हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अपराध अन्वेषण विभाग के एक इंस्पेक्टर को पांच लाख रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों हिरासत में ले लिया है. आरोपी अधिकारी की पहचान सीआईडी में तैनात इंस्पेक्टर राजेश कुमार के रूप में की गई है. उस पर खनन सामग्री से लदे वाहनों को करनाल और यमुनानगर के रास्तों पर बेरोकटोक गुजरने देने के नाम पर मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप है.
वाहनों के हिसाब से मांगी जा रही थी बंधी
इस पूरे मामले की शुरुआत करनाल निवासी एक ट्रांसपोर्टर की शिकायत से हुई. शिकायतकर्ता के अनुसार, यमुनानगर और करनाल के बीच माइनिंग सामग्री ले जाने वाले ट्रकों को बिना किसी अड़चन के निकालने की एवज में इंस्पेक्टर ने शुरुआत में हर गाड़ी के लिए दस हजार रुपये प्रति माह की दर से रिश्वत की मांग रखी थी. दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत चलती रही और 19 सितंबर को आरोपी इंस्पेक्टर ने दरों में थोड़ी कमी करने पर सहमति जताई. अंततः करीब 70 गाड़ियों के काफिले के लिए लगभग सात हजार रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से पांच लाख रुपये का कुल मासिक सौदा तय हुआ.
उमरी चौक पर सतर्कता टीम ने बिछाया जाल
ट्रांसपोर्टर इस अवैध वसूली के आगे झुकने को तैयार नहीं था, इसलिए उसने तुरंत एंटी करप्शन ब्यूरो के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई. कुरुक्षेत्र एसीबी के प्रभारी इंस्पेक्टर हरजिंदर सिंह की अगुवाई में जांच दल ने सबसे पहले शिकायत में लगाए गए आरोपों की गुप्त तरीके से पुष्टि की. तथ्यों की पुष्टि होते ही टीम ने आरोपी को रंगे हाथों दबोचने के लिए एक ठोस योजना तैयार की.
मौके पर ही पकड़ा गया आरोपी
इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने पैसे की पहली किस्त लेने के लिए शिकायतकर्ता ट्रांसपोर्टर को करनाल से कुरुक्षेत्र बुलाया था. लेन-देन के लिए कुरुक्षेत्र का उमरी चौक तय किया गया. एसीबी की टीम तय समय से पहले ही उमरी चौक के आसपास सादे कपड़ों में तैनात हो चुकी थी. जैसे ही ट्रांसपोर्टर ने तय रकम के तौर पर पांच लाख रुपये इंस्पेक्टर के हाथ में थमाए, पहले से सतर्क एसीबी कर्मियों ने तुरंत घेराबंदी कर आरोपी को मौके पर ही धर दबोचा. ब्यूरो ने मौके से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली है और आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है.





















