आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 'परम प्रज्ञा' सुपरकंप्यूटर का करेंगे उद्घाटन12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देश भर में आयोजन, शशि थरूर ने रेखांकित किए रोजगार और महिला भागीदारी के आंकड़ेसंजय दत्त और नगमा पर फिल्माया 1992 का रोमांटिक गाना आखिर तुम्हें आना है आज भी क्यों माना जाता है खाससीरिया में शिकारियों के चंगुल से छूटा दुर्लभ पूर्वी शाही गरुड़ 'फेलिक्स', सर्बिया के जंगलों में वापस लौटासोने के गहने गिरवी रखकर कर्ज लेने की होड़, एनबीएफसी का गोल्ड लोन 69 फीसदी बढ़कर 3.42 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचानागपुर में नाबालिग के साथ बर्बरता के बाद सोशल मीडिया खातों के लिए अनिवार्य ई-केवाईसी की मांग तेजद लास्ट हाउस रिव्यू (2026): एक मकान में कैद परिवार की साइंस-फिक्शन कहानी में कितना है दमओडिशा के कटक में भीषण हादसा: स्कॉर्पियो ने इंडसइंड बैंक कर्मचारी सस्मिता को घसीटा, हालत नाजुकई20 पेट्रोल नीति पर राहुल गांधी ने उठाया सवाल, वाहनों को नुकसान का दावा करते हुए अभियान चलाने का किया ऐलानएली कैट्स रिव्यू (2026): नेटफ्लिक्स की एनिमेटेड सीरीज में रिकी जेरवाइस का जादू पड़ा फीका
जींद से सोनीपत तक सिर्फ ₹5 में सफर, 17 जुलाई से पटरियों पर उतरेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेनभारत
7 जुल॰ 2026, 12:47 am (32 दिन पहले)· 1

जींद से सोनीपत तक सिर्फ ₹5 में सफर, 17 जुलाई से पटरियों पर उतरेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

17 जुलाई को हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू होगी, जिसका किराया न्यूनतम ₹5 और अधिकतम ₹25 रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाएंगे।

भारतीय रेल एक नया इतिहास लिखने की तैयारी में है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन पटरियों पर उतरेगी और इसकी शुरुआत हरियाणा से होगी। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच दौड़ेगी और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। सबसे खास बात यह है कि यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है, जिससे इसका प्रदूषण स्तर लगभग शून्य रहेगा। इसे भारत के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन और मेक इन इंडिया अभियान की एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।

आम यात्री के लिए इसमें सबसे बड़ी राहत किराए को लेकर है। रेल ने इस सफर को बेहद सस्ता रखा है, यानी यात्रियों को कम से कम सिर्फ ₹5 और ज्यादा से ज्यादा ₹25 चुकाने होंगे। यह ट्रेन करीब 90 किलोमीटर की दूरी महज एक घंटे में तय कर लेगी। फिलहाल इसी रास्ते को डीएमयू ट्रेन से पूरा करने में करीब दो घंटे लग जाते हैं। यानी समय की सीधी बचत होगी। एक बार में इसमें करीब 2500 यात्री सफर कर सकेंगे।

ये भी पढ़ें

हाइड्रोजन से चलेगी, धुआं बिल्कुल नहीं छोड़ेगी

इस ट्रेन में 1200 किलोवाट का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। इसमें डीजल की कोई जरूरत नहीं होगी, बल्कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होगी और उसी से ट्रेन दौड़ेगी। इस पूरी प्रक्रिया में केवल भाप और गर्मी बाहर निकलती है, इसलिए न कोई धुआं निकलेगा और न ही कार्बन उत्सर्जन होगा। एक बार हाइड्रोजन भरने पर यह ट्रेन करीब 250 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है, जो इसे लंबे रूटों के लिए भी उपयोगी बनाता है।

सुरक्षा के इंतजाम पर पूरा ध्यान

नई तकनीक के साथ सुरक्षा को लेकर भी कोई ढील नहीं बरती गई है। ट्रेन में करीब 27 हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं। किसी भी खतरे से पहले चेतावनी देने के लिए हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्टर, फायर डिटेक्टर और आधुनिक कंट्रोल सिस्टम भी लगाया गया है, जिनकी समय समय पर जांच होती रहेगी। इस ट्रेन का डिजाइन लखनऊ स्थित आरडीएसओ ने तैयार किया है, जबकि इसे चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में बनाया गया है। यानी डिजाइन से लेकर निर्माण तक, यह पूरी तरह भारतीय इंजीनियरिंग की मिसाल है।

हरित परिवहन की ओर बड़ा कदम

करीब 89 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह ट्रेन भारतीय रेल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। अगर यह परियोजना उम्मीद के मुताबिक कामयाब रहती है, तो आने वाले दिनों में देश के दूसरे रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। इससे डीजल पर निर्भरता घटेगी, ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण को बचाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार होगा। कुल मिलाकर 17 जुलाई का दिन भारतीय रेल के इतिहास में एक स्वच्छ और नई शुरुआत के रूप में दर्ज होने जा रहा है।

सवाल-जवाब

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन कब शुरू होगी?
यह ट्रेन 17 जुलाई से शुरू होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाएंगे।
यह ट्रेन कहां से कहां तक चलेगी?
यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलेगी।
इस ट्रेन का किराया कितना होगा?
यात्रियों को न्यूनतम ₹5 और अधिकतम ₹25 का किराया देना होगा।
यह ट्रेन कितनी दूरी कितने समय में तय करेगी?
यह करीब 90 किलोमीटर का सफर सिर्फ एक घंटे में पूरा करेगी, जबकि अभी यही रास्ता डीएमयू ट्रेन से करीब दो घंटे में तय होता है।
यह ट्रेन कैसे चलती है और क्या यह प्रदूषण करती है?
यह 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम से चलती है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली बनती है और सिर्फ भाप व गर्मी निकलती है, इसलिए प्रदूषण लगभग शून्य होता है।
एक बार हाइड्रोजन भरने पर ट्रेन कितनी दूर चल सकती है?
एक बार हाइड्रोजन भरने पर यह ट्रेन करीब 250 किलोमीटर तक चल सकती है।
इस ट्रेन को किसने डिजाइन और तैयार किया है?
इसका डिजाइन लखनऊ स्थित आरडीएसओ ने बनाया है, जबकि निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में हुआ है।
इस ट्रेन को बनाने में कितना खर्च आया है?
यह ट्रेन करीब 89 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR