पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व पर कड़ा हमला बोलते हुए एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को फौरन गिरफ्तार किए जाने की मांग उठाई और ऐलान किया कि इस मुद्दे को लेकर देशभर में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। ममता बनर्जी का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त रहते हुए देश में जहां-कहीं भी मतदान प्रक्रिया संपन्न कराई गई है, उन सभी जगहों पर दोबारा मतदान कराया जाना बेहद जरूरी है।
चुनाव चिन्ह छीनने और जनसमर्थन के दावे
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने यह गंभीर शिकायत भी दर्ज कराई कि अपनी आवाज उठाने और विरोध दर्ज कराने के कारण उनका आधिकारिक चुनाव चिन्ह तक छीन लिया गया। चुनावी नतीजों पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि 2024 के आम चुनाव में जो विजय हासिल हुई थी, वह पूरी तरह आम जनता को समर्पित थी। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि 2025-26 के चुनावी दौर में मिली सफलता भी सीधे तौर पर नागरिकों के व्यापक समर्थन और विश्वास की बदौलत संभव हो सकी थी।
प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग और धमकियों का आरोप
ममता बनर्जी ने वर्तमान व्यवस्था पर विपक्षी आवाजों को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए पुलिस बल का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। अपने वक्तव्य में उन्होंने दावा किया कि इतिहास में इतना बड़ा घोटाला कभी देखने को नहीं मिला। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सत्ता में बैठे लोगों को लगता है कि उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए, तो वे स्वयं खुलकर कहें कि उन्हें हिरासत में लिया जाए, क्योंकि वर्तमान हालात में मुख्य चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार करना अनिवार्य हो चुका है। इसके अलावा उन्होंने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप मढ़ते हुए कहा कि पुलिस घर-घर जाकर लोगों पर एक विशेष राजनीतिक दल में शामिल होने का दबाव बना रही है और ऐसा न करने पर जेल भेजने की धमकियां दे रही है।





















