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कानपुर में अनोखा प्रदर्शन, जलभराव के गंदे पानी में लेट गए वार्ड-105 के पार्षद मेराजउत्तर प्रदेश
5 सित॰ 2026, 9:10 am (8 दिन पहले)· 2

कानपुर में अनोखा प्रदर्शन, जलभराव के गंदे पानी में लेट गए वार्ड-105 के पार्षद मेराज

कानपुर के एक पार्क में जलभराव और बदहाली से परेशान वार्ड-105 के पार्षद मेराज ने अनूठा विरोध जताते हुए गंदे पानी में लेटकर अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाबूपुरवा इलाके में स्थित भीकम सिंह पार्क में जलभराव और गंदगी के खिलाफ वार्ड-105 के पार्षद मेराज ने विरोध जताने का एक अलग ही रास्ता चुना। वह खुद पार्क में भरे गंदे पानी के बीच लेट गए और अधिकारियों के मौके पर आने की मांग करने लगे। उनका कहना था कि जब तक इस गंभीर समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, वह वहां से नहीं हिलेंगे।

अधिकारियों की अनदेखी से नाराज

जोन-3 के अंतर्गत आने वाले इस वार्ड के जनप्रतिनिधि मेराज ने बताया कि पार्क की बदतर स्थिति को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। अधिकारियों को पत्र सौंपने के बावजूद धरातल पर कोई सुधार देखने को नहीं मिला। बार-बार गुहार लगाने पर भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब उन्होंने यह कड़ा कदम उठाया। गंदे पानी में लेटकर उन्होंने साफ संदेश दिया कि अब कोरे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा और जिम्मेदार विभागों को तुरंत एक्शन लेना होगा।

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टूटे झूले और खराब स्ट्रीट लाइट बनी मुसीबत

पार्षद के अनुसार इस पार्क में केवल जलभराव ही अकेली परेशानी नहीं है। पिछले करीब एक साल से पार्क के झूले पूरी तरह टूटे पड़े हैं और वहां लगाई गई स्ट्रीट लाइट भी खराब पड़ी हैं। अंधेरा रहने और झूले टूटे होने के कारण स्थानीय बच्चों और बुजुर्गों के लिए पार्क में आना दूभर हो गया है। लगातार शिकायतों के बाद भी इन बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त न किए जाने के कारण क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश पनप रहा है।

जनता के समर्थन में जुटी भीड़ और चेतावनी

पार्षद को गंदे पानी में लेटा देख मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं है, बल्कि आम जनता की रोजमर्रा की परेशानियों को दूर करने के लिए है। पार्षद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जलभराव, गंदगी, टूटे हुए झूलों और बंद स्ट्रीट लाइटों की समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता के हक के लिए उनकी यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक अधिकारी मौके पर आकर राहत नहीं दिलाते। भीकम सिंह पार्क की इन तस्वीरों के सामने आने के बाद अब देखना यह होगा कि सुस्त पड़ी सरकारी मशीनरी इस पर क्या कदम उठाती है।

सवाल-जवाब

कानपुर में गंदे पानी में लेटकर किसने विरोध प्रदर्शन किया?
बाबूपुरवा के वार्ड-105 के पार्षद मेराज ने गंदे पानी में लेटकर विरोध प्रदर्शन किया।
यह विरोध प्रदर्शन कानपुर के किस स्थान पर हुआ?
यह प्रदर्शन कानपुर के बाबूपुरवा इलाके में स्थित भीकम सिंह पार्क में हुआ।
पार्षद मेराज मुख्य रूप से किस समस्या से नाराज थे?
पार्षद पार्क में लंबे समय से चल रहे जलभराव, गंदगी, टूटे झूलों और खराब स्ट्रीट लाइटों से नाराज थे।
अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन का कारण क्या था?
कई बार लिखित शिकायतें और पत्र देने के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के कारण यह कदम उठाया गया।
पार्क की अन्य कौन सी समस्याएं उठाई गईं?
पार्क में करीब एक साल से झूले टूटे पड़े हैं और स्ट्रीट लाइटें भी खराब हालत में हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

कानपुर के बाबूपुरवा क्षेत्र में पार्षद मेराज का यह विरोध प्रशासनिक उदासीनता का जीवंत उदाहरण है। यह घटना दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों में जनसमस्याओं के निस्तारण के लिए लिखित शिकायतों से अब काम नहीं चल रहा है, बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी दबाव बनाने के ऐसे प्रतीकात्मक तरीकों का सहारा लेना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यदि जोन-3 के अधिकारी इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं करते हैं, तो यह क्षेत्रीय आक्रोश बड़े राजनीतिक और नागरिक आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे नगर निगम की कार्यशैली पर और सवाल उठेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

यह घटना महज एक विरोध नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के बीच संवादहीनता की पराकाष्ठा है। जब एक जनप्रतिनिधि को जलभराव और टूटी बुनियादी सुविधाओं के खिलाफ ऐसा कदम उठाना पड़े, तो यह कानून-व्यवस्था और नगर निगम की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि समय रहते सुस्त पड़ी मशीनरी ने सख्त सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो यह असंतोष उग्र जन-आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।

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