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मणिपुर जेल विभाग ने मनाया पहला स्थापना दिवस, 134 साल के इतिहास में सुधार और पुनर्वास पर जोरमणिपुर
21 सित॰ 2026, 8:40 pm (36 दिन पहले)· 0

मणिपुर जेल विभाग ने मनाया पहला स्थापना दिवस, 134 साल के इतिहास में सुधार और पुनर्वास पर जोर

मणिपुर जेल एवं सुधार सेवा विभाग ने अपनी स्थापना के 134 साल पूरे होने पर पहला स्थापना दिवस आयोजित किया। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने जेलों को केवल सजा तक सीमित न रखकर नैतिक सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाने का आह्वान किया।

मणिपुर जेल एवं सुधार विभाग ने अपनी स्थापना के 134 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमवार को अपना पहला स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया। इंफाल स्थित मणिपुर सेंट्रल जेल परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विभाग के लंबे सफर को याद किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने जेल प्रशासन को नई दिशा देने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेलों की भूमिका केवल बंदियों को कैद रखने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इन्हें सामाजिक और नैतिक सुधार के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

सजा से आगे सुधार और पुनर्वास की जरूरत

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब तक कानून के तहत किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक हिरासत में रखे गए लोगों को दोषी नहीं माना जाना चाहिए। उनका मानना था कि जेलों को नैतिक सुधार, व्यक्तिगत बदलाव और सामाजिक पुनर्वास के संस्थानों के तौर पर कार्य करना चाहिए, जिससे कैदी रिहाई के बाद एक बेहतर नागरिक बनकर समाज में लौट सकें।

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कर्मचारियों की कमी दूर करने और आधुनिक ढांचे का भरोसा

जेल प्रशासन के कामकाज की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने विभाग में मानव संसाधन की कमी का संज्ञान लिया। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को उपयुक्तता के अनुसार डाई-इन-हार्नेस योजना या सीधी भर्ती के माध्यम से शीघ्र भरा जाना चाहिए। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जेलों के बुनियादी ढांचे को वर्तमान मानकों के अनुसार उन्नत और आधुनिक बनाने के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएगी।

गृह मंत्री ने रेखांकित किया विभाग का ऐतिहासिक महत्व

कार्यक्रम में मौजूद गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने पहले स्थापना दिवस को विभाग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि पहले उचित पहचान और मान्यता न मिलने के कारण विभाग अपनी स्वर्ण जयंती नहीं मना सका था। हालांकि, अब आवश्यक मान्यता प्राप्त होने के बाद विभाग इस महत्वपूर्ण आयोजन को संभव बना पाया है। गृह मंत्री ने यह भी जोड़ा कि जनता की सेवा और सरकारी कामकाज में प्रत्येक विभाग की भूमिका समान रूप से अहम होती है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में जेलों की समग्र स्थिति में सुधार लाने के लिए सक्रियता से काम कर रही है और उन्होंने कठिन परिस्थितियों में कर्तव्य निभाने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों के समर्पण की सराहना की।

उत्कृष्ट सेवा के लिए मेडल से नवाजे गए जेल अधीक्षक

समारोह के दौरान मणिपुर सेंट्रल जेल, इंफाल के अधीक्षक एस.के. भद्रिका को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता दिवस 2024 के अवसर पर उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति सुधारात्मक सेवा पदक से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी, जिसे इस समारोह में विधिवत प्रदान किया गया। इस गौरवपूर्ण आयोजन में नागालैंड के पुलिस महानिदेशक रूपिन शर्मा, मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (कारागार) अरविंद कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आई.के. मुइवा सहित जेल एवं सुधार सेवा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सवाल-जवाब

मणिपुर जेल विभाग ने कितने वर्षों के बाद अपना पहला स्थापना दिवस मनाया?
मणिपुर जेल एवं सुधार विभाग ने अपनी स्थापना के 134 वर्ष पूरे होने के बाद अपना पहला स्थापना दिवस मनाया।
यह कार्यक्रम कहाँ आयोजित किया गया था?
यह समारोह इंफाल स्थित मणिपुर सेंट्रल जेल परिसर में आयोजित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने जेलों की भूमिका के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों को केवल कैद रखने की जगह नहीं, बल्कि नैतिक सुधार और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए।
जेल विभाग में कर्मचारियों की कमी को कैसे दूर किया जाएगा?
मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों को डाई-इन-हार्नेस योजना या सीधी भर्ती के माध्यम से भरने का सुझाव दिया है।
विभाग अपनी स्वर्ण जयंती पहले क्यों नहीं मना सका था?
गृह मंत्री के अनुसार, उस समय विभाग को उचित मान्यता नहीं मिली थी, इसलिए वह स्वर्ण जयंती नहीं मना पाया था।
समारोह में किस अधिकारी को पदक से सम्मानित किया गया?
मणिपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक एस.के. भद्रिका को स्वतंत्रता दिवस 2024 के राष्ट्रपति सुधारात्मक सेवा पदक से सम्मानित किया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·36 दिन पहले

134 साल बाद पहला स्थापना दिवस मनाना अजीब है, पर सुधरने का मौका सबको मिलना चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·36 दिन पहले

134 साल बाद पहला स्थापना दिवस मनाना थोड़ा अजीब है। इतने साल कैसे छूट गए?

Tanvi Desai@tanvi-desai·36 दिन पहले

रविकेश, यह अजीब नहीं है, गृह मंत्री ने तो खुद कहा कि पहले मान्यता नहीं थी इसलिए ऐसा हुआ।

Rohan Verma@rohan-verma·36 दिन पहले

134 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहला स्थापना दिवस मनाना ऐतिहासिक है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती मानव संसाधन की कमी को दूर करना और बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण होगा। यदि जेलों को सुधार गृह बनाना है, तो कैदियों के कौशल विकास और रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी, तभी पुनर्वास के इस विजन को धरातल पर उतारा जा सकेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना होगा कि 134 साल बाद मिला यह प्रशासनिक मंच केवल एक प्रतीक बनकर न रह जाए। पूर्वोत्तर के संवेदनशील भू-राजनीतिक और सुरक्षा माहौल में जेल सुधार केवल आंतरिक प्रशासन का विषय नहीं है, बल्कि यह राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली और मानवाधिकार मानकों की विश्वसनीयता से सीधे जुड़ा है। जब तक सरकार डाई-इन-हार्नेस और सीधी भर्ती के लंबित मामलों पर त्वरित निर्णय नहीं लेती, तब तक बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के कागजी दावे धरातल पर प्रभाव नहीं छोड़ पाएंगे।

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