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भारत में तैयार होगी 350 की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन, दिल्ली से पटना का सफर महज तीन घंटेभारत
20 सित॰ 2026, 11:19 am (32 मिनट पहले)· 1

भारत में तैयार होगी 350 की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन, दिल्ली से पटना का सफर महज तीन घंटे

रेलवे मंत्रालय ने देश में ही 350 किमी प्रति घंटे की डिजाइन रफ्तार वाली अत्याधुनिक B35 ट्रेन तैयार करने का खाका खींचा है। इस घरेलू तकनीक से दिल्ली से पटना और मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय बेहद घट जाएगा।

देश के रेलवे नेटवर्क को रफ्तार के एक नए युग में ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारत अब केवल आयातित तकनीक के सहारे रहने के बजाय घरेलू स्तर पर ही 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनें विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इन सुपरफास्ट ट्रेनों के पटरी पर उतरने के बाद अंतरराज्यीय यात्रा के समय में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। योजना के धरातल पर उतरने के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से पटना तक का लंबा सफर तीन घंटे से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। इसी तरह अहमदाबाद और मुंबई के बीच की दूरी तय करने में डेढ़ घंटे से भी कम वक्त लगेगा। भविष्य के नेटवर्क विस्तार में दिल्ली-वाराणसी और पटना से होते हुए दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख रेल मार्गों पर भी ऐसे ही हाई-स्पीड ट्रैक बिछाने की योजनाएं शामिल हैं।

स्वदेशी B35 मॉडल और जापान के साथ तालमेल

रेलवे मंत्रालय ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़े संशोधित वित्तीय प्रस्ताव में घरेलू सुपरफास्ट ट्रेन परियोजना की पूरी रूपरेखा पेश की है। देश में तैयार होने वाले इस नए ट्रेन मॉडल को B35 नाम दिया गया है, जिसे 2030 तक पटरी पर लाने की तैयारी है। इसकी क्षमता और डिजाइन स्पीड जापानी रेलवे की अगली पीढ़ी वाली E10 सीरीज के बराबर रखी जाएगी। दरअसल, जापानी पक्ष ने दिसंबर 2024 में स्पष्ट किया था कि वह अपनी पुरानी E5 सीरीज का उत्पादन समाप्त कर रहा है और नई E10 सीरीज का निर्माण कार्य 2030 में शुरू करेगा, जिनका परिचालन 2034 के आसपास संभव हो सकेगा। इस समयावधि को देखते हुए भारत ने जापानी निर्भरता के समानांतर अपनी खुद की उच्च गति वाली तकनीक खड़ी करने का फैसला लिया। हालांकि, बाद के वर्षों में जब जापान की E10 ट्रेनें उपलब्ध होंगी, तब उन्हें भी कॉरिडोर पर संचालित करने के विकल्पों पर विचार खुला रखा जाएगा।

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बीईएमएल को मिला शुरुआती निर्माण का जिम्मा

पूरी तरह 350 की रफ्तार वाली B35 परियोजना से पहले भारत ने मध्यम स्तर की B28 हाई-स्पीड ट्रेनों का निर्माण आरंभ कर दिया है। इन ट्रेनों की डिजाइन क्षमता 280 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जबकि मुंबई-अहमदाबाद मार्ग पर इन्हें अधिकतम 250 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ाया जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीईएमएल को कुल 32 ऐसी B28 ट्रेनों के निर्माण का कार्य सौंपा गया है। निर्माण कार्यक्रम के तहत पहली दो प्रोटोटाइप ट्रेनें वर्ष 2027 की पहली तिमाही में व्यापक परीक्षण के लिए तैयार होने की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा कंपनी ने बीएसई को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि उसे 15 अतिरिक्त B28 ट्रेनों के उत्पादन के लिए 5,400 करोड़ रुपये का एक अलग अनुबंध भी हासिल हुआ है। पश्चिमी गलियारे के पहले सेक्शन पर 2027 के दौरान ही ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वदेशी सिग्नलिंग और नियंत्रण ढांचा

ट्रेनों की बेतहाशा गति को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए एक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी तैयार की जा रही है। इसके तहत भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जो चीन के सीटीसीएस नेटवर्क की कार्यप्रणाली के अनुरूप काम करेगा। यह तकनीकी कवच ट्रेनों के बीच सुरक्षित फासला बनाए रखने, रफ्तार की वास्तविक निगरानी करने और किसी भी आपात स्थिति में मानवीय चूक को रोकने का दायित्व निभाएगा। सुरक्षा और सिग्नलिंग के क्षेत्र में यह कदम भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।

बजट में दोगुना इजाफा और रूट का अंतिम लक्ष्य

मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबे इस पूरे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरी तरह क्रियान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे के विकास, सिग्नलिंग और जमीन अधिग्रहण के खर्च में आई भारी वृद्धि के कारण कैबिनेट ने परियोजना की लागत को संशोधित कर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक करने की हरी झंडी दी है। वर्ष 2015 में इस मार्ग के लिए करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये का शुरुआती आकलन किया गया था, जिसके मुकाबले अब प्रति किलोमीटर निर्माण लागत लगभग 399 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। व्यय में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण जमीन अधिग्रहण पर आने वाले खर्च का तीन गुना से अधिक बढ़कर लगभग 19,700 करोड़ रुपये हो जाना है। इसके साथ ही सिविल निर्माण कार्यों की लागत 50 प्रतिशत उछलकर 1 लाख करोड़ रुपये पार कर गई है, जबकि रोलिंग स्टॉक और सिग्नल तंत्र के खर्च में भी शत-प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सवाल-जवाब

स्वदेशी B35 बुलेट ट्रेन की अधिकतम डिजाइन स्पीड क्या होगी?
B35 बुलेट ट्रेन को 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसे 2030 तक विकसित करने का लक्ष्य है।
दिल्ली से पटना की यात्रा में कितना समय लगने का अनुमान है?
इस हाई-स्पीड रेल परियोजना के अमल में आने के बाद दिल्ली से पटना का सफर तीन घंटे से भी कम समय में तय किया जा सकेगा।
B28 ट्रेन के निर्माण का ठेका किस कंपनी को मिला है?
बीईएमएल को 32 B28 ट्रेनों के निर्माण का कार्य सौंपा गया है, साथ ही कंपनी को 15 अतिरिक्त ट्रेनों के लिए 5,400 करोड़ रुपये का अलग अनुबंध मिला है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की संशोधित लागत कितनी तय की गई है?
केंद्रीय कैबिनेट ने इस 508 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट की संशोधित लागत को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक करने की मंजूरी दी है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन मार्ग कब तक पूरा करने का लक्ष्य है?
इस पूरे कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि एक सेक्शन पर 2027 में संचालन शुरू होने की उम्मीद है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·5 मिनट पहले

स्वदेशी तकनीक (B35 और B28 मॉडल) के ज़रिये बुलेट ट्रेन परियोजना को आगे बढ़ाना केवल विदेशी निर्भरता कम करने का प्रयास नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के लिए बुनियादी ढाँचे का बड़ा मोड़ है। दिल्ली-वाराणसी और दिल्ली-हावड़ा जैसे गलियारों पर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से पूर्वांचल और बिहार में क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को अभूतपूर्व गति मिलेगी। जापान की E10 सीरीज़ की प्रतीक्षा करने के बजाय बीईएमएल के माध्यम से घरेलू निर्माण का यह व्यावहारिक खाका भारत की सार्वजनिक नीति और आत्मनिर्भर विनिर्माण के तालमेल को स्पष्ट दर्शाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

रोहन जी की बात से आगे बढ़ते हुए, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से 350 किमी/घंटा की गति वाले हाई-स्पीड गलियारों का निर्माण बेहद संवेदनशील पहलू प्रस्तुत करता है। दिल्ली-पटना और हावड़ा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस तरह के नेटवर्क की सुरक्षा के लिए मजबूत पेरिमीटर फेंसिंग, ट्रैक पर तोड़फोड़ या घुसपैठ रोकने हेतु एआई-आधारित वास्तविक समय निगरानी और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी ढांचे की आवश्यकता होगी। इतनी उच्च गति वाली ट्रेनों में स्वचालित सिग्नलिंग की साइबर सुरक्षा और जीआरपी व आरपीएफ के बीच समन्वय सुनिश्चित करना आपराधिक जोखिमों को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए अनिवार्य होगा।

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