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मणिपुर के तमेंगलोंग में तड़के अंधाधुंध गोलीबारी, महिला की मौत और मासूम बच्चे समेत पति घायलमणिपुर
13 सित॰ 2026, 1:25 pm (44 दिन पहले)· 2

मणिपुर के तमेंगलोंग में तड़के अंधाधुंध गोलीबारी, महिला की मौत और मासूम बच्चे समेत पति घायल

मणिपुर के तमेंगलोंग जिले में रविवार तड़के एक गांव पर संदिग्ध उग्रवादियों ने हमला बोल दिया, जिसमें एक महिला की जान चली गई और उसके पति व मासूम बेटे को गोलियां लगी हैं।

मणिपुर के तमेंगलोंग जिले में रविवार तड़के एक सुदूर गांव में भारी गोलीबारी की घटना सामने आई है। हथियारबंद हमलावरों ने टोलेन कुकी गांव में एक रिहायशी ठिकाने को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इस घातक हमले में ल्हिंग्नई नाम की एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति और एक दुधमुंहे बच्चे को गंभीर हालत में गोलियों के घाव लगे हैं। यह हिंसक वारदात राष्ट्रीय राजमार्ग 37 के करीब स्थित एक बेहद दुर्गम इलाके में सुबह लगभग 4 बजे अंजाम दी गई।

घर में घुसकर चलाईं गोलियां, बच्चे को लगीं दो गोलियां

हमलावरों ने पहले पूरे गांव में दहशत फैलाने के मकसद से ताबड़तोड़ फायरिंग की और फिर सीधे पीड़ित परिवार के घर को निशाना बनाया। ल्हिंग्नई पर बेहद करीब से गोलियां दागी गईं, जिससे उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके पति भी इस गोलीबारी में बुरी तरह जख्मी हुए हैं। दंपती के नन्हे बेटे के हाथ में गोली लगी है, जबकि एक अन्य गोली उसके कूल्हे में धंस गई। घटना के तुरंत बाद दंपति के तीन अन्य बच्चे अचानक लापता बताए गए थे, जिससे इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई। हालांकि कुछ समय बाद उन बच्चों को सुरक्षित तलाश लिया गया।

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हमले के पीछे एनएससीएन-आईएम पर आरोप

स्थानीय बाशिंदों ने इस खूनी वारदात के लिए एनएससीएन-आईएम के कैडरों और नागा विलेज गार्ड्स पर उंगली उठाई है। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है और वारदात के समय तक किसी भी विद्रोही संगठन ने हमले का जिम्मा नहीं लिया था। पुलिस बल मामले के हर पहलू की पड़ताल में जुटा हुआ है ताकि हमलावरों के वास्तविक नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

13 सितंबर की तारीख और पुराना इतिहास

यह हमला ठीक 13 सितंबर की तारीख को हुआ, जिसे कुकी समुदाय हर साल साह्नित नी यानी कुकी ब्लैक डे के रूप में याद करता है। नब्बे के दशक में भड़की कुकी-नागा जातीय हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में यह शोक दिवस मनाया जाता है। 13 सितंबर का दिन 1993 के जूपी नरसंहार की बरसी भी है, जिसमें तमेंगलोंग और तत्कालीन सेनापति जिले के कई कुकी नागरिकों का कत्लेआम हुआ था। कुकी संगठन उस ऐतिहासिक नरसंहार में भी एनएससीएन-आईएम की संलिप्तता का आरोप लगाते रहे हैं।

दुर्गम भूगोल और स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती

पश्चिमी तमेंगलोंग के तौसेम इलाके में बसा टोलेन गांव भौगोलिक रूप से काफी कटा हुआ है। पथरीली और ऊबड़-खाबड़ जमीन के साथ-साथ खराब सड़क संपर्क के कारण वहां आपातकालीन सेवाएं पहुंचाना हमेशा से भारी चुनौती रहा है। गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल ले जाने और राहत सामग्री पहुंचाने में सुरक्षाकर्मियों व स्वास्थ्य टीमों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है।

कुकी-ज़ो और नागा समुदायों के बीच पहले से जारी तनातनी के बीच इस ताजा हमले ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंफाल-तमेंगलोंग मार्ग से सटे इलाकों में रुक-रुक कर हो रही गोलीबारी ने समूचे क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया है।

सवाल-जवाब

तमेंगलोंग में गोलीबारी की यह घटना कब और कहां हुई?
यह घटना रविवार तड़के करीब 4 बजे मणिपुर के तमेंगलोंग जिले के पश्चिमी तौसेम क्षेत्र स्थित टोलेन कुकी गांव में हुई, जो एनएच-37 के पास है।
इस हमले में किन लोगों को नुकसान पहुंचा है?
हमले में ल्हिंग्नई नाम की महिला की जान चली गई, जबकि उनके पति और एक दुधमुंहे बेटे को गोलियों के गंभीर घाव लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस हमले का आरोप किस पर लगाया है?
ग्रामीणों ने एनएससीएन-आईएम कैडरों और नागा विलेज गार्ड्स पर हमले का आरोप लगाया है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुकी समुदाय के लिए 13 सितंबर का क्या महत्व है?
कुकी समुदाय 13 सितंबर को साह्नित नी यानी कुकी ब्लैक डे के रूप में मनाता है, जो 1993 के जूपी नरसंहार और 1990 के दशक की जातीय हिंसा के पीड़ितों की याद में मनाया जाता है।
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