स्टाइपेंड बढ़ोतरी की मांग पर अड़े भोपाल के डॉक्टरों की हड़ताल से ओपीडी ठप, आपातकालीन सेवाएं चालूबिना अकाउंट और ऐप के भी हो सकेगी वॉट्सऐप कॉल, मेटा ला रहा नया गेस्ट कॉल्स फीचरझारखंड में शिक्षा मंत्री सुदिव्य सोनू के जाने से हड़कंप, जानिए बिहार से यूपी तक फैले सियासी अंधविश्वासों के किस्सेदिवाली तक 10 किलो वजन घटाने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट साक्षा लालवानी की 60-डे डाइट स्ट्रेटेजीवैश्विक तनाव और आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बीच 18वें ब्रिक्स सम्मेलन से भारत रचेगा नई कूटनीतिक मिसालसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर योगी आदित्यनाथ का दबदबा, फॉलोअर्स की संख्या में तमिलनाडु के सीएम को पछाड़ाक्रिप्टो बाजार का हाल: बिटकॉइन ले रहा है सांस, एथेरियम और रिपल में तेजी बरकरारमूलांक 2 अंकज्योतिष राशिफल 9 सितंबर 2026: रिश्ते, करियर और आर्थिक स्थिति का पूरा भविष्यफलमूलांक 3 अंकशास्त्र राशिफल 9 सितंबर 2026: नए अवसरों और संपर्कों से मिलेगा लाभतेल की कीमतों में उछाल के बावजूद सोना और चांदी स्थिर, क्रूड ऑयल 100 डॉलर के करीब
कानपुर के सचेंडी में उफनती नदी पार करने की कोशिश पड़ी भारी, कार पानी में बहने से दो युवकों की मौतउत्तर प्रदेश
9 सित॰ 2026, 7:51 am (2 घंटे पहले)· 2

कानपुर के सचेंडी में उफनती नदी पार करने की कोशिश पड़ी भारी, कार पानी में बहने से दो युवकों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पांडु नदी के उफनते पानी में टाटा पंच कार बह जाने से दो दोस्तों की डूबकर मौत हो गई। करीब 24 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पुलिस और गोताखोरों की टीम ने कार से 200 मीटर दूर दोनों के शव बरामद किए।

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में आने वाले सचेंडी थाना क्षेत्र के पास पांडु नदी के जलस्तर में हुई भारी बढ़ोतरी के बीच एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। सोमवार रात करीब 8 बजे से 9 बजे के बीच बचऊपुर गांव के पास बाढ़ के पानी से पूरी तरह डूबी सड़क को पार करने का प्रयास कर रही एक टाटा पंच कार नदी के तेज बहाव में बह गई। कार में सवार दो दोस्त पानी की प्रचंड धार में फंस गए और कार समेत जलधारा में समा गए। इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और गोताखोरों की टीम ने मिलकर लगभग 24 घंटे तक बड़ा खोज अभियान चलाया। 8 सितंबर को चलाए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कार से करीब 200 मीटर की दूरी पर दोनों युवकों के शव जलमग्न नहर से बरामद कर लिए गए। क्रेन की सहायता से डूबी हुई कार को भी पानी से बाहर निकाला गया। इस हादसे में जान गंवाने वाले युवकों की पहचान सुरार गांव के रहने वाले 30 वर्षीय दीपक पाण्डेय और रूरा के ठठिया निवासी 28 वर्षीय अंकित कमल के रूप में की गई है।

जलभराव वाले रास्ते पर हादसे की पूरी कहानी

कानपुर के सचेंडी क्षेत्र में पांडु नदी का जलस्तर बीते दिनों से लगातार बढ़ रहा था, जिससे नदी का पानी आसपास के ग्रामीण रास्तों और सड़कों पर फैल चुका था। सोमवार की रात लगभग 8 से 9 बजे के समय दीपक पाण्डेय और अंकित कमल टाटा पंच कार से सवार होकर बचऊपुर गांव से भौतीखेड़ा मार्ग की ओर जा रहे थे। रास्ते में पांडु नदी की बाढ़ का पानी सड़क पर काफी ऊंचाई तक जमा था और बहाव अत्यंत तेज था। सामने पानी भरा होने के बावजूद दोनों युवकों ने अपनी कार को उस जलमग्न सड़क से आगे निकालने की कोशिश की। जैसे ही कार पानी के बीच पहुंची, नदी के तेज बहाव ने वाहन का संतुलन बिगाड़ दिया और देखते ही देखते कार सड़क से फिसलकर पांडु नहर के गहरे पानी में बह गई।

ये भी पढ़ें

सोलर ऊर्जा के कारोबार से जुड़े ये दोनों दोस्त सोमवार को दिनभर का काम पूरा करने के बाद घर लौटने की तैयारी में थे। एक दोस्त अपने दूसरे साथी को कार से उसके घर छोड़ने जा रहा था, लेकिन रास्ते में उफनता पानी उनके लिए जानलेवा बन गया। हादसे के दौरान कार के पानी में फंसते ही दोनों युवकों ने बाहर निकलने की कोशिश की थी या वे कार के साथ ही पानी की धार में बह गए, इस बात की स्थिति की विस्तृत पड़ताल पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा की जा रही है।

परिजनों की अनहोनी की आशंका और सीसीटीवी से मिले सुराग

सोमवार की देर रात तक जब दीपक और अंकित अपने-अपने घर नहीं पहुंचे, तो उनके परिजनों को गहरी चिंता होने लगी। दोनों के परिवारों ने सबसे पहले अपने स्तर पर खोजबीन शुरू की और उनके मोबाइल नंबरों पर लगातार फोन किया। हालांकि, दोनों युवकों के मोबाइल फोन पूरी तरह बंद आ रहे थे। इसके बाद रिश्तेदारों, दोस्तों और व्यावसायिक परिचितों के पास भी संपर्क किया गया, परंतु देर रात तक दोनों का कोई पता नहीं चल सका। अनहोनी की आशंका से घबराए परिजन 8 सितंबर की दोपहर सचेंडी थाने पहुंचे और पुलिस में गुमशुदगी की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।

गुमशुदगी की सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और अलग-अलग टीमों का गठन कर आसपास के क्षेत्रों में तलाशी शुरू की। पड़ताल के दौरान पुलिस ने संभावित मार्ग पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज की गहनता से जाँच की। CCTV फुटेज खंगालने पर पुलिस को दोनों युवक टाटा पंच कार में सवार होकर बचऊपुर मार्ग की ओर जाते हुए स्पष्ट दिखाई दिए, लेकिन उस रास्ते से वापस लौटते हुए उनका कोई सुराग नहीं मिला। इसी आधार पर पुलिस का ध्यान पांडु नदी के जलभराव वाले हिस्से की ओर गया और बाढ़ के पानी में कार के बहने की आशंका को देखते हुए तुरंत पांडु नहर में सर्च ऑपरेशन शुरू करने का फैसला लिया गया।

नहर में फंसी मिली कार और मौके पर बढ़ता हंगामा

8 सितंबर को जांच आगे बढ़ते ही बचऊपुर गांव के पास स्थित पांडु नहर के पुल के पास एक कार पानी में फंसी होने की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। नहर के भीतर पानी में डूबी हुई टाटा पंच कार दिखाई दी, जिसके बाद क्रेन बुलाकर कड़ी मशक्कत के साथ कार को पानी से बाहर निकाला गया। हालांकि, जब कार को किनारे लाकर जांचा गया तो उसमें दोनों युवकों में से कोई भी मौजूद नहीं था। कार खाली मिलने से परिजनों की घबराहट और ज्यादा बढ़ गई।

घटनास्थल पर परिजनों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आसपास के गांवों के लोग और ग्रामीण एकत्रित हो गए। नहर के किनारे परिजनों को उम्मीद थी कि शायद दोनों युवक कार से निकलकर किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए होंगे, परंतु काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई जानकारी न मिलने से मौके पर तनाव और हंगामा बढ़ने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ACP पनकी अमित चौरसिया, सचेंडी थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा, SDM अभिनव सिंह और तहसील स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया और तुरंत पेशेवर गोताखोरों की टीम को नहर के भीतर उतारा। बाढ़ के मटमैले पानी और तेज बहाव के बावजूद गोताखोरों ने नहर के चप्पे-चप्पे में अपनी खोज जारी रखी।

24 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 200 मीटर दूर मिले शव

लगभग 24 घंटे तक लगातार चले इस कठिन और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन का दुखद अंत 8 सितंबर को हुआ, जब गोताखोरों ने नहर के भीतर सघन खोजबीन करते हुए कार मिलने के स्थान से करीब 200 मीटर आगे दोनों युवकों के शव बरामद कर लिए। पानी के तेज बहाव ने दोनों के शवों को कार से काफी दूर धकेल दिया था। जैसे ही गोताखोरों ने शवों को नहर से बाहर निकाला, वहां मौजूद परिजनों में करुण क्रंदन और चीख-पुकार मच गई। जिस उम्मीद के साथ परिवार 24 घंटे से अपनों की राह देख रहा था, वह अचानक मातम में बदल गई।

पुलिस ने तुरंत दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर विधिक प्रक्रियाओं को पूरा किया और पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके साथ ही क्रेन के जरिए निकाली गई कार को भी जब्त कर थाने भिजवाया गया। पुलिस प्रशासन अब इस बात की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है कि कार किस तरह तेज धार की चपेट में आई, दोनों युवक किस पल वाहन से अलग हुए और पानी का तेज प्रवाह उन्हें कितनी दूरी तक ले गया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही समय और कारणों की स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।

दीपक और अंकित के परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

इस भीषण हादसे ने दोनों युवकों के परिवारों को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। एक निजी कंपनी में कार्यरत और सोलर व्यवसाय से जुड़े दीपक पाण्डेय के परिवार में उनके वृद्ध पिता राकेश पाण्डेय, पत्नी सृष्टि और महज एक वर्ष की मासूम बेटी प्रियांशी हैं। 7 सितंबर की रात दीपक घर से काम का हवाला देकर निकले थे। देर रात तक जब वे नहीं लौटे, तो उनकी पत्नी ने कई बार फोन मिलाने की कोशिश की थी, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। 8 सितंबर को गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद भी परिवार को यही उम्मीद थी कि दीपक और अंकित कहीं सुरक्षित होंगे और लौट आएंगे, लेकिन रात में जब नहर से दोनों के शव बरामद हुए तो परिवार की दुनिया उजड़ गई।

अपने जवान बेटे का शव देखते ही पिता राकेश पाण्डेय बदहवास होकर रो पड़े। उन्होंने अत्यंत भावुक होते हुए कहा कि बेटे के जाने के साथ ही परिवार के सारे सपने और भविष्य की उम्मीदें भी चूर-चूर हो गई हैं। घर पर मौजूद दीपक की एक साल की मासूम बेटी प्रियांशी को देखकर परिजनों और सांत्वना देने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। दूसरी ओर रूरा के रहने वाले अंकित कमल के घर में भी इस अचानक हुई त्रासदी के बाद मातम पसरा हुआ है और दोनों गांवों में सन्नाटा छाया है।

पुलिस और प्रशासन की आगे की जाँच और सुरक्षा बिंदु

हादसे की प्राथमिक पड़ताल में सड़क पर बने बाढ़ के भारी जलजमाव और तेज बहाव को ही मुख्य वजह माना जा रहा है। पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से इस क्षेत्र की सड़कों पर पानी का प्रवाह अत्यधिक खतरनाक बना हुआ था। पुलिस और तहसील प्रशासन अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रहा है कि क्या उस जलमग्न रास्ते पर आवागमन को रोकने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे या नहीं। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि हादसे के वक्त वहां पानी का बहाव कितना गहरा और खतरनाक था।

घटनास्थल और आसपास के रास्तों के CCTV फुटेज को विस्तृत जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है ताकि घटना से पूर्व और हादसे के समय की हर गतिविधि की स्पष्ट जानकारी मिल सके। मामले पर जानकारी देते हुए SDM अभिनव सिंह ने बताया कि प्रशासनिक और पुलिस टीमों द्वारा 24 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा कर दोनों शवों को बरामद कर लिया गया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, CCTV विश्लेषण और प्रत्यक्षदर्शियों के साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार आगे की आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पांडु नहर में हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।

सवाल-जवाब

कानपुर के सचेंडी में यह हादसा कब और कहाँ हुआ?
यह हादसा उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में सचेंडी थाना क्षेत्र के बचऊपुर गांव के पास सोमवार (7 सितंबर) की रात करीब 8 बजे से 9 बजे के बीच पांडु नदी के बाढ़ के पानी में डूबी सड़क पर हुआ।
हादसे के शिकार युवकों की पहचान किस रूप में हुई है?
मृतकों की पहचान सुरार निवासी 30 वर्षीय दीपक पाण्डेय और ठठिया (रूरा) निवासी 28 वर्षीय अंकित कमल के रूप में हुई है, जो सोलर ऊर्जा का कारोबार करते थे।
पुलिस को हादसे का सुराग कैसे मिला?
परिजनों द्वारा 8 सितंबर को गुमशुदगी दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने रास्ते के CCTV फुटेज की जांच की, जिसमें कार जलभराव वाले रास्ते पर जाती दिखी लेकिन वापस लौटती नजर नहीं आई।
रेस्क्यू ऑपरेशन में कितना समय लगा और शव कहाँ मिले?
रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 24 घंटे तक चला। 8 सितंबर को गोताखोरों की टीम ने जलमग्न कार मिलने के स्थान से लगभग 200 मीटर दूर नहर के भीतर दोनों युवकों के शव बरामद किए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह हादसा उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान ग्रामीण सड़कों पर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे की पोल खोलता है। पांडु नदी के उफनते पानी के बीच सुरक्षा बैरिकेड्स या चेतावनी संकेतों का अभाव सीधे तौर पर प्रशासनिक चूक को दर्शाता है। यदि ऐसे संवेदनशील मार्गों पर समय रहते बेरिकेडिंग या पुलिस पिकेट तैनात की जाती, तो यह अमूल्य जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। स्थानीय प्रशासन को अब राज्यभर के ऐसे बाढ़ प्रभावित ग्रामीण रास्तों पर तुरंत निगरानी बढ़ानी होगी ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से होने वाली त्रासदियों को रोका जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह दर्दनाक घटना केवल एक आकस्मिक हादसा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के प्रति गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उफनती नदी के पास चेतावनी बोर्ड या पुलिस बल का न होना नागरिकों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता की कमी को उजागर करता है। जब तक संवेदनशील ग्रामीण मार्गों पर रात्रि गश्त और बैरिकेडिंग को अनिवार्य प्रोटोकॉल नहीं बनाया जाएगा, तब तक इस तरह की त्रासदियों को रोक पाना असंभव होगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR