उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा मर्डर केस में अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। न्यायालय ने मामले में गिरफ्तार मृतक की पुत्रवधू शालू के साथ विशाल गौतम और राजकिशोर की पुलिस कस्टडी रिमांड स्वीकार कर ली है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पुलिस बुधवार दोपहर 12 बजे तीनों को जेल परिसर से अपनी हिरासत में लेगी और अगले दिन गुरुवार दोपहर 12 बजे तक सघन पूछताछ का सिलसिला जारी रहेगा। इस 24 घंटे की अवधि में जांच अधिकारी हत्याकांड की साजिश रचने के तौर-तरीकों, मकान की नकली चाबी तैयार कराने, आरोपियों के बीच संपर्क साधने के माध्यमों और घटना से ऐन पहले की हर हलचल पर कड़े सवाल पूछेंगे।
रिमांड रोकने के लिए शालू ने लगाई थी अदालत में अर्जी
मंगलवार को जब शालू, विशाल गौतम और राजकिशोर को अदालत परिसर लाया गया, तब सुरक्षा के कड़े इंतजाम मौजूद थे। अदालत में पेशी के दौरान शालू ने चेहरे को मास्क तथा दुपट्टे की मदद से पूरी तरह ढंक रखा था। सह-आरोपी राजकिशोर भी मीडिया के कैमरों से बचने के लिए अपने हाथों से चेहरा छिपाने का प्रयास करता दिखाई दिया। वहीं घटना के संबंध में जब विशाल से तीखे सवाल पूछे गए, तो उसने सिर हिलाते हुए कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया।
शालू के अधिवक्ताओं ने 19 सितंबर को अदालत के समक्ष एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें पुलिस रिमांड की मांग पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई थी। शालू ने याचिका में दावा किया था कि पुलिस ने रिमांड हासिल करने के लिए जिस इकबालिया बयान का हवाला दिया है, उसने विवेचना अधिकारी को कभी वैसा कोई बयान नहीं दिया। इसके अतिरिक्त उसने किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त होकर अदालत के समक्ष कलमबंद बयान दर्ज कराने की अनुमति भी मांगी थी। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों और अर्जी को खारिज करते हुए पुलिस को तीनों आरोपियों की कस्टडी रिमांड सौंपने का फैसला सुनाया।
अपार्टमेंट की चाबी और परेड चौराहे की जांच पर फोकस
जांच अधिकारियों के अनुसार, जिस फ्लैट में वारदात हुई, उसकी चाबियों का आदान-प्रदान इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बनकर उभरा है। शालू द्वारा अदालत में पेश किए गए पत्र में यह बात दर्ज थी कि पुलिस उससे फ्लैट की चाबियां बरामद करने और परेड चौराहे पर उस खास जगह की निशानदेही कराना चाहती है, जहां विशाल को कथित तौर पर चाबी सौंपी गई थी।
पुलिस अब कस्टडी रिमांड के दौरान आरोपियों से यह सच उगलवाने का प्रयास करेगी कि उस फ्लैट की दूसरी चाबी किस बाजार या दुकान से बनवाई गई थी और उसे आगे किसके सुपुर्द किया गया। जांचकर्ता यह भी विस्तार से जानना चाहते हैं कि कत्ल की वारदात को अंजाम देने से पहले विशाल का परिवार के घर में किस तरह आना-जाना था और शालू के साथ उसके सीधे संवाद के क्या आधार थे।
विशाल गौतम से कत्ल की साजिश और संपर्कों पर पूछताछ
जांच टीम कस्टडी रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी विशाल गौतम से इस बात का जवाब तलाशेगी कि विनीत मिनोचा को ठिकाने लगाने की योजना किसके इशारे पर तैयार हुई थी और इस खौफनाक वारदात का खाका कब खींचा गया था। पड़ताल में यह तथ्य सामने आ चुका है कि हत्याकांड को अंजाम देने से ठीक पहले विशाल लगातार दवा कारोबारी के बेटे सुब्रत के संपर्क में बना हुआ था। पुलिस इन दोनों के बीच संपर्क की असल वजहों और वारदात से पूर्व विशाल की प्रत्येक गतिविधि पर गहराई से पूछताछ करेगी।
इसके साथ ही जांच अधिकारियों की नजर इस बात पर भी टिकी है कि वारदात के पहले विशाल और राजकिशोर के बीच मोबाइल पर क्या बातें हुई थीं और कत्ल के बाद शहर से सुरक्षित निकल भागने के लिए क्या योजना तय की गई थी। वारदात के तुरंत बाद विशाल ने किन-किन लोगों को कॉल किए, पुलिस उन सभी संपर्कों का डिजिटल ब्योरा जुटाने में लगी है।
309 कॉल और नया सिम कार्ड बना जांच का केंद्र
मामले की तफ्तीश आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने शालू, सुब्रत और विशाल के इस्तेमाल में रहे सात अलग-अलग मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले हैं। इन रिकॉर्ड्स से खुलासा हुआ कि 1 मई से लेकर 5 सितंबर के बीच विशाल और सुब्रत के बीच 309 मर्तबा बातचीत दर्ज हुई थी। इतना ही नहीं, कत्ल से महज दो दिन पहले विशाल ने रिलायंस जियो का एक नया सिम कार्ड खरीदा था और उसी नंबर से सुब्रत से बात की थी।
जांच दल ने सुब्रत से इस बात पर भी स्पष्टीकरण मांगा कि जब उसकी फर्म में 17 कर्मचारी पहले से काम कर रहे थे और घर के कामकाज के लिए घरेलू सहायिका समेत तीन सहायक मौजूद थे, तब उसे विशाल की इतनी बार-बार जरूरत क्यों पड़ती थी। इसके जवाब में सुब्रत ने पुलिस को सफाई दी थी कि विशाल बिजली के काम का अच्छा जानकार था, इसलिए वह रोजमर्रा के छोटे-मोटे कार्यों के सिलसिले में उसे बुलवा लिया करता था।
गुमटी में मौजूदगी और चाबी बनवाने के दौरान साथ दिखने की पड़ताल
अब तक सामने आई जानकारियों के मुताबिक, विनीत मिनोचा की हत्या से लगभग 20 दिन पहले सुब्रत, विशाल और शालू को एक साथ देखा गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसी समयावधि के दौरान चाबी बनवाने का घटनाक्रम भी प्रकाश में आया। जांच अधिकारियों ने सुब्रत से कड़ा सवाल किया कि उसने चाबी बनवाने के पीछे की मंशा और विशाल को उसकी आवश्यकता होने के संबंध में कोई जानकारी जुटाने का प्रयास क्यों नहीं किया।
इसके अलावा पुलिस ने सुब्रत से यह भी पूछा कि वह विशाल के साथ गुमटी इलाके में क्यों दिखा था और उसे चिकित्सक के पास क्यों लेकर गया था। सुब्रत ने पुलिस को बताया कि उस वक्त विशाल का स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था, जिसके चलते मानवीय आधार पर वह उसे डॉक्टर के पास ले गया था।
दुकान से निकाले जाने के बाद भी संपर्क जारी रहने का संशय
पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, विशाल ने लगभग 12 वर्षों की लंबी अवधि तक कारोबारी विनीत मिनोचा की दुकान और उनके घर में काम किया था। हत्या की घटना के बाद जब पुलिस ने सुब्रत को घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज दिखाए, तो उसने फुटेज में दिख रहे संदिग्धों की शिनाख्त करने से साफ मना कर दिया था।
पुलिस ने इस पर भी संदेह जताया है कि जब विनीत मिनोचा ने विशाल को अपनी सेवा से हटा दिया था, तो उसके बाद भी सुब्रत लगातार उसके साथ बातचीत क्यों करता रहा। सुब्रत ने इस पर वही दलील दोहराई कि वह सामान्य मरम्मत कार्यों के लिए ही उसे कॉल किया करता था।
क्लब में 49 हजार का बिल और मासिक आय का असंतुलन
वारदात वाली रात दंपति द्वारा आयोजित पार्टी भी पुलिस के जांच के घेरे में आ चुकी है। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, 5 सितंबर की रात सुब्रत और शालू तिलक नगर स्थित कॉस्मोजिन लाउंज में आयोजित एक कपल किटी पार्टी में शरीक होने गए थे। उस पार्टी में शहर के दवा व्यापार से जुड़े लगभग 35 लोग उपस्थित थे।
लाउंज के एंट्री रिकॉर्ड्स बताते हैं कि पार्टी का औपचारिक समय रात 11:30 बजे तय था, मगर दोनों रात करीब 10:30 बजे ही वहां पहुंच गए थे। इसके बाद देर रात तकरीबन 3:00 बजे दोनों वहां से रवाना हुए। पार्टी की बुकिंग लगभग 1400 रुपये प्रति प्लेट की दर से की गई थी, जिसका कुल बिल लगभग 49 हजार रुपये बना था। पुलिसिया पूछताछ में सुब्रत ने बताया था कि उसे 35 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था, जबकि शालू को निजी खर्च के लिए करीब 10 हजार रुपये दिए जाते थे। ऐसे में 45 हजार रुपये की कुल पारिवारिक मासिक आमदनी के सामने एक ही रात में 49 हजार रुपये खर्च करने के मामले ने पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया प्रोफाइल से सामग्री हटाने की छानबीन
जांच अधिकारियों ने यह भी पाया कि हत्या के चंद दिनों बाद सुब्रत ने अपने फेसबुक अकाउंट की प्रोफाइल पर अपनी व्यावसायिक फर्म ‘फार्मा ट्रेडर्स’ का वॉलपेपर अपडेट किया था। हालांकि, उस पोस्ट पर लोगों के लगातार सवाल और कमेंट्स आने लगे, जिसके बाद उसे एकाएक डिलीट कर दिया गया। इसके अलावा उसके फेसबुक और इंस्टाग्राम खातों से कई पुरानी तस्वीरें और रील्स हटाए जाने की बात भी सामने आई है, जिसकी तकनीकी जांच की जा रही है।
चाकू से कई वार कर की गई थी दवा कारोबारी की हत्या
विनीत मिनोचा रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट की पहली मंजिल स्थित फ्लैट नंबर सी-104 में अपने परिवार के साथ रहते थे। वह बिरहाना रोड पर ‘फार्मा ट्रेडर्स’ नाम से एक बड़ी दवा फर्म संचालित करते थे, जिसका सालाना कारोबार परिजनों के अनुसार करीब 50 से 60 करोड़ रुपये का था। 5 सितंबर की रात अज्ञात हमलावरों ने विनीत मिनोचा के गले और सीने पर चाकुओं से ताबड़तोड़ प्रहार कर उनकी जान ले ली थी।
हत्याकांड के 24 घंटे के भीतर 6 सितंबर की रात पुलिस ने दुकान पर पूर्व में काम करने वाले विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को हिरासत में ले लिया था। पुलिस का दावा है कि विशाल ने पूछताछ में बहू शालू की भूमिका का खुलासा किया, जिसके बाद शालू को भी हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया था।
पत्नी की वसीयत और संपत्ति विवाद का कोण
जांच के दौरान पुलिस को रजिस्ट्री दफ्तर से विनीत मिनोचा की पत्नी पुनीता मिनोचा द्वारा जून 2022 में तैयार कराई गई एक वसीयत भी मिली है। जांच एजेंसियां इस दस्तावेज का सूक्ष्म परीक्षण कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या करोड़ों की पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा या मालिकाना हक इस जघन्य हत्याकांड की मुख्य वजह बना। रिमांड के दौरान पुलिस इन सभी वित्तीय पहलुओं, कॉल रिकॉर्ड्स और साजिश के तारों को जोड़कर ठोस साक्ष्य तैयार करेगी।
वहीं दूसरी तरफ, शालू के भाई और बहन ने पूर्व में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर उसे पूरी तरह निर्दोष करार दिया था। परिजनों का कहना था कि शालू अपने ससुर की बीमारी और खान-पान का पूरा ध्यान रखती थी और वह ऐसी किसी साजिश में शामिल नहीं हो सकती।























