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कोडरमा में एआई फोटो एडिटिंग का बढ़ता चलन खतरे की घंटी, एसपी कुमार शिवाशिश ने दी चेतावनीझारखंड
17 सित॰ 2026, 12:15 am (8 दिन पहले)· 0

कोडरमा में एआई फोटो एडिटिंग का बढ़ता चलन खतरे की घंटी, एसपी कुमार शिवाशिश ने दी चेतावनी

सोशल मीडिया पर एआई की मदद से तस्वीरों को बदलने का ट्रेंड इन दिनों तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कोडरमा के एसपी कुमार शिवाशिश ने इस पर चिंता जताते हुए नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति आगाह किया है।

इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से तस्वीरों को अपनी पसंद के अनुसार बदलना बेहद आसान हो चुका है। इन दिनों आम लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को अलग-अलग रचनात्मक और आधुनिक अंदाज में ढालकर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं। हालांकि, तकनीक का यह आकर्षक और नया इस्तेमाल कई बार जी का जंजाल भी बन सकता है। इसी गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए कोडरमा के पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशिश ने आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा को लेकर खास तौर पर सतर्क रहने की अहम सलाह दी है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करने के छिपे जोखिम

किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी तस्वीर अपलोड करने से पहले उसके संभावित सुरक्षा खतरों को गहराई से समझना बेहद जरूरी है। बिना किसी दूरदर्शिता के अपनी निजी तस्वीरों को विभिन्न एआई टूल्स या अन्य अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर देने से तस्वीरों के दुरुपयोग की आशंका लगातार बनी रहती है। एक बार जब कोई तस्वीर किसी दूसरे पक्ष या सर्वर के पास चली जाती है, तो उसके बाद उसके इस्तेमाल और नियंत्रण पर व्यक्ति का अधिकार लगभग खत्म हो जाता है। ऐसे में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है।

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गलत हाथों में पहुंचकर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं तस्वीरें

पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि एआई तकनीक की सहायता से किसी भी इंसान के चेहरे की पहचान और उसकी मूल तस्वीर में आसानी से फेरबदल किया जा सकता है। यदि ऐसी तस्वीरें किसी असामाजिक तत्व या गलत हाथों में पड़ जाती हैं, तो इनका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के अवैध या गलत कार्यों में किया जा सकता है। यही कारण है कि अपनी व्यक्तिगत और निजी तस्वीरों को किसी भी अनजान या कम सुरक्षित माने जाने वाले प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से पहले पूरी सावधानी बरतना अनिवार्य है।

तस्वीरों के स्टोरेज और शेयरिंग पर पैनी नजर रखना जरूरी

नागरिकों को सलाह देते हुए एसपी ने कहा कि किसी भी एआई आधारित प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करने से पहले उससे जुड़ी शर्तों और गोपनीयता की नीतियों को भली-भांति पढ़ लेना चाहिए। यह जानना आवश्यक है कि आपकी निजी तस्वीरों को कहां और किस सर्वर पर स्टोर किया जा रहा है तथा उनका इस्तेमाल किस प्रकार किया जा सकता है। इसके अलावा, अपनी तस्वीरों को बिना किसी खास जरूरत के सार्वजनिक करना या अन्य लोगों के साथ बेहिसाब साझा करने से बचना भी सुरक्षा की दृष्टि से बहुत जरूरी है।

फर्जी प्रोफाइल और डीपफेक तकनीक का मंडराता बड़ा खतरा

अधिकारी ने आगाह किया कि एआई के जरिए तस्वीरों और चेहरों में हेरफेर करके फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल या भ्रामक सामग्री तैयार करना बहुत आसान हो गया है। आज के समय में साइबर अपराधी किसी भी आम या खास व्यक्ति की तस्वीर चुराकर उसका दुरुपयोग करते हुए फर्जी अकाउंट बना रहे हैं। इसके साथ ही, डीपफेक जैसी खतरनाक तकनीक का इस्तेमाल करके किसी भी इंसान की प्रतिष्ठा और छवि को भारी नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया जा सकता है। इस तरह के मामलों में फंसने पर लोगों को गंभीर मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अंत में एसपी ने जोर देकर कहा कि डिजिटल दुनिया में मिलने वाली सुविधाओं के साथ-साथ अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। नागरिकों को सोशल मीडिया और एआई का प्रयोग करते समय अपनी निजी तस्वीरों, पहचान और तमाम संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

सवाल-जवाब

कोडरमा में यह चेतावनी किसने जारी की है?
यह चेतावनी कोडरमा के पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशिश द्वारा जारी की गई है।
एआई फोटो एडिटिंग से किस प्रकार का मुख्य खतरा है?
एआई फोटो एडिटिंग से तस्वीरें गलत हाथों में पड़ने, फर्जी प्रोफाइल बनने और डीपफेक के जरिए छवि खराब होने का खतरा रहता है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
प्लेटफॉर्म की शर्तों को समझना चाहिए और अनजान या असुरक्षित जगहों पर अपनी निजी तस्वीरें अपलोड करने से बचना चाहिए।
साइबर अपराधी चुराई गई तस्वीरों का क्या करते हैं?
साइबर अपराधी इन तस्वीरों का इस्तेमाल फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने और भ्रामक सामग्री तैयार करने के लिए कर सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·8 दिन पहले

छोटे शहरों तक एआई फोटो ट्रेंड्स का पहुंचना तकनीक के प्रसार को तो दर्शाता है, लेकिन सुरक्षा जागरूकता के बिना यह बड़ा जोखिम है। जब उपयोगकर्ता किसी वायरल एआई ऐप पर फोटो अपलोड करते हैं, तो वे केवल तस्वीर नहीं बल्कि अपना बायोमेट्रिक डेटा और चेहरे के पैटर्न भी अनजान सर्वरों को सौंप देते हैं। स्थानीय पुलिस की यह चेतावनी बेहद सामयिक है, क्योंकि आज डीपफेक और पहचान की चोरी से बचने के लिए डिजिटल साक्षरता और डेटा प्राइवेसी की समझ ही सबसे प्रभावी रक्षा कवच है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

कोडरमा एसपी की यह चेतावनी केवल स्थानीय स्तर पर साइबर जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्तर पर उभरते डीपफेक संकट का एक गंभीर प्रतिबिंब है। जिस प्रकार एआई टूल्स का अंधाधुंध उपयोग बढ़ रहा है, उससे व्यक्तिगत निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए एक नई चुनौती पैदा हो रही है। यदि इस मोर्चे पर नीतिगत और तकनीकी नियंत्रण नहीं कड़े किए गए, तो आने वाले समय में चुनावी और सामाजिक विघटन का खतरा और गहराएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

कोडरमा एसपी की यह चेतावनी व्यक्तिगत सतर्कता से आगे बढ़कर डिजिटल अर्थव्यवस्था और एसेट सिक्योरिटी के उस अंधेरे पहलू को उजागर करती है, जहां अनियंत्रित एआई टूल्स का उपयोग वित्तीय धोखाधड़ी और ब्रांड वैल्यू को नष्ट करने के लिए तेजी से हो रहा है। ब्लॉकचेन और डिजिटल आइडेंटिटी मैनेजमेंट के बिना, आने वाले समय में वर्चुअल स्पेस में हमारी पहचान पूरी तरह खतरे में पड़ जाएगी, जिससे कॉरपोरेट जगत और वित्तीय बाजारों में भी सुरक्षा का नया संकट खड़ा हो सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

यह चेतावनी सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश समेत देश भर के डिजिटल स्पेस की गंभीर सच्चाई है। एआई आधारित टूल्स के अंधाधुंध इस्तेमाल से प्राइवेसी का संकट गहराता जा रहा है। आने वाले समय में यह ट्रेंड संगठित साइबर अपराध और चुनावों या सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए डीपफेक के रूप में एक बड़ा खतरा बन सकता है, जिससे निपटने के लिए जमीनी स्तर पर डिजिटल साक्षरता अभियान चलाने की सख्त जरूरत है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

यह तकनीकी संकट महज़ तस्वीरों के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी और न्यायिक ढांचे के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। जब तक मजबूत डेटा संरक्षण कानून सख्ती से लागू नहीं होते और अदालतों में डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच के विशेष मानक तय नहीं किए जाते, तब तक इस तरह के मामलों में अपराधियों तक पहुंचना और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना बेहद कठिन रहेगा।

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