हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक क्षेत्र से एक और दुखद समाचार सामने आया है। कांगड़ा जिले के शाहपुर निवासी और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राकेश चौहान का दिल का दौरा पड़ने के कारण आकस्मिक निधन हो गया है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद जब उन्हें चिकित्सीय सहायता के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी उन्होंने रास्ते में अंतिम सांस ली। उनके असामयिक प्रस्थान से पूरे क्षेत्र और पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा शोक व्याप्त हो गया है।
सुबह के समय बिगड़ी थी तबीयत
प्राप्त विवरण के अनुसार, 4 नवंबर की सुबह लगभग 6:45 बजे राकेश चौहान को अचानक सीने में तीव्र दर्द और हृदयघात हुआ। परिजनों ने बिना समय गंवाए तत्काल हरकत दिखाई और उनके पुत्र उन्हें तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाने लगे। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनका निधन हो गया और चिकित्सकों के पास उन्हें बचाने का अवसर नहीं रहा।
संगठन में निभाई थीं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
शाहपुर के रहने वाले राकेश चौहान, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक पिंका नाम से भी जानते थे, मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी के खेल प्रकोष्ठ में सह-संयोजक के पद पर दायित्व निभा रहे थे। इससे पहले उन्होंने संगठन में जिला महामंत्री के रूप में भी लंबा समय बिताया था और पार्टी की जमीनी स्तर पर मजबूती के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके अचानक चले जाने से स्थानीय स्तर पर पार्टी को संगठनात्मक रूप से भारी क्षति पहुंची है।
नेताओं और सामाजिक संगठनों ने प्रकट की संवेदनाएं
राकेश चौहान के निधन पर नगरोटा के पूर्व भाजपा विधायक अरुण कुमार कूका मेहरा ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राकेश चौहान का यूं चले जाना पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। अरुण मेहरा ने उनके समर्पण, अनुशासन और समाजसेवा की भावना को याद करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इसके साथ ही कांगड़ा में न्यू पेंशन स्कीम एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राजेंद्र मन्हास ने भी दुख जताते हुए कहा कि शाहपुर अपने इस प्रिय साथी को हमेशा याद रखेगा।
हिमाचल ने दो दिनों में खोए दो जनप्रतिनिधि
राज्य के लिए यह लगातार दूसरा दिन है जब किसी प्रमुख राजनीतिक चेहरे के निधन की खबर आई है। इससे ठीक एक दिन पहले, 3 नवंबर को शिमला जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक नंद लाल का निधन हुआ था। नंद लाल लंबे समय से कैंसर और किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और शिमला में उन्होंने अंतिम सांस ली थी। नंद लाल का अंतिम संस्कार रामपुर के देवठी गांव में निर्धारित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी सम्मिलित होने पहुंचे। दो दिनों के भीतर दो राजनीतिक नेताओं के निधन से हिमाचल प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।


















