राजस्थान के वातावरण में इस समय मौसमी बदलाव की एक नई हलचल देखने को मिल रही है। राज्य के विभिन्न अंचलों से दक्षिण-पश्चिम मानसून के वापस लौटने का क्रम लगातार जारी है और परिस्थितियां इसके पूरी तरह से विदा होने के काफी अनुकूल बन चुकी हैं। अगले दो से तीन दिनों की समयावधि में राज्य के कई अन्य इलाकों से भी मानसूनी बादल पूरी तरह पीछे हट सकते हैं। हालांकि इस विदाई बेला के बीच इक्का-दुक्का संभागों में छिटपुट बौछारों और बादलों की गड़गड़ाहट का दौर भी देखने को मिलेगा। विशेषकर 21 सितंबर को पूर्वी राजस्थान के कुछ संभागों में स्थानीय स्तर पर बारिश के आसार जताए गए हैं, जबकि पश्चिमी अंचल लगभग पूरी तरह शुष्क रुख अपना चुका है।
मानसून की विदाई रेखा और अनुकूल परिस्थितियां
मौसम के आधिकारिक आकलन के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा इस समय 27.0 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 68.0 डिग्री पूर्वी देशांतर से निकलकर रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी तथा खाजूवाला से होते हुए 29.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 71.5 डिग्री पूर्वी देशांतर तक जा पहुंची है। अगले दो से तीन दिनों में राजस्थान के बचे हुए कुछ अन्य भागों के अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब और गुजरात के सौराष्ट्र तथा कच्छ के कई हिस्सों से भी मानसून के लौटने के लिए वातावरण पूरी तरह मुफीद बना हुआ है। वातावरण में मौजूद नमी का स्तर लगातार घट रहा है, जिसके चलते आने वाले दिनों में बादलों का जमघट समाप्त हो जाएगा।
पूर्वी राजस्थान के चुनिंदा जिलों में मेघगर्जन और झोंकेदार हवाएं
21 सितंबर के दिन पूर्वी राजस्थान के कोटा, उदयपुर और अजमेर संभागों के अंतर्गत आने वाले चुनिंदा क्षेत्रों में हल्की वर्षा दर्ज की जा सकती है। यह ध्यान देने योग्य है कि इन तीनों संभागों के समूचे भूभाग में व्यापक बारिश नहीं होगी, बल्कि केवल कुछ निश्चित स्थानों पर ही बादलों के बरसने की संभावना है। वहीं विशेष सावधानी के तौर पर बारां, झालावाड़, कोटा और प्रतापगढ़ में बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली चमकने अथवा गिरने की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही इन चार प्रमुख जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने का भी अनुमान है, जिसके चलते वहां रहने वाले नागरिकों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
पश्चिमी राजस्थान में शुष्क हवाएं और बढ़ता पारा
पश्चिमी राजस्थान के थार रेगिस्तान से सटे इलाकों में मानसूनी विदाई का स्पष्ट असर दिखने लगा है। जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश जनपदों में अगले 5 से 7 दिनों तक मौसम पूरी तरह शुष्क और खुला रहने की संभावना बनी हुई है। आसमान साफ होते ही तेज धूप ने जमीन को तपाना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों के दौरान जहां छिटपुट बरसात से दिन के तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई थी, वहीं अब बारिश की गतिविधियां थमते ही अधिकतम तापमान में फिर से बढ़ोतरी का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में राज्य भर में सबसे अधिक तापमान बाड़मेर में दर्ज किया गया, जहां पारा 39.2 डिग्री सेल्सियस के स्तर तक पहुंच गया। साफ आसमान के कारण पश्चिमी जिलों में आगामी दिनों में धूप और उमस भरी गर्मी का असर और अधिक तीखा हो सकता है।
22 से 25 सितंबर के बीच मौसम का मिजाज और पश्चिमी विक्षोभ
22 सितंबर को केवल उदयपुर संभाग के कुछ सीमित इलाकों में ही बूंदाबांदी अथवा हल्की बारिश की संभावना शेष रह जाएगी, जबकि शेष राजस्थान में मौसम मुख्यतः शुष्क ही रहेगा। इसके पश्चात 23 और 24 सितंबर को राज्य के लगभग सभी क्षेत्रों में मौसम पूरी तरह सामान्य और सूखा रहने वाला है। पश्चिमी राजस्थान के जिलों में इन दिनों वर्षा की कोई गतिविधि नहीं देखी जाएगी। हालांकि 25 सितंबर को मौसमी समीकरणों में हल्का सा उलटफेर हो सकता है। इस दिन श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, उत्तरी बीकानेर और चूरू जिलों में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का आंशिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस विक्षोभ के असर से कहीं-कहीं मेघगर्जन, तेज हवाएं और हल्की बारिश होने के आसार बन सकते हैं। इसके अलावा उत्तरी, पूर्वी और मध्य राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी स्थानीय स्तर पर बादलों की हलचल बढ़ सकती है, जहां कोटा और भरतपुर संभाग में कहीं-कहीं तेज हवाओं के साथ पानी गिर सकता है। बहरहाल, राज्य के अधिकांश अंचलों में मौसम सामान्य ही बना रहेगा।
सितंबर के अंतिम दिनों से लेकर अक्टूबर तक का संभावित पूर्वानुमान
26 और 27 सितंबर को राज्य के ज्यादातर इलाकों में मौसम बिल्कुल शांत और सामान्य रहने का अनुमान है, जहां किसी विशेष वर्षा की संभावना से इनकार किया गया है। इसके बाद 29 और 30 सितंबर को उत्तरी, पूर्वी तथा मध्य राजस्थान के सीमित क्षेत्रों में स्थानीय रूप से विकसित होने वाले बादलों के चलते एक-दो स्थानों पर हल्की फुहारें पड़ सकती हैं। आने वाले महीने यानी 1 से 7 अक्टूबर के बीच भी राजस्थान का मौसम आमतौर पर सामान्य ही रहने वाला है, यद्यपि इस दौरान बीच-बीच में कुछ इलाकों में तेज हवाओं के झोंके महसूस किए जा सकते हैं। दीर्घकालिक मौसमी संकेतों के अनुसार अक्टूबर के तीसरे और चौथे सप्ताह में दो अलग-अलग पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकते हैं, जिनका वास्तविक असर उस समय मौजूद स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।



















