ा साधन बन रहे हैं। बोकारो जैसे औद्योगिक और सांस्कृतिक रूप से विविधता वाले क्षेत्र में स्ट्रीट फूड और कैफे कल्चर का यह मेल स्थानीय खाद्य अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है और कम लागत में बेहतरीन स्वाद के उभरते विकल्पों को पाठकों के सामने लाता है।

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