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मणिपुर में एनआरसी की मांग को लेकर 24 घंटे का बंद, पांच घाटी जिलों में ठप हुआ जनजीवनमणिपुर
1 सित॰ 2026, 2:25 pm (56 दिन पहले)· 3

मणिपुर में एनआरसी की मांग को लेकर 24 घंटे का बंद, पांच घाटी जिलों में ठप हुआ जनजीवन

मणिपुर की पांच घाटी जिलों में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को 24 घंटे का बंद रखा गया, जिससे बाजार, स्कूल और परिवहन पूरी तरह प्रभावित रहे।

मणिपुर के पांच घाटी जिलों में मंगलवार को 24 घंटे का एक राज्यव्यापी बंद पूरी तरह असरदार रहा, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जनगणना शुरू होने से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस यानी एनआरसी को अपडेट करने की पुरजोर मांग करना था। इस शटडाउन का प्रभाव इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग जिलों में साफ तौर पर देखा गया। सुबह से ही सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन के साधन नजर नहीं आए और निजी वाहनों की आवाजाही भी बेहद सीमित रही।

दुकानें, बाजार और तमाम व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरे दिन पूरी तरह बंद रहे, जबकि शिक्षण संस्थान भी नहीं खुले। थौबल जिले के याइरीपोक इलाके में बंद समर्थकों ने वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए सड़कों पर बांस के खंभे लगा दिए थे। यह विरोध प्रदर्शन तब भी जारी रखा गया जब केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना प्रक्रिया को टालने का फैसला किया था, जिसकी शुरुआत 1 सितंबर से होनी थी। राज्य सरकार ने इस फैसले के बाद कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन यानी जेएफडी से इस आंदोलन को वापस लेने की अपील की थी।

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औपचारिक आदेश न मिलने पर अड़ा रहा संगठन

हालांकि, इस संगठन ने सोमवार देर रात जारी एक बयान में साफ कर दिया कि वह इस शटडाउन को जारी रखेगा क्योंकि सरकार की तरफ से स्थगन की पुष्टि करने वाला कोई औपचारिक आदेश सामने नहीं आया था। जनगणना टालने का यह निर्णय नई दिल्ली में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया था, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर की स्थिति की समीक्षा करने के लिए की थी। मुख्यमंत्री सचिवालय के अनुसार, बैठक के दौरान राज्य में एनआरसी लागू होने तक जनगणना स्थगित रखने की मांग पर विस्तार से चर्चा की गई थी।

इस महत्वपूर्ण बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री सिंह ने राज्य के लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया था। मुख्यमंत्री सचिवालय के एक बयान के अनुसार, उन्होंने इस मांग को आगे बढ़ाने में निरंतर सहयोग के लिए भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का भी आभार जताया।

प्रशासनिक अपील और केंद्र का फैसला

इससे पहले, राज्य के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने केंद्र सरकार द्वारा जनगणना अभ्यास स्थगित किए जाने के बाद जेएफडी से हड़ताल वापस लेने का आग्रह किया था। अधिकारियों की तमाम अपीलों के बावजूद संगठन अपनी जिद पर कायम रहा क्योंकि उसे केंद्र के मौखिक आश्वासन के बजाय लिखित और औपचारिक आदेश की दरकार थी। इस बीच, क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके।

स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को इस अचानक बुलाए गए बंद के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने वाली बसें और ऑटोरिक्शा पूरी तरह से सड़कों से नदारद रहे। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थिति को सामान्य करने के लिए संबंधित संगठनों के साथ बातचीत के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह के व्यवधानों से बचा जा सके।

सवाल-जवाब

मणिपुर में यह बंद कितने घंटे तक जारी रहा?
यह बंद पूरे 24 घंटे तक प्रभावी रहा।
यह बंद किन जिलों में आयोजित किया गया था?
यह बंद इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग जिलों में आयोजित किया गया।
इस बंद का मुख्य कारण क्या था?
यह बंद जनगणना शुरू होने से पहले एनआरसी लागू करने की मांग को लेकर बुलाया गया था।
इस बंद का आह्वान किसने किया था?
इस शटडाउन का आह्वान कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन ने किया था।
क्या केंद्र सरकार ने इस पर कोई कदम उठाया था?
केंद्र सरकार ने मणिपुर में 1 सितंबर से शुरू होने वाली जनगणना को टालने का फैसला किया था।
नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता किसने की थी?
इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी।
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