उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित अदवा बांध का जलस्तर बढ़ने के बाद इसके छह गेट खोल दिए गए हैं, जिसके चलते निचले इलाकों और तटीय क्षेत्रों में हालात गंभीर हो गए हैं। बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण क्षेत्र की कई छोटी और बड़ी नदियां उफान पर बह रही हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से लगभग दस से अधिक गांवों में किसानों की फसलें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं और भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बांध में लगातार बारिश का पानी तो आ ही रहा है, साथ ही बाणसागर नहर से भी लगातार पानी बांध में पहुंच रहा है। क्षमता से अधिक पानी जमा होने के कारण अधिकारियों को पानी डिस्चार्ज करना पड़ा है, जिससे अदवा नदी के साथ-साथ सुसुआड नदी भी खतरे के निशान के करीब बह रही है। इस बहाव की चपेट में आने से हलिया बाजार, बसूअरा और बेलन बरौधा समेत कई ग्रामीण इलाकों की फसलें जलमग्न हो चुकी हैं।
जलस्तर बढ़ने के कारण कई महत्वपूर्ण रास्तों और रपटों के ऊपर से पानी बहने लगा है, जिससे कोटरनाथ मंदिर और गड़बड़ा धाम क्षेत्र समेत करीब बारह से चौदह गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों के तटवर्ती इलाकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और सभी जरूरी एहतियाती दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
क्षेत्र के एक स्थानीय निवासी भोला ने बताया कि बांध से पानी छोड़े जाने के बाद हर साल लगभग आधा दर्जन गांवों को सबसे अधिक मार झेलनी पड़ती है। पानी सीधे रिहायशी इलाकों और खेतों में घुस जाता है, जिससे आवागमन के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके कारण बांध से बार-बार पानी छोड़ना पड़ रहा है और ग्रामीण हर साल इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना करने को मजबूर होते हैं।





















