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मिर्जापुर में अदवा बांध के खुले छह गेट, बाढ़ से दस गांवों की फसलें डूबीं और संपर्क कटाभारत
31 अग॰ 2026, 9:08 am (1 घंटे पहले)· 2

मिर्जापुर में अदवा बांध के खुले छह गेट, बाढ़ से दस गांवों की फसलें डूबीं और संपर्क कटा

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में अदवा बांध का जलस्तर बढ़ने से छह गेट खोल दिए गए हैं, जिससे कई नदियां उफान पर हैं और दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है।

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित अदवा बांध का जलस्तर बढ़ने के बाद इसके छह गेट खोल दिए गए हैं, जिसके चलते निचले इलाकों और तटीय क्षेत्रों में हालात गंभीर हो गए हैं। बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण क्षेत्र की कई छोटी और बड़ी नदियां उफान पर बह रही हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से लगभग दस से अधिक गांवों में किसानों की फसलें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं और भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बांध में लगातार बारिश का पानी तो आ ही रहा है, साथ ही बाणसागर नहर से भी लगातार पानी बांध में पहुंच रहा है। क्षमता से अधिक पानी जमा होने के कारण अधिकारियों को पानी डिस्चार्ज करना पड़ा है, जिससे अदवा नदी के साथ-साथ सुसुआड नदी भी खतरे के निशान के करीब बह रही है। इस बहाव की चपेट में आने से हलिया बाजार, बसूअरा और बेलन बरौधा समेत कई ग्रामीण इलाकों की फसलें जलमग्न हो चुकी हैं।

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जलस्तर बढ़ने के कारण कई महत्वपूर्ण रास्तों और रपटों के ऊपर से पानी बहने लगा है, जिससे कोटरनाथ मंदिर और गड़बड़ा धाम क्षेत्र समेत करीब बारह से चौदह गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों के तटवर्ती इलाकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और सभी जरूरी एहतियाती दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

क्षेत्र के एक स्थानीय निवासी भोला ने बताया कि बांध से पानी छोड़े जाने के बाद हर साल लगभग आधा दर्जन गांवों को सबसे अधिक मार झेलनी पड़ती है। पानी सीधे रिहायशी इलाकों और खेतों में घुस जाता है, जिससे आवागमन के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके कारण बांध से बार-बार पानी छोड़ना पड़ रहा है और ग्रामीण हर साल इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना करने को मजबूर होते हैं।

सवाल-जवाब

मिर्जापुर में किस बांध के गेट खोले गए हैं?
मिर्जापुर जिले में स्थित अदवा बांध के छह गेट खोले गए हैं।
बांध से पानी छोड़े जाने का मुख्य कारण क्या है?
लगातार हो रही बारिश और बाणसागर नहर से पानी आने के कारण बांध में क्षमता से अधिक पानी भर गया था।
कितने गांवों का संपर्क टूटा है?
रपटे और पुलों के ऊपर पानी बहने की वजह से करीब 12 से 14 गांवों का संपर्क टूट गया है।
कौन-कौन सी फसलें प्रभावित हुई हैं?
हलिया बाजार, बसूअरा और बेलन बरौधा सहित दस से ज्यादा गांवों में किसानों की फसलें जलमग्न हो गई हैं।
प्रशासन ने ग्रामीणों को क्या चेतावनी दी है?
प्रशासन ने ग्रामीणों से तटवर्ती इलाकों से दूरी बनाए रखने और सभी एहतियाती निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·58 मिनट पहले

अदवा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद उत्पन्न हुई यह स्थिति केवल एक मौसमी आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक तैयारियों और जल प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीतियों की भी परीक्षा है। जब तक बाणसागर नहर और स्थानीय जलग्रहण क्षेत्रों के भारी इनफ्लो के बीच बेहतर समन्वय नहीं होगा, तब तक हर साल तटीय गांवों और कृषि को भारी नुकसान से बचाना असंभव होगा। आगे के दिनों में यदि जल स्तर और बढ़ता है, तो राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए प्रशासन को अपनी प्रतिक्रिया का दायरा और आपातकालीन तंत्र दोनों को तत्काल और मजबूत करना होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·58 मिनट पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि इस प्रकार की मौसमी बाढ़ केवल कृषि और ग्रामीण जनजीवन को ही अस्त-व्यस्त नहीं करती, बल्कि स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को भी गहरा आघात पहुँचाती है। जब दर्जनों गांवों का संपर्क टूट जाता है और फसलें जलमग्न हो जाती हैं, तो किसानों की आय प्रभावित होने के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक चक्र भी बाधित होता है। यदि प्रशासन और नीति निर्माताओं ने जल प्रबंधन के मोर्चे पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस तरह की आपदाएं ग्रामीण इलाकों के वित्तीय ढांचे को कमजोर करती रहेंगी, जिससे भविष्य में राहत और पुनर्वास पर वित्तीय बोझ लगातार बढ़ता जाएगा।

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