उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित प्रसिद्ध मां विंध्यवासिनी धाम में अब परिसर के भीतर निजी सामान और उपकरणों के इस्तेमाल पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके तहत कोई भी तीर्थ पुरोहित या पंडा समाज का सदस्य अब कॉरिडोर क्षेत्र में अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की निजी वस्तु या उपकरण स्थापित नहीं कर सकेगा। यह नया नियम हाल ही में हुई एक घटना के बाद सामने आया है, जिसमें दो तीर्थ पुरोहितों के बीच आपस में मारपीट हो गई थी। इस झड़प का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया था। जब इस वायरल वीडियो की प्रशासनिक स्तर पर जांच की गई, तो यह बात खुलकर सामने आई कि पूरी घटना की रिकॉर्डिंग एक निजी कैमरे के जरिए की गई थी और वहीं से इसे सार्वजनिक रूप से प्रसारित किया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और विंध्य पंडा समाज के प्रतिनिधियों के बीच एक अहम बैठक बुलाई गई, जिसके बाद सभी अनधिकृत निजी कैमरों को तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि भविष्य में किसी भी व्यक्ति द्वारा ऐसी निजी वस्तुएं लगाई गईं, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था और एआई कैमरों का पहरा
मां विंध्यवासिनी धाम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन लगातार पूरी तरह सतर्क और चौकस नजर आ रहा है। मंदिर परिसर की सुरक्षा को और अधिक मजबूत तथा चाक-चौबंद बनाने के लिए वहां आधुनिक एआई कैमरे पहले से ही स्थापित किए गए हैं। इन कैमरों की निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन के लिए 175 से अधिक पुलिसकर्मी अलग-अलग चुस्त शिफ्टों में अपनी ड्यूटी निभाते हैं। हालांकि, जब विंध्यवासिनी धाम का नया कॉरिडोर बनकर तैयार हुआ, तो उसके आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने के नाम पर चुपचाप 5 निजी कैमरे लगा दिए गए थे। हैरानी की बात यह है कि इसकी भनक तक सुरक्षा में तैनात प्रशासन को नहीं लग पाई थी और इन निजी कैमरों के माध्यम से मंदिर परिसर की तमाम गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इस कॉरिडोर को बने हुए करीब तीन साल का लंबा समय बीत चुका है और इस दौरान देश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के गृहमंत्री तक इस धाम का दौरा कर चुके हैं। इसके बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या व्यक्ति की नजर इन गुप्त रूप से लगे निजी कैमरों पर नहीं पड़ी थी। आखिरकार, जब कॉरिडोर परिसर के अंदर पंडा समाज के लोगों के बीच मारपीट की घटना हुई और उसकी जांच गहराई से की गई, तब जाकर इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। प्रशासन ने स्थिति की नजाकत को समझते हुए बिना किसी देरी के आनन-फानन में सभी निजी कैमरों को वहां से हटवा दिया।
प्रशासन और पंडा समाज की बैठक में कड़े फैसले
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारियों और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में आपसी विचार-विमर्श के बाद यह कड़ाई से निर्णय लिया गया कि मंदिर या कॉरिडोर परिसर के भीतर भविष्य में किसी भी प्रकार की निजी वस्तु या उपकरण लगाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। इस संबंध में जानकारी देते हुए नगर मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार ने स्पष्ट किया कि कॉरिडोर परिसर के अंदर किसी भी तरह की निजी वस्तुओं का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा और यह फैसला प्रशासनिक बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति इस नए नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पं. पंकज द्विवेदी ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि समाज के सभी तीर्थ पुरोहितों और सदस्यों को इसके लिए कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि वे मंदिर तथा कॉरिडोर परिसर में कोई भी निजी सामान न लगाएं। उन्होंने पुष्टि की कि जितने भी निजी सामान या कैमरे पूर्व में लगाए गए थे, उन सभी को अब पूरी तरह से हटा दिया गया है। अध्यक्ष ने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसे लेकर विंध्य पंडा समाज और जिला प्रशासन के बीच पूरी तरह से आपसी सहमति बन चुकी है और सभी नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा।



















