दैनिक राशिफल 28 अक्टूबर: जानिए मेष से मीन राशि तक सभी जातकों के लिए कैसा रहेगा कल का दिनलिंकन में आकिब नबी की घातक स्विंग, चौथे दिन संकट में फंसी कीवी टीमसर्दियों में गाय और भैंस से चाहिए ज्यादा दूध, तो अभी से शुरू कर लें ये खास तैयारियांमहाराष्ट्र की पारंपरिक पूरन पोली: त्योहारों की मिठास और संस्कृति का अनूठा प्रतीक1 नवंबर को कर्क राशि में सजेगा चंद्र-मंगल योग, इन चार राशियों के जीवन में बरसेगी धन-दौलतलाइव: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार और एसआईआर के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, राहुल गांधी और कर्नाटक मतदाता सूची अपडेटकरवा चौथ के मौके पर झटपट और लंबे समय तक टिकने वाला मेकअप चाहिए? ये 7 बेहतरीन किट्स बचाएंगी समय, कीमत मात्र ₹270 से शुरूकृति सेनन और वरुण धवन फिर मचाएंगे धमाल, अमर कौशिक संग अचानक मुलाकात ने बढ़ाई 'भेड़िया 2' की उम्मीदेंकिस्मत के भरोसे नहीं बैठते इन 3 राशियों के लोग, मेहनत और लगन से खुद लिखते हैं अपनी तकदीरनितेश तिवारी की रामायण में शत्रुघ्न बने नितीश शर्मा, शार्प फीचर्स देख कार्तिक आर्यन से होने लगी तुलना
मणिपुर में गहराया बिजली का संकट, राज्यभर में शुरू हुई रोटेशनल बिजली कटौतीमणिपुर
16 सित॰ 2026, 10:36 pm (41 दिन पहले)· 1

मणिपुर में गहराया बिजली का संकट, राज्यभर में शुरू हुई रोटेशनल बिजली कटौती

मणिपुर में 90 MW बिजली की भारी कमी के चलते राज्यभर में अस्थायी रोटेशनल पावर कट लागू कर दिए गए हैं।

मणिपुर में बिजली की भारी किल्लत के चलते प्रशासन ने पूरे राज्य में अस्थायी तौर पर रोटेशनल बिजली कटौती लागू करने का फैसला किया है। मणिपुर स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने बुधवार को इस बात की जानकारी दी कि राज्य में मौजूदा समय में लगभग 90 MW बिजली की कमी बनी हुई है। बिजली बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में उनके पास केवल 180 MW बिजली की उपलब्धता है, जबकि राज्य में पीक आवर्स के दौरान कुल मांग 270 MW तक पहुंच जाती है। मांग और आपूर्ति के बीच के इस बड़े अंतर को पाटने के लिए यह कदम उठाना पड़ा है ताकि ट्रांसमिशन ग्रिड सुरक्षित रह सके।

कम बारिश और कोयले की किल्लत बनी बड़ी वजह

बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक एम. रवि सिंह की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यह समस्या केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य हिस्से भी इसी तरह के बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। हालांकि राज्य के पास बिजली खरीदने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है, फिर भी बाजार में पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है। इस संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें कम बारिश के कारण जलविद्युत उत्पादन में आई भारी गिरावट भी शामिल है। इसके अलावा, अल नीनो मौसम पैटर्न की अनियमितताओं ने भी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

ये भी पढ़ें

कोयला संकट और बाजार में बिजली की सीमित उपलब्धता

जलविद्युत के साथ-साथ थर्मल पावर यानी तापीय विद्युत उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसकी मुख्य वजह कोयले के भंडारण और उसकी आपूर्ति में आने वाली रुकावटें हैं। ऊर्जा बाजार में बिजली की सीमित उपलब्धता ने इस स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। वितरण कंपनी का यह भी कहना है कि ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और पूरे सिस्टम को पूरी तरह ठप होने से बचाने के लिए यह कटौती एक जरूरी उपाय बन गई थी।

स्थिति से निपटने के लिए प्रयास जारी

वितरण कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "यह ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए एक आवश्यक उपाय है।" अधिकारियों का यह भी कहना है कि राज्य सरकार के साथ मिलकर लगातार ऐसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है जिससे बिजली कटौती के समय को कम किया जा सके और जल्द से जल्द स्थिति को सामान्य बनाया जा सके। देश भर में चल रहे इस व्यापक ऊर्जा संकट के बीच राज्य प्रशासन सामान्य आपूर्ति बहाल करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

सवाल-जवाब

मणिपुर में बिजली की कितनी कमी है?
राज्य में वर्तमान में 90 MW बिजली की कमी है।
राज्य में बिजली की कुल मांग और आपूर्ति कितनी है?
राज्य की पीक डिमांड 270 MW है जबकि उपलब्ध बिजली केवल 180 MW है।
बिजली कटौती क्यों लागू की गई है?
ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और बिजली की आपूर्ति की गंभीर कमी से निपटने के लिए यह कदम उठाया गया है।
जलविद्युत उत्पादन कम होने का क्या कारण है?
अपर्याप्त बारिश और अल नीनो मौसम पैटर्न के कारण जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है।
इस संकट के लिए कौन सी कंपनी जिम्मेदार है?
मणिपुर स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड इस स्थिति को प्रबंधित कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·40 दिन पहले

मणिपुर में 90 मेगावाट की यह कमी और रोटेशनल कटौती सिर्फ क्षेत्रीय समस्या नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के बीच गहरे होते संकट को दर्शाती है। जैसा कि इस रिपोर्ट में बताया गया है, कम बारिश और अल नीनो जैसे मौसमी कारकों के कारण जलविद्युत उत्पादन में आई गिरावट सीधे तौर पर थर्मल सेक्टर पर निर्भरता बढ़ाती है। ऐसे में, जब कोयले की आपूर्ति बाधित होती है और खुले बाजार में बिजली उपलब्ध नहीं होती, तब ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए इस तरह के आपातकालीन कदम उठाने ही पड़ते हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि भविष्य में स्थानीय ग्रिडों को अधिक लचीला बनाने और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कितनी आवश्यकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·40 दिन पहले

मणिपुर में 90 मेगावाट की यह बिजली कमी केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के ऊर्जा ढांचे की उस कमजोरी को उजागर करती है जहाँ जलवायु परिवर्तन और मौसम चक्र में बदलाव हाइड्रो पावर और थर्मल सेक्टर दोनों को एक साथ प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि राज्य के पास वित्तीय संसाधन हैं, ऊर्जा बाजार में उपलब्धता की यह कमी इस बात का संकेत है कि निकट भविष्य में उद्योगों, स्टार्टअप्स और स्थानीय वित्तीय गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे त्वरित और दीर्घकालिक ऊर्जा प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

Vikram Yadav@vikram-yadav·40 दिन पहले

रविकाश की बात को आगे बढ़ाते हुए, 270 मेगावाट की पीक मांग के मुकाबले 90 मेगावाट की यह कमी ग्रिड सुरक्षा के लिए भले ही तात्कालिक उपाय हो, लेकिन इसका सीधा असर आवश्यक सेवाओं और आम जनजीवन पर पड़ेगा। जब बाजार में पैसे होने के बावजूद बिजली नहीं मिलती, तो यह आपूर्ति श्रृंखला की गहरी विफलता है। यदि अल नीनो और कोयले की कमी से उपजा यह संकट जल्द नहीं सुलझाया गया, तो राज्य का प्रशासनिक कामकाज और आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह ठप हो सकती हैं, जिसके लिए मजबूत दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।

Rohan Verma@rohan-verma·40 दिन पहले

मणिपुर में 90 मेगावाट की यह कमी और 270 मेगावाट तक पहुंचती मांग दर्शाती है कि जलविद्युत और थर्मल पावर दोनों मोर्चों पर एक साथ संकट आना ग्रिड के लिए गंभीर खतरा है। हालांकि प्रशासन बाजार से बिजली खरीदने के लिए धन होने का दावा कर रहा है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कमी और अल नीनो के कारण हाइड्रो उत्पादन में आई गिरावट यह बताती है कि आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को लंबी कटौती और आवश्यक सेवाओं पर इसके दूरगामी प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 दिन पहले

यह ऊर्जा संकट केवल तकनीकी या मौसम जनित नहीं है, बल्कि यह देश के बुनियादी ढांचे की उस कमजोरी को उजागर करता है जहां राज्य वित्तीय रूप से सक्षम होने के बावजूद खुले बाजार से बिजली नहीं खरीद पा रहे हैं। पीक आवर्स में 270 मेगावाट की मांग और ग्रिड स्थिरता बनाए रखने की मजबूरी ने राज्य प्रशासन के सामने नीतिगत और प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यदि कोयला आपूर्ति श्रृंखला और तापीय उत्पादन में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह स्थिति औद्योगिक उत्पादन के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं को भी बुरी तरह प्रभावित करेगी, जिससे सरकार को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर नए सिरे से विचार करना होगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp