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मयूर विहार से एम्स का सफर होगा आसान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बारापुल्ला फेज-3 और मुकरबा चौक अंडरपास की शुरुआत कीभारत
30 सित॰ 2026, 10:48 pm (29 दिन पहले)· 0

मयूर विहार से एम्स का सफर होगा आसान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बारापुल्ला फेज-3 और मुकरबा चौक अंडरपास की शुरुआत की

दिल्ली में सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 के बीच तैयार बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर और मुकरबा चौक अंडरपास का उद्घाटन हो गया है, जिससे व्यस्त घंटों में करीब 20 से 25 मिनट की बचत होगी।

देश की राजधानी में यातायात को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर और मुकरबा चौक अंडरपास का आधिकारिक शुभारंभ कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को इन दोनों अहम आधारभूत ढांचा परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इस एलिवेटेड मार्ग के चालू हो जाने के बाद अब पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के मध्य रोजाना आने-जाने वाले वाहन चालकों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी। सबसे खास पहलू यह है कि मयूर विहार से लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तक का लगभग 10 किलोमीटर लंबा रास्ता अब पूरी तरह सिग्नल-मुक्त हो चुका है।

सराय काले खां से मयूर विहार के बीच छह लेन का नया ढांचा

बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का मुख्य विस्तार सराय काले खां और मयूर विहार फेज-1 के बीच तैयार किया गया है। तकनीकी रूप से इस मुख्य एलिवेटेड स्ट्रेच की लंबाई 3.5 किलोमीटर है, जबकि प्रवेश और निकास के लिए बनाए गए विभिन्न रैंप और लूप्स को शामिल करने के बाद इसकी कुल प्रभावी लंबाई लगभग 4.9 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। समग्र कॉरिडोर को छह लेन की क्षमता के साथ तैयार किया गया है, जिसमें दोनों दिशाओं में सुगम आवागमन के लिए तीन-तीन लेन निर्धारित की गई हैं। आधुनिक शहरी परिवहन की जरूरतों को देखते हुए इसे केवल चार पहिया और दो पहिया वाहनों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ और पर्यावरण हितैषी आवाजाही के लिए अलग साइकिल ट्रैक का प्रावधान भी किया गया है।

व्यस्त घंटों में 20 से 25 मिनट की बचत और सिग्नल-फ्री आवागमन

इस एलिवेटेड मार्ग के शुरू होने से मयूर विहार फेज-1 के साथ-साथ नोएडा की दिशा से एम्स की ओर जाने वाले दैनिक यात्रियों को करीब 10 किलोमीटर के दायरे में एक भी लाल बत्ती का सामना नहीं करना पड़ेगा। अब तक रिंग रोड और आसपास के चौराहों पर लगने वाले भारी जाम के कारण लोगों का काफी समय बर्बाद होता था। नए कॉरिडोर के जरिए पीक आवर्स के दौरान यात्रियों के सफर में करीब 20 से 25 मिनट की सीधी बचत होने का आकलन किया गया है। इसके अतिरिक्त, जो लोग आईएनए मार्केट, दिल्ली हाट अथवा आईआईटी दिल्ली की तरफ नियमित यात्रा करते हैं, उन्हें भी इस बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा।

लंबे इंतजार के बाद दूर हुईं तकनीकी बाधाएं

लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार, इस बुनियादी ढांचे के निर्माण का सिलसिला लगभग 11 वर्षों से चल रहा था। सरकार के गठन के उपरांत मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति और अटके हुए कार्यों का तकनीकी मुआयना किया गया। इस पूरी परियोजना की प्रगति में कई अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOC) और अंतर-विभागीय अनुमतियों के पेंच फंसे हुए थे, जिनकी वजह से काम लंबे समय तक धीमा रहा। तमाम वैधानिक मंजूरियों और स्वीकृतियों को प्राथमिकता पर निपटाने के बाद ही निर्माण गति को तेज किया गया और परियोजना को पूरा किया जा सका।

राजधानी के समग्र संपर्क तंत्र को नई मजबूती

मुकरबा चौक अंडरपास और बारापुल्ला कॉरिडोर के संयुक्त रूप से जुड़ने से दिल्ली के कई प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक केंद्रों के बीच सीधी कनेक्टिविटी स्थापित हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी निर्माण कार्य को मुकाम तक पहुंचाने के लिए इंजीनियरों, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित महकमों के सतत प्रयासों की सराहना की। इस नए मार्ग से गुजरने वाले हजारों कामकाजी लोगों को दैनिक आवाजाही में ईंधन और समय दोनों की बचत होगी, साथ ही आसपास के पारंपरिक मुख्य मार्गों पर भी वाहनों के अतिरिक्त दबाव में उल्लेखनीय कमी आएगी।

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सवाल-जवाब

बारापुल्ला फेज-3 कॉरिडोर और मुकरबा चौक अंडरपास का उद्घाटन किसने किया?
इन दोनों बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को किया।
बारापुल्ला फेज-3 कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी है?
इसकी मुख्य एलिवेटेड लंबाई 3.5 किलोमीटर है, जबकि सभी रैंप और लूप्स को मिलाकर कुल लंबाई लगभग 4.9 किलोमीटर है।
इस कॉरिडोर के खुलने से यात्रियों को कितने समय की बचत होगी?
व्यस्त समय में मयूर विहार से एम्स और दक्षिणी दिल्ली की ओर सफर करने वाले लोगों के करीब 20 से 25 मिनट बचेंगे।
मयूर विहार फेज-1 से एम्स तक कितना रास्ता सिग्नल-फ्री हुआ है?
इस कॉरिडोर के शुरू होने से मयूर विहार फेज-1 और नोएडा से एम्स तक करीब 10 किलोमीटर का मार्ग पूरी तरह सिग्नल-फ्री हो गया है।
इस परियोजना के निर्माण में कितना समय लगा और देरी की वजह क्या थी?
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार इसका निर्माण करीब 11 साल चला, जिसमें विभिन्न विभागों से एनओसी और जरूरी अनुमतियों के लंबित होने से देरी हुई।
क्या इस कॉरिडोर पर पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए कोई सुविधा है?
हां, छह लेन के इस वाहन मार्ग पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ और साइकिल चालकों के लिए अलग ट्रैक की सुविधा दी गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·29 दिन पहले

मई-जून में नोएडा से एम्स जाते हुए इस रिंग रोड के जाम में पसीने छूट जाते थे। ग्यारह साल बाद ही सही, पर अब राहत मिल जाएगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

एम्स से मयूर विहार का यह रास्ता कितना सुधरा है, कल ही खुद गाड़ी निकालकर देखा। सच में पच्चीस मिनट बच गए, वरना पहले रोज रिंग रोड पर फंसकर दिमाग खराब होता था।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·29 दिन पहले

अर्जुन भाई, सच में पच्चीस मिनट बचना बहुत बड़ी राहत है! क्या बाकी अधूरे रैंप भी इसी साल चालू होंगे?

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

11 साल लग गए इस प्रोजेक्ट को बनने में, अब जाकर राहत मिली है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

रोहन भाई, 11 साल में तो पूरा नक्शा बदल जाता है। क्या ये देरी सिर्फ कागजी एनओसी की वजह से थी या इसमें ठेकेदारों की लापरवाही भी थी?

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