भारत की सर्वोच्च अदालत ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी कानूनी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया और 11 मार्च 2015 के निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया। ट्रायल कोर्ट के उस आदेश में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए उन्हें आरोपी के रूप में अदालत में उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया था।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर सर्वोच्च अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करने अथवा डॉ. मनमोहन सिंह के विरुद्ध संज्ञान लेने की कोई ठोस और विधिक वजह मौजूद नहीं थी। अदालत ने रेखांकित किया कि उसने मामले से जुड़े सभी पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनते हुए जांच एजेंसी की दोनों क्लोजर रिपोर्टों का गहराई से अध्ययन और विश्लेषण किया है।
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी की रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार करने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर यह पूरी तरह साफ है कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने का कोई वैध आधार नहीं था। इसी के मद्देनजर अदालत ने डॉ. मनमोहन सिंह की याचिका मंजूर करते हुए 11 मार्च 2015 के आदेश तथा उसके तहत जारी समन को पूर्णतः रद्द कर दिया।
अन्य सह-आरोपियों के मामलों पर नहीं पड़ेगा प्रभाव
अदालती सुनवाई के दौरान एक वकील ने पीठ से सवाल किया कि क्या इस फैसले का असर उसी मामले से संबंधित अन्य आरोपियों की लंबित याचिकाओं और अपीलों पर भी पड़ेगा। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह आदेश विशेष रूप से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की आधिकारिक स्थिति और उनके पदीय दायित्वों तक ही सीमित है।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस निर्णय का प्रभाव अन्य आरोपियों से जुड़े मुकदमों पर नहीं पड़ेगा और उनके मामलों में कानून अपनी सामान्य प्रक्रिया के तहत ही आगे सुनवाई करेगा।
पूर्व प्रधानमंत्री के लिए अंतिम विधिक राहत
उच्चतम न्यायालय के इस महत्वपूर्ण निर्णय से दिसंबर 2024 में दिवंगत हो चुके पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला खदान आवंटन प्रकरण में पूर्ण कानूनी राहत हासिल हो गई है। इसके साथ ही उनकी सरकारी भूमिका से जुड़ी इस लंबी आपराधिक प्रक्रिया का आधिकारिक रूप से पटाक्षेप हो गया है।



















