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झुमरी तिलैया के दिलीप कुमार ने बदली अपनी तकदीर, बेकरी व्यवसाय से कमा रहे हैं हर महीने लाखों रुपयेझारखंड
25 सित॰ 2026, 5:58 am (2 घंटे पहले)· 0

झुमरी तिलैया के दिलीप कुमार ने बदली अपनी तकदीर, बेकरी व्यवसाय से कमा रहे हैं हर महीने लाखों रुपये

कोडरमा के झुमरी तिलैया निवासी दिलीप कुमार ने कभी ड्राइवर की नौकरी की थी और आज सरकारी योजना की मदद से खुद की बेकरी इकाई चलाकर आत्मनिर्भर बन चुके हैं।

झारखंड के कोडरमा जिले के अंतर्गत आने वाले झुमरी तिलैया शहर के बिशुनपुर रोड के रहने वाले दिलीप कुमार की सफलता की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहते हैं। एक समय ऐसा था जब वह एक बेकरी फैक्ट्री में गाड़ी चलाने का काम करते थे और पूरे महीने की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें बमुश्किल 10 हजार रुपये मिलते थे। परिवार के भरण-पोषण और घर की तमाम जिम्मेदारियों को संभालते हुए उस छोटी सी आय में गुजारा करना उनके लिए बेहद संघर्षपूर्ण साबित हो रहा था। किसी के अधीन काम करने की बजाय उन्होंने खुद का स्वतंत्र व्यवसाय शुरू करने का पक्का मन बनाया और यहीं से उनके जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। उन्होंने सही दिशा में प्रयास करते हुए सरकारी योजनाओं की जानकारी जुटाई और आज वह उसी बेकरी क्षेत्र में अपनी खुद की इकाई के मालिक बनकर गर्व से जीवन जी रहे हैं।

पीएमएफएमई योजना से मिली बड़ी मदद

अपनी इस कारोबारी यात्रा के बारे में उन्होंने विशेष बातचीत में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी खुद की खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने का फैसला किया था। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के तहत ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी की। विभाग द्वारा उनकी बेकरी इकाई की एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की गई। उन्होंने बताया कि इस पूरे उद्योग को स्थापित करने में कुल लागत करीब 7 लाख रुपये आई थी। स्थानीय बैंक के जरिए उन्हें इसके लिए ऋण उपलब्ध कराया गया और इस केंद्रीय योजना के प्रावधानों के तहत उन्हें कुल लागत पर 35 प्रतिशत की भारी सब्सिडी का लाभ भी प्राप्त हुआ। अपनी इस बेकरी के सुचारू संचालन के लिए उन्हें आवश्यक मशीनरी बिहार के दरभंगा शहर के एक अधिकृत सप्लायर से प्राप्त हुई। वर्तमान में उनकी इस इकाई में इलेक्ट्रॉनिक भट्टी यानी ओवन, मिक्सिंग मशीन, ब्रेड काटने वाली मशीन, बेकिंग ट्रे और अन्य तमाम छोटे-बड़े उपकरण लगाए गए हैं। इन आधुनिक और उपयोगी मशीनों की सहायता से उनकी यूनिट में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट खाद्य उत्पादों का निर्माण किया जाता है।

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विभिन्न बेकरी उत्पादों का होता है निर्माण

उनकी इस बेकरी यूनिट में रोजाना कई प्रकार की चीजें तैयार की जाती हैं जिनमें मुख्य रूप से टोस्ट, ताज़ा ब्रेड, क्रीम केक, मीठी पापड़ी और अलग-अलग तरह के बिस्किट शामिल हैं। यहाँ बनने वाले इन सभी तैयार उत्पादों की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर की जाती है और कोडरमा जिले के विभिन्न बाजारों की खुदरा दुकानों तक इन्हें पहुँचाया जाता है। उन्होंने बताया कि उनकी बेकरी में हर रोज लगभग 60 से 70 किलोग्राम खाद्य सामग्री का उत्पादन होता है। इन उत्पादों की दैनिक बिक्री से उन्हें रोजाना करीब 5 से 6 हजार रुपये तक का कारोबार मिल जाता है। इस प्रकार उनकी इस बेकरी से हर महीने औसतन डेढ़ से दो लाख रुपये तक का कुल कारोबार आसानी से हो जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हुई है।

पारिवारिक सहयोग से चल रहा है पूरा काम

इस व्यवसाय की एक सबसे बड़ी और खास विशेषता यह है कि फिलहाल दिलीप कुमार ने बाहर से किसी पेशेवर कारीगर या मजदूर को वेतन पर काम पर नहीं रखा है। उनके पिता, सगे भाई और परिवार के अन्य नजदीकी सदस्य इस बेकरी के संचालन में उनका पूरा हाथ बंटाते हैं। घर के सभी लोग मिलकर विभिन्न प्रकार के खाद्य उत्पादों को तैयार करने की प्रक्रिया में सहयोग करते हैं। इसके अलावा, बनकर तैयार होने वाले सामान की मार्केटिंग करने और उसे समय पर विभिन्न दुकानों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी परिवार के सदस्य ही आपस में मिलकर पूरी निष्ठा के साथ संभालते हैं।

सवाल-जवाब

दिलीप कुमार पहले क्या काम करते थे?
वह पहले एक बेकरी फैक्ट्री में वाहन चालक के रूप में काम करते थे।
उन्हें नौकरी में हर महीने कितने रुपये मिलते थे?
महीने भर की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें 10 हजार रुपये मिलते थे।
उन्होंने अपनी बेकरी किस योजना के तहत शुरू की?
उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के तहत आवेदन किया था।
उनकी बेकरी इकाई की कुल लागत कितनी थी?
उनकी इकाई की कुल लागत करीब 7 लाख रुपये थी।
उन्हें योजना के तहत कितने प्रतिशत सब्सिडी मिली?
उन्हें इस योजना के तहत 35 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला।
बेकरी की मशीनें कहाँ से मंगाई गई थीं?
बेकरी संचालन के लिए आवश्यक मशीनें दरभंगा के एक सप्लायर से मिली थीं।
उनकी बेकरी में कौन-कौन से उत्पाद तैयार होते हैं?
उनकी बेकरी में टोस्ट, ब्रेड, क्रीम केक, मीठी पापड़ी और बिस्किट तैयार किए जाते हैं।
उनकी बेकरी से महीने में कितना कारोबार हो जाता है?
बेकरी से महीने में लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये का कारोबार हो जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·40 मिनट पहले

दिलीप जी ने अपनी मेहनत से ग्रह-नक्षत्रों की चाल को मात दे दी। सही समय पर सही कदम उठाया, तभी तो आज खुद के कारोबार के मालिक हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·59 मिनट पहले

झुमरी तिलैया जाना हुआ था, वहाँ की गलियों में छोटे उद्योगों का जो जोश देखा, उसने इस कहानी की याद दिला दी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·59 मिनट पहले

रविकेश जी, सही कहा आपने। पीएमएफएमई जैसी योजनाओं ने वाकई छोटे शहरों के हुनरमंद लोगों को अपनी राह खुद चुनने का मौका दिया है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

दस हजार की ड्राइवर की नौकरी छोड़कर खुद की बेकरी खोलना और महीने का डेढ़-दो लाख का टर्नओवर ले जाना वाकई बड़ी बात है। सरकारी योजना का सही इस्तेमाल हो तो तस्वीर सच में बदल सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। मैं पिछले साल कोडरमा गया था, तब ऐसे ही एक छोटे दुकानदार से मिला था जिसने लोन लेकर अपनी किस्मत बदल ली थी।

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