मिजोरम में साल 2025 के दौरान दर्ज की गई चिकित्सीय रूप से प्रमाणित मौतों में सांस संबंधी बीमारियां सबसे प्रमुख कारण बनकर सामने आई हैं। राज्य में कुल प्रमाणित मौतों में से 17.3 प्रतिशत मौतें सांस की गंभीर बीमारियों की वजह से हुईं, जबकि 15 प्रतिशत मौतों के साथ पाचन संबंधी विकार दूसरे सबसे बड़े कारण के रूप में दर्ज किए गए।
मृत्यु के प्रमुख कारणों का आधिकारिक ब्योरा
अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में जन्म और मृत्यु के मुख्य रजिस्ट्रार सह आयुक्त और सचिव वनलालदीना फनई द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ 2025 जारी किया गया। इस आधिकारिक संकलन में रक्त परिसंचरण तंत्र से जुड़ी बीमारियों को मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण बताया गया है, जो कुल प्रमाणित मामलों का 13.7 प्रतिशत थीं। इसके अलावा संक्रामक और परजीवी जनित बीमारियों के कारण 12.2 प्रतिशत मौतें हुईं, जबकि नियोप्लाज्म यानी कैंसर ने 11 प्रतिशत जान लीं।
मरीजों के आंकड़े और लिंग आधारित विवरण
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सांस से जुड़ी बीमारियों के चलते कुल 721 लोगों की जान गई, जिनमें 268 महिलाएं शामिल थीं। इसी समय अवधि में पाचन तंत्र की बीमारियों के कारण 613 लोगों ने दम तोड़ दिया। राज्य में इस अवधि के दौरान कुल 4,146 चिकित्सीय रूप से प्रमाणित मौतें दर्ज की गईं, जो वर्ष 2024 में दर्ज की गई 4,329 मौतों की तुलना में कम हैं।
जिलों में मौतों की स्थिति
मिजोरम के विभिन्न जिलों के विश्लेषण से पता चलता है कि आइजोल में सबसे अधिक 2,664 चिकित्सीय रूप से प्रमाणित मौतें दर्ज हुईं। इसके बाद लुंगलेई जिले में 350 और कोलासिब जिले में 282 प्रमाणित मौतें दर्ज की गईं।
























