ऋतु चक्र बदलते ही जब मौसम बरसात से ठंड की तरफ मुड़ता है, तब शरीर को मौसमी बीमारियों से बचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस दौर में सर्दी और खांसी की समस्या आम हो जाती है। झारखंड की राजधानी रांची के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर वीके पांडे ने इस बदलते मौसम में शरीर को महफूज रखने के लिए एक सीधा और बेहद असरदार घरेलू उपाय साझा किया है। उनके अनुसार, हर दिन शाम के समय थोड़ा सा गर्म पानी तैयार करना चाहिए। पानी इतना गर्म हो जिसे त्वचा बर्दाश्त कर सके, फिर उसमें एक चम्मच नमक मिलाना है। इस तैयार नमकीन घोल में पैरों को कम से कम 5 मिनट तक डुबोकर रखना काफी फायदेमंद साबित होता है।
थकान मिटाने के साथ अच्छी नींद लाने में मददगार
इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद पैरों को पानी से बाहर निकालकर किसी साफ कपड़े से अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए। इसके बाद पैरों पर थोड़ा सरसों का तेल लगाकर हल्की मालिश करें, कपड़ा लपेटें और फिर सोने जाएं। डॉक्टर वीके पांडे के मुताबिक, नियमित रूप से इस विधि को अपनाने से इस बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम की परेशानी से काफी हद तक सुरक्षा मिल जाती है। इसके अलावा दिनभर की भागदौड़ से पैरों और बदन में जमा होने वाली भारी थकान भी पूरी तरह मिट जाती है।
एंटीबैक्टीरियल असर और पारंपरिक जड़ों का महत्व
गर्म पानी में जब नमक घुलता है, तो यह मिश्रण एक एंटीबैक्टीरियल एजेंट की तरह काम करने लगता है। यह त्वचा की गहराई में जमी सारी धूल-गंदगी को तुरंत साफ कर देता है और पूरे शरीर को रिलैक्स कर अंदर तक गर्माहट पहुंचाता है। जब शरीर पूरी तरह तनावमुक्त और गर्म हो जाता है, तो रात में बेहद सुकून भरी और गहरी नींद आती है। डॉक्टर वीके पांडे रेखांकित करते हैं कि यह कोई नया तरीका नहीं, बल्कि गांवों और देहात का बेहद प्राचीन पारंपरिक नुस्खा है। पहले के समय में ग्रामीण बाहर से घर लौटने पर पैरों को इसी तरह गर्म नमकीन पानी में डालते थे, जिससे बाहर की अशुद्धियां साफ हो जाती थीं, पैरों के जरिए संक्रमण या बीमारी फैलने का खतरा खत्म हो जाता था और सर्दी-खांसी से राहत मिलती थी।
किन लोगों को बरतनी चाहिए खास सावधानी
इस नुस्खे का इस्तेमाल करते समय कुछ बुनियादी बातों की सावधानी रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टर वीके पांडे विशेष रूप से सचेत करते हैं कि यदि कोई व्यक्ति डायबिटीज का मरीज है, तो उसे यह उपाय बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही अगर पैरों में पहले से कोई जख्म, चोट या घाव मौजूद है, तब भी पैरों को इस घोल में न डालें। पानी गर्म करते समय तापमान की जांच अवश्य कर लें ताकि पानी इतना ज्यादा खौलता हुआ न हो कि पैर जल जाएं। इन दो महत्वपूर्ण नियमों का पालन करके इस घरेलू तरीके से सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।



















