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कांगड़ा की गज्ज खड्ड पर 86 करोड़ से अधिक की लागत से आकार ले रहा नया पुल, इन दो क्षेत्रों के बीच कम होगी दूरीहिमाचल प्रदेश
26 अक्तू॰ 2026, 9:50 am (11 दिन पहले)· 2

कांगड़ा की गज्ज खड्ड पर 86 करोड़ से अधिक की लागत से आकार ले रहा नया पुल, इन दो क्षेत्रों के बीच कम होगी दूरी

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में गज्ज खड्ड पर 86.34 करोड़ रुपये की लागत से नया पुल तैयार किया जा रहा है, जिससे नगरोटा सूरियां और ज्वाली के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नगरोटा सूरियां और ज्वाली क्षेत्र के निवासियों के लिए एक राहत भरी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। नूरपुर क्षेत्र के अंतर्गत गज्ज खड्ड पर एक नया पुल बनाया जा रहा है, जिसे इसी साल जनता को समर्पित किए जाने की तैयारी है। कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने हाल ही में इस निर्माणाधीन पुल स्थल का दौरा किया और चल रहे कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए, ताकि यह परियोजना तय समय सीमा के भीतर पूरी हो सके और जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।

केंद्र सरकार की सेतु बंधन योजना के तहत हो रहा निर्माण

यह महत्वपूर्ण पुल केंद्र सरकार की 'सेतु बंधन योजना' के अंतर्गत बनाया जा रहा है। कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने निरीक्षण के दौरान संबंधित निर्माण कंपनी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी एक नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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लगभग नौ किलोमीटर कम हो जाएगी दोनों क्षेत्रों की दूरी

इस पुल के निर्माण से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नगरोटा सूरियां से ज्वाली के बीच की मौजूदा दूरी में भारी कमी आएगी। वर्तमान में इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी करीब 25 किलोमीटर है, जो पुल के बनने के बाद घटकर सिर्फ 16 किलोमीटर रह जाएगी। इस भौगोलिक बदलाव से स्थानीय लोगों के सफर का समय तो बचेगा ही, साथ ही उनके यात्रा खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके अलावा, बेहतर और सुगम सड़क संपर्क स्थापित होने से इस पूरे क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।

पाइल फाउंडेशन तकनीक से तैयार हो रहा विशाल ढांचा

गज्ज खड्ड पर बन रहे इस पुल की वास्तुकला और तकनीकी विशेषताएं भी काफी अहम हैं। यह पूरा ढांचा पाइल फाउंडेशन तकनीक के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इस तकनीक के तहत जमीन के भीतर लगभग 25 मीटर की गहराई तक गड्ढा खोदा जाता है, जिसके बाद उसे कंकरीट और मजबूत सरिए से भरकर एक ठोस पिल्लरनुमा आकार दिया जाता है और फिर ऊपर खंभों का निर्माण किया जाता है। इस पुल की कुल लंबाई लगभग 828 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर तय की गई है। यह एक डबललेन पुल होगा, जिसके दोनों किनारों पर पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ का निर्माण भी किया जा रहा है।

इस साल जनता को समर्पित करने का प्रयास

कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने जानकारी दी है कि सरकार का पूरा प्रयास है कि इस पुल को इसी साल आम जनता के लिए खोल दिया जाए। गौर करने वाली बात यह है कि इस पुल का निर्माण कार्य लगभग छह महीने पहले ही शुरू किया गया था और इसकी मूल डेडलाइन दिसंबर 2027 तय की गई थी, लेकिन प्रशासन इसे समय से पहले पूरा करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। पुल के शुरू हो जाने से क्षेत्र के लोगों को रोजाना आने-जाने में भारी सहूलियत मिलेगी।

सवाल-जवाब

गज्ज खड्ड पर बन रहा पुल किस जिले में स्थित है?
यह पुल हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र के अंतर्गत आ रहा है।
यह पुल किन दो क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा?
यह पुल नगरोटा सूरियां और ज्वाली क्षेत्र के बीच संपर्क स्थापित करेगा।
पुल बनने के बाद दोनों क्षेत्रों के बीच की दूरी कितनी रह जाएगी?
पुल के निर्माण के बाद दूरी 25 किलोमीटर से घटकर लगभग 16 किलोमीटर रह जाएगी।
इस पुल का निर्माण किस योजना के तहत किया जा रहा है?
इस पुल का निर्माण केंद्र सरकार की 'सेतु बंधन योजना' के तहत किया जा रहा है।
पुल की लंबाई और चौड़ाई कितनी होगी?
गज्ज खड्ड पर बन रहे इस पुल की लंबाई लगभग 828 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर होगी।
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टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·10 दिन पहले

नगरोटा सूरियां और ज्वाली के बीच नौ किलोमीटर की दूरी कम होना वाकई बड़ी राहत है। खड्डों पर ऐसे मजबूत पुल बनने से समय और ईंधन दोनों की बचत होती है। क्या इस पुल के बनने के बाद इस इलाके में बस रूट भी बढ़ाए जाएंगे?

Arjun Mehta@arjun-mehta·11 दिन पहले

पच्चीस किलोमीटर का रास्ता घटकर सीधे सोलह किलोमीटर रह जाना सच में बड़ी राहत है। रोज़ाना आने-जाने वालों का कितना समय और पेट्रोल बचेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·11 दिन पहले

अर्जुन, राहत तो सच में मिलेगी, पर छह महीने में इतनी बड़ी पाइल फाउंडेशन वाली नींव तैयार होना थोड़ा हैरान करता है। इतनी जल्दी में क्वालिटी से समझौता न हो जाए, बस यही डर है।

Rohan Verma@rohan-verma·11 दिन पहले

नौ किलोमीटर की दूरी कम होना और सफर का समय घटना वाकई बहुत राहत की बात है। समय पर काम पूरा हो जाए तो जनता को इसका पूरा लाभ मिलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 दिन पहले

रोहन भाई, दूरी कम होने की बात तो ठीक है, पर दिसंबर 2027 की डेडलाइन से सीधे इसी साल काम पूरा होने की बात पर थोड़ा शक है। इतनी जल्दी भारी भरकम पुल कैसे बन जाएगा?

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