तुला राशि राशिफल 28 अक्टूबर: शनि की दृष्टि से पूरे होंगे पेंडिंग काम, जानिए क्या कहती है आपकी चंद्र राशिमानसा में युवक की संदिग्ध मौत पर कोहराम, शव धरने पर ले जाने को लेकर पुलिस से भिड़े ग्रामीणदिल्ली के भरत नगर मर्डर केस में बड़ा मोड़, सीसीटीवी में कैद हुए एक लड़का और तीन लड़कियांब्रिटेन के ऑटम बजट और ब्याज दरों के फैसलों से पहले यूरो के मुकाबले मजबूत हुआ ब्रिटिश पाउंडसऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले का हूती विद्रोहियों ने किया दावाफेडरल रिजर्व की सख्ती और पश्चिम एशिया में खिंचाव के बीच अमेरिकी डॉलर दो हफ्ते के शीर्ष पर, वैश्विक बाजारों में हलचलकरवाचौथ पर जीवनसंगिनी को दें ये खास तोहफे, चेहरे पर आ जाएगी प्यारी मुस्कानइथेरियम ईटीएफ से भारी निकासी के बीच $2,310 के अहम स्तर पर टिकी ईटीएच की कीमतकरवाचौथ पर हल्के और शाही गहनों से सजाएं अपना रूप, ये पांच शानदार विकल्प देंगे राजसी अंदाजजब नाथन एस्टल ने पानी पूरी बेचने वाले को थमा दिया मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड और 1000 पाउंड का इनाम
मणिपुर में 200 से अधिक नागा परिवार विस्थापित, सुरक्षा और राहत की मांग को लेकर राज्यपाल को सौंपा ज्ञापनमणिपुर
2 अक्तू॰ 2026, 5:25 pm (26 दिन पहले)· 4

मणिपुर में 200 से अधिक नागा परिवार विस्थापित, सुरक्षा और राहत की मांग को लेकर राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

मणिपुर के तीन जिलों में दर्जनों घरों के जलने के बाद 200 से ज्यादा नागा परिवारों ने पलायन किया है। नागरिक संगठन के नेताओं ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से पीड़ितों को राहत देने और हाईवे पर सुरक्षा बढ़ाने की गुहार लगाई है।

मणिपुर के तीन संवेदनशील जिलों में कई गांवों में आगजनी की घटनाओं के बाद 200 से ज्यादा नागा परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। नोनी, तमेंगलांग और कांगपोकपी जिलों के कम से कम आठ गांवों में दर्जनों मकान जला दिए गए, जिसके बाद बड़े पैमाने पर नागरिक विस्थापित हुए। इस गंभीर संकट को लेकर फॉर्मर एंड सीनियर लीडर्स फोरम ऑफ जेलियांग्रॉन्ग सिविल ऑर्गेनाइजेशन्स के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा।

हमले के खौफ से खाली हुए कई गांव

ज्ञापन के विवरण के अनुसार, लगातार बढ़ते तनाव और नए हमलों की आशंका के चलते सेमपात नागा, गैदुनलुआंग और चामरीपेउ जैसी बस्तियों के बाशिंदे अपने घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। नागरिक संगठन ने बताया कि नागा और कुकी समुदायों के बीच गहराते तनाव ने आम लोगों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। हाल के दिनों में कामजोंग जिले में आम नागरिकों की जान जाने की घटनाओं ने इस असुरक्षा और दहशत को और ज्यादा बढ़ा दिया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीण भारी दहशत में जीवन बिता रहे हैं।

ये भी पढ़ें

आधिकारिक पहचान और राहत की मांग

जेलियांग्रॉन्ग नेताओं ने प्रशासन से अपील की है कि बेघर हुए इन सभी परिवारों को औपचारिक रूप से आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही सरकार से मांग की गई है कि नियमों के तहत मिलने वाली सभी मानक राहत सुविधाएं इन विस्थापितों तक तुरंत पहुंचाई जाएं। फोरम ने कोंसाराम और चवांग्किनिंग जैसे सीमांत गांवों को बेहद संवेदनशील करार देते हुए स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

नेशनल हाईवे 37 पर सुरक्षा का पुख्ता खाका

नागरिक प्रतिनिधियों ने इंफाल-जिरीबाम कॉरिडोर यानी नेशनल हाईवे 37 पर सुरक्षा इंतजाम कड़े करने को सबसे प्राथमिक जरूरत बताया है। आम जनता के आवागमन के लिए बेहद अहम इस मार्ग पर सोमवार से शनिवार तक नागरिक वाहनों को सुरक्षा एस्कॉर्ट मुहैया कराने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसके लिए कैथेलमनबी और टुपुल बाजार को ठहराव केंद्र बनाया जा सकता है। इसके विकल्प के रूप में हाईवे पर रोजाना 11 घंटे लगातार सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनाए रखने की मांग भी रखी गई है।

ऐतिहासिक संदर्भ और सीमा पुनर्गठन की अपील

ज्ञापन में 1994 के कुकी-नागा संघर्ष के दौरान हुए एक दर्दनाक वाकये की याद दिलाई गई, जब एक यात्री बस पर उग्रवादी हमले में 40 आम नागरिक मारे गए थे। संगठन ने इसी ऐतिहासिक घटना का हवाला देते हुए हाईवे पर कड़ी चौकसी को जरूरी बताया। इसके साथ ही, नागा और कुकी समुदायों के बीच जमीन तथा प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से जुड़े पुराने विवादों के स्थायी समाधान के लिए अंतर-जिला सीमाओं के पुनर्गठन की मांग भी उठाई गई है, ताकि इलाके में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता कायम हो सके।

सवाल-जवाब

मणिपुर के किन जिलों में घर जलाए जाने की घटनाएं हुई हैं?
नोनी, तमेंगलांग और कांगपोकपी जिलों के कम से कम आठ गांवों में दर्जनों घर जलाए गए हैं।
इस घटना में कितने परिवार बेघर हुए हैं?
आगजनी और हमलों के डर से 200 से अधिक नागा परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है।
नागरिक फोरम ने राज्यपाल से क्या प्रमुख मांगें की हैं?
फोरम ने विस्थापितों को आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों का दर्जा देने, राहत सामग्री पहुंचाने, गांवों में सुरक्षा बल तैनात करने और नेशनल हाईवे 37 पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
नेशनल हाईवे 37 को लेकर क्या सुरक्षा प्रस्ताव दिया गया है?
सोमवार से शनिवार तक वाहनों को सुरक्षा एस्कॉर्ट देने या हाईवे पर प्रतिदिन 11 घंटे सुरक्षा बल तैनात रखने का सुझाव दिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 दिन पहले

अजय कुमार भल्ला के पास जब ऐसे मामले पहुँच रहे हैं, तो साफ है कि प्रशासन के निचले स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही है। नेशनल हाईवे 37 पर सुरक्षा एस्कॉर्ट की मांग इसलिए उठानी पड़ रही है क्योंकि लोगों का सफर करना तक मुश्किल हो गया है।

Vikram Yadav@vikram-yadav·25 दिन पहले

अर्जुन जी, बिल्कुल सही कहा। जब राज्यपाल तक गुहार लगानी पड़े, तो समझ लीजिए ज़मीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।

Meera Joshi@meera-joshi·25 दिन पहले

अपने ही घरों से बेघर होकर इन परिवारों का इस तरह शरणार्थी बनना दिल दहला देने वाला है। इन लोगों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति इस समय क्या होगी, कोई सोच सकता है? क्या सरकार इनके लिए सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित रहेगी या इनकी सुरक्षा का कोई स्थायी समाधान भी निकालेगी?

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

पूर्वांचल में जातीय तनाव की कई खबरें कवर की हैं, लेकिन इस तरह घरों का जलना और लोगों का यूं बेघर होना वाकई दहला देने वाला है।

Ravikash Gupta@ravikash·25 दिन पहले

रोहन भाई, बात सही है पर 1994 के कुकी-नागा संघर्ष वाली बात का ज़िक्र इस मामले में थोड़ा पुराना नहीं लगता? क्या इससे सचमुच हाईवे की सुरक्षा पर कोई फ़र्क पड़ेगा?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp