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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त, डॉलर मजबूतबाज़ार
25 सित॰ 2026, 7:13 am (5 मिनट पहले)· 0

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त, डॉलर मजबूत

फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में नई बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं और पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक गतिरोध के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे यूरो पर दबाव गहरा गया।

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तकनीकी विश्लेषण25 सितंबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

EUR/USD अभी 1.14 पर है, जबकि EMA20 1.15, EMA50 1.15 और EMA200 1.16 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 (1.15) के पास थम सकती है।

बोलिंजर बैंड्स20-period, 2 std-dev

यह क्या है

Bollinger Bands कीमत को उसके 20-दिनी औसत के दो स्टैंडर्ड डेविएशन के दायरे में घेरती हैं। ऊपरी बैंड अति-खिंचाव दिखाता है, निचला बिकवाली से थकान; बीच का बैंड रुझान का केंद्र है।

अभी यह कहाँ है

EUR/USD का बैंड दायरा 1.14–1.17 है।

आगे संभावित चाल

मध्य-बैंड (1.15) को फिर से पार करने पर गति ऊपर झुकती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूरो पर दबाव देखने को मिला। यूरोपीय साझा मुद्रा डॉलर के मुकाबले फिसलकर 1.1375 के इर्द-गिर्द आ गई। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं द्वारा सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए जाने और अमेरिका तथा ईरान के बीच वार्ता में किसी ठोस नतीजे तक न पहुंचने के चलते डॉलर सूचकांक को मजबूती मिली। दूसरी ओर, मुद्रा कारोबारी दिन में बाद में होने वाले फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों को लेकर भी सतर्क रुख बनाए हुए हैं।

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कई वर्षों का रिकॉर्ड उछाल

अमेरिकी ऋण बाजार में बॉन्ड प्रतिफल में आई तेज बढ़त ने डॉलर को जोरदार सहारा दिया है। 30 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड चढ़कर 5.501 प्रतिशत के उच्च स्तर तक पहुंच गई, जो जून 2004 के बाद से अब तक नहीं देखी गई थी। इसी प्रकार, 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.223 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जून 2007 के बाद का सबसे ऊपरी स्तर है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के उम्मीद से बेहतर बने रहने और फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं की आक्रामक टिप्पणियों ने ब्याज दरों में एक और वृद्धि की अटकलों को हवा दी है।

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शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय बाजार अब अक्टूबर की बैठक में फेड द्वारा मानक उधारी दर बढ़ाने की लगभग 67.5 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। यह आंकड़ा महज एक सप्ताह पहले 55.4 प्रतिशत और एक महीने पहले केवल 11 प्रतिशत था। इससे साफ जाहिर होता है कि निवेशकों के बीच दर वृद्धि की आशंकाएं बहुत कम समय में तेजी से बढ़ी हैं।

पश्चिम एशिया संकट और सुरक्षित निवेश का आकर्षण

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में अनिश्चितता तथा पश्चिम एशिया में जारी व्यापक टकराव ने भी विदेशी मुद्रा बाजार का मिजाज बदल दिया है। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका को यह तय करना होगा कि युद्ध समाप्त करना है या नहीं। इस तरह के कूटनीतिक गतिरोध और भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से निकलकर डॉलर जैसी सुरक्षित समझी जाने वाली संपत्तियों में पूंजी लगा रहे हैं। सुरक्षित निवेश की यह मांग ग्रीनबैक के लिए प्रेरक साबित हो रही है, जिससे प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़े यूरो-डॉलर के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

फेडरल रिजर्व की अधिकारी हैमैक ने कड़े नीतिगत संदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखना केंद्रीय बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि मजबूत उपभोक्ता मांग के कारण मुद्रास्फीति अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और जोखिम ऊपर की ओर झुके हुए हैं। हैमैक ने आगाह किया कि लंबे समय तक बनी रहने वाली ऊंची महंगाई को काबू में करना और भी कठिन हो जाता है। उनकी इस टिप्पणी ने साफ संकेत दिया कि फेड समय से पहले मौद्रिक नरमी अपनाने से बचेगा।

फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों की सख्ती को आंकने वाले भाषण ट्रैकर पर हैमैक का स्कोर 7.4/10 रहा, जो ऐतिहासिक औसत 7.6/10 से मामूली कम है। वहीं फेड सेंटिमेंट इंडेक्स 0.46 अंक फिसलकर 148.18 पर आ गया। यह गिरावट नीतिगत बयानों में मामूली नरमी दर्शाती है, लेकिन सूचकांक का 100 के तटस्थ स्तर से काफी ऊपर बने रहना यह पुष्टि करता है कि केंद्रीय बैंक का समग्र रुख अब भी अत्यधिक सख्त बना हुआ है।

तकनीकी स्तर और चार्ट की स्थिति

चार्ट के तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें तो यूरो-डॉलर को निचली सतह पर 1.1355 के निचले बोलिंजर बैंड पर तात्कालिक समर्थन मिल रहा है, जहां बिकवाली का दबाव कुछ थम सकता है। ऊपरी स्तरों पर, 100-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (एसएमए) 1.1532 पर पहला प्रतिरोध पेश कर रहा है, जिसके ठीक बाद 20-दिवसीय बोलिंजर मिडिल बैंड 1.1535 पर मौजूद है। वहीं 1.1715 के आसपास ऊपरी बोलिंजर बैंड एक मजबूत रुकावट के रूप में सामने आ रहा है, जो किसी भी सुधारात्मक उछाल को सीमित कर सकता है।

लाइव बाजार आंकड़ों के मुताबिक, सत्र समाप्ति के समय यूरो-डॉलर 1.14 के स्तर पर रहा, जो पिछले बंद स्तर 1.14 से 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 25 पर आ गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति का संकेत देता है। 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 1.15, 50-दिवसीय ईएमए 1.15 और 200-दिवसीय ईएमए 1.16 पर है। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने से डेथ क्रॉस बना हुआ है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति की पुष्टि करता है। औसत ट्रू रेंज (एटीआर) 0.01 दर्ज की गई है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाती है।

वैश्विक वित्तीय तंत्र में यूरो की केंद्रीय भूमिका

यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। अमेरिकी डॉलर के बाद यह विश्व में दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 में, सभी विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक दर्ज किया गया था। यूरो-डॉलर दुनिया का सबसे सक्रिय मुद्रा जोड़ा है, जिसकी वैश्विक विदेशी मुद्रा लेन-देन में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके बाद यूरो-जापानी येन 4 प्रतिशत, यूरो-ब्रिटिश पाउंड 3 प्रतिशत और यूरो-ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 2 प्रतिशत के साथ आते हैं।

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है, जो ब्याज दरें तय करने और मौद्रिक नीति के प्रबंधन का कार्य करता है। ईसीबी का मुख्य कार्य कीमतों की स्थिरता बनाए रखना है, जिसका आशय मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना या आर्थिक विकास को गति देना है। ब्याज दरों में बदलाव इसका प्राथमिक उपकरण है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या दर वृद्धि की उम्मीदें मजबूत होती हैं, तो आम तौर पर यूरो को मजबूती मिलती है क्योंकि वैश्विक निवेशक पूंजी लगाने के लिए आकर्षित होते हैं।

ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार मौद्रिक नीति संबंधी बैठकें आयोजित करती है। इन बैठकों में निर्णय यूरोज़ोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुखों और छह स्थायी सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं, जिनमें ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड शामिल हैं। यूरोज़ोन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (एचआईसीपी) के जरिए मापे जाने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़े ईसीबी के लिए बेहद अहम हैं। यदि मुद्रास्फीति ईसीबी के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो बैंक को कीमतें नियंत्रित करने के लिए दरें बढ़ाने को मजबूर होना पड़ता है।

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), विनिर्माण और सेवा पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण जैसी आर्थिक रिपोर्टें यूरोज़ोन की सेहत की स्थिति दर्शाती हैं। यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन पूरे क्षेत्र की 75 प्रतिशत अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके अलावा, व्यापार संतुलन भी मुद्रा के मूल्य को तय करने में अहम भूमिका निभाता है। यदि किसी देश का निर्यात मजबूत होता है और व्यापार अधिशेष सकारात्मक रहता है, तो विदेशी खरीदारों की मांग के कारण उसकी घरेलू मुद्रा स्वाभाविक रूप से मजबूत होती है।

अन्य मुद्राओं और परिसंपत्तियों की चाल

डॉलर की मजबूती का असर अन्य वैश्विक मुद्राओं पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (ऑड-यूएसडी) जोड़ी शुक्रवार के एशियाई सत्र में अगस्त की शुरुआत के बाद के अपने नए निचले स्तर पर फिसल गई और 0.7000 के करीब कमजोर नजर आई, क्योंकि यह रात भर में 200-दिवसीय एसएमए के नीचे टूट चुकी थी। अमेरिकी फेड की सख्ती और तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से जिंदा कर दिया है, जिससे बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की दर वृद्धि की उम्मीदों पर डॉलर की दो महीने की सबसे ऊंची छलांग भारी पड़ गई।

उधर, डॉलर-जापानी येन (यूएसडी-जेपीवाई) में शुक्रवार के सत्र के दौरान हल्की गिरावट दर्ज की गई और 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंची तेजी पर ठहराव आया, क्योंकि बाजार हस्तक्षेप की आशंकाओं के चलते येन में बिकवाली करने वाले कारोबारी सतर्क हो गए। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण डॉलर मजबूत बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया था, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम था और बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप था।

सोने की कीमतों पर भी मजबूत डॉलर का सीधा असर देखा गया। पीली धातु पिछले दिन के निचले स्तर से हुई हल्की रिकवरी को आगे बढ़ाने में नाकाम रही और शुक्रवार के एशियाई सत्र में 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करती दिखी। ऊर्जा संकट के कारण बढ़ी मुद्रास्फीति की चिंताएं और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बहु-वर्षीय तेजी गैर-उपज वाली सर्राफा संपत्ति के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न कर रही हैं।

सवाल-जवाब

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में यूरो किस स्तर पर फिसल गया?
शुक्रवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर लगभग 1.1375 के स्तर पर आ गया।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड किस रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची?
30-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड जून 2004 के बाद के उच्चतम स्तर 5.501 प्रतिशत पर और 10-वर्षीय यील्ड जून 2007 के बाद के उच्चतम स्तर 5.223 प्रतिशत पर पहुंची।
फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर बढ़ाने की कितनी संभावना जताई जा रही है?
शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बाजार अक्टूबर की बैठक में दर वृद्धि की लगभग 67.5 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहा है।
मध्य पूर्व तनाव का डॉलर पर क्या प्रभाव पड़ा है?
अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति न होने और युद्ध के खतरे से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी है, जिससे ग्रीनबैक को सहारा मिला है।
यूरो-डॉलर जोड़ी के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर क्या हैं?
निचले स्तर पर 1.1355 का बोलिंजर बैंड तात्कालिक समर्थन है, जबकि ऊपरी स्तर पर 1.1532 पर 100-दिवसीय एसएमए और 1.1715 पर ऊपरी बैंड प्रतिरोध पेश कर रहे हैं।
बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया था?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया।
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