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मणिपुर में पीएमएफएमई योजना के तहत 2835 लाभार्थियों को मिली वित्तीय मददमणिपुर
17 सित॰ 2026, 11:41 pm (40 दिन पहले)· 0

मणिपुर में पीएमएफएमई योजना के तहत 2835 लाभार्थियों को मिली वित्तीय मदद

मणिपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने पीएमएफएमई योजना के तहत 2835 लाभार्थियों को सब्सिडी वितरित की।

मणिपुर में छोटे और असंगठित खाद्य प्रसंस्करण व्यवसायों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज यानी पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत कुल 2,835 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता और सब्सिडी वितरित की है। इस योजना के माध्यम से इन उद्यमों को आधुनिक बनाने, उनके कामकाज का विस्तार करने और उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने में मदद मिलेगी।

विशेष कार्यक्रम और वितरण की प्रक्रिया

यह कार्यक्रम इंफाल के युमनाम लेइकाई युमजाओ लैरेम्बी लैम्पक में आयोजित किया गया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर विशेष रूप से आयोजित किया गया था। इस समारोह के दौरान कुछ चयनित लाभार्थियों को अपने हाथों से चेक सौंपे गए, जबकि बाकी सभी पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए सब्सिडी की राशि सीधे भेज दी गई।

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सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को मिली पहली किस्त

इस वितरण अभियान के तहत, खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों से जुड़ी सेल्फ हेल्प ग्रुप्स यानी एसएचजी की प्रत्येक महिला सदस्य को पहली किस्त के रूप में 5,000 रुपये की राशि प्रदान की गई है। इन सभी समूहों ने साल 2022 से 2024 के बीच इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। केंद्र सरकार की ओर से इस योजना के लिए फंड पहले ही जारी कर दिया गया था, जिसके बाद एरिया लेवल फेडरेशन ने पात्र लाभार्थियों के बीच इस राशि के वितरण का निर्णय लिया था।

नेतृत्व की सराहना और शांति की अपील

समारोह को संबोधित करते हुए युमनाम खेमचंद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के लंबे सार्वजनिक जीवन और बिना एक भी दिन आराम किए देश सेवा में उनके अटूट समर्पण की खुलकर प्रशंसा की। इसके साथ ही, उन्होंने मणिपुर के मौजूदा हालातों पर भी चिंता जताई और राज्य में स्थायी शांति तथा सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सभी समुदायों से आपसी एकता बनाए रखने की अपील की।

बंद और नाकेबंदी से दूर रहने का आग्रह

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से स्पष्ट रूप से आग्रह किया कि वे राज्य में किसी भी तरह के बंद और नाकेबंदी जैसे व्यवधानों से पूरी तरह दूर रहें। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों के लोगों के बीच आपसी सौहार्द और समझ के बंधन धीरे-धीरे मजबूत हो रहे हैं, इसलिए सभी को मिलकर शांति और सामान्य जीवन को वापस पटरी पर लाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है ताकि राज्य में स्थायी शांति कायम हो सके।

सवाल-जवाब

मणिपुर में कितने लाभार्थियों को पीएमएफएमई योजना के तहत सहायता मिली है?
मणिपुर में कुल 2,835 लाभार्थियों को इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
इस सहायता राशि का वितरण कहाँ किया गया था?
यह वितरण इंफाल के युमनाम लेइकाई युमजाओ लैरेम्बी लैम्पक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया गया।
स्वयं सहायता समूहों की प्रत्येक सदस्य को कितनी पहली किस्त मिली है?
खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों से जुड़े एसएचजी की प्रत्येक महिला सदस्य को पहली किस्त के तौर पर 5,000 रुपये मिले हैं।
योजना के तहत लाभार्थियों को पैसे कैसे मिले?
कुछ लोगों को मंच पर चेक सौंपे गए, जबकि शेष लाभार्थियों को डीबीटी के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में राशि भेजी गई।
लाभार्थियों ने इस सहायता के लिए कब आवेदन किया था?
इन लाभार्थियों ने वर्ष 2022 से 2024 के बीच इस योजना के लिए आवेदन किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·39 दिन पहले

मणिपुर में पीएमएफएमई योजना के तहत 2,835 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता मिलना और महिला स्वयं सहायता समूहों को पहली किस्त जारी होना स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण और आजीविका के लिए सकारात्मक कदम है। पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से, राज्य की समृद्ध पारंपरिक खान-पान शैली और स्थानीय व्यंजनों को इस आर्थिक सुदृढ़ीकरण से राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिलने की अपार संभावनाएं हैं, बशर्ते क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।

Ravikash Gupta@ravikash·39 दिन पहले

मणिपुर में पीएमएफएमई योजना के तहत 2835 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से वित्तीय सहायता मिलना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है। खासकर महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को पहली किस्त मिलने से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे और उपभोग मांग को समर्थन मिलेगा। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा बंद और नाकेबंदी से दूर रहने की अपील यह दर्शाती है कि राज्य में आर्थिक विकास की गति बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखलाओं में स्थिरता लाना और स्थायी शांति स्थापित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है।

Vikram Yadav@vikram-yadav·39 दिन पहले

विक्रम यादव के अनुसार, मणिपुर जैसे संघर्ष-प्रभावित क्षेत्र में आर्थिक पहलों की सफलता पूरी तरह से कानून-व्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता पर निर्भर करती है। जब तक नाकेबंदियों और बंद जैसी बाधाओं पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगेगा, तब तक डीबीटी और एसएचजी के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय मदद का जमीनी स्तर पर दीर्घकालिक प्रभाव दिखना मुश्किल होगा। राज्य के आर्थिक सुधार और ग्रामीण उद्यमिता के लिए यह जरूरी है कि प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द भी मजबूत हो।

Rohan Verma@rohan-verma·39 दिन पहले

मणिपुर जैसे अशांत क्षेत्र में पीएमएफएमई योजना के तहत 2,835 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को डीबीटी के माध्यम से शुरुआती किस्त मिलना आर्थिक मोर्चे पर एक सकारात्मक कदम है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों की जमीनी रिपोर्टिंग के दौरान हमने देखा है कि जब सरकारी योजनाएं बिना बिचौलियों के सीधे खातों में पहुंचती हैं, तो ग्रामीण आजीविका को संबल मिलता है। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा बंद और नाकेबंदी से दूर रहने की अपील यह दर्शाती है कि राज्य में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की बहाली के लिए स्थायी शांति और प्रशासनिक स्थिरता सबसे अनिवार्य शर्त है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·39 दिन पहले

सहकर्मी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह वित्तीय सहायता तब और अधिक प्रभावी होगी जब जिला स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए तकनीकी सहायता और विपणन (मार्केटिंग) लिंकेज मजबूत किए जाएंगे। जब तक स्थानीय उत्पादों को राज्य से बाहर और राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच नहीं मिलती, तब तक सूक्ष्म उद्यमों का औपचारिक अर्थव्यवस्था में पूर्ण संक्रमण अधूरा रहेगा। मुख्यमंत्री की शांति और नाकेबंदी-मुक्त राज्य की अपील इस बात का स्पष्ट भू-राजनीतिक संकेत है कि सुरक्षा और आर्थिक सुधार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

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