राजस्थान के कोटा शहर में प्राचीन इतिहास और दुर्लभ मुद्राओं का एक बेहद अनोखा संगम देखने को मिला, जहां सेवन वंडर पार्क के सामने तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। एसएनसी (SNC) के मार्गदर्शन में सजी इस प्रदर्शनी ने इतिहास प्रेमियों, शोधार्थियों और शहर के आम नागरिकों को अपनी ओर आकर्षित किया, जिससे आयोजन स्थल पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश के कोने-कोने से पहुंचे नामचीन संग्रहकर्ताओं ने इस मेले में सौ से अधिक स्टॉल्स लगाई थीं, जिन्हें देखकर हर दर्शक भारत के समृद्ध अतीत और संस्कृति की झलक पाकर मंत्रमुग्ध नजर आया।
आम बोलचाल में अक्सर यह कहा जाता है कि खोटा सिक्का कभी बाजार में नहीं चलता, लेकिन कोटा के इस आयोजन ने इस कहावत को पूरी तरह से झुठला दिया। जो मुद्राएं और नोट बीते दशकों या सदियों में चलन से बाहर हो चुके थे, वे इस मंच पर आकर इतिहास के बेहद कीमती और अनमोल दस्तावेज बन गए। इस दौरान कई पुरानी और विंटेज सामग्रियों की जमकर खरीद-फरोख्त भी देखने को मिली। इस पूरे आयोजन में सबसे बड़ा आकर्षण '000001' फैंसी सीरियल नंबर वाला सौ रुपये का एक खास स्पेसीमेन सैंपल नोट रहा, जिसकी अनुमानित कीमत विशेषज्ञों ने एक लाख रुपये तक आंकी। इसके अलावा एक रुपये का विंटेज सैंपल नोट भी हजारों रुपये की बोली में बिका, जिसने मुद्रा संग्रहकर्ताओं का खासा ध्यान खींचा।
शाही दौर से लेकर आधुनिक काल तक की दुर्लभ मुद्राएं
इस प्रदर्शनी में केवल प्राचीन काल के अवशेष ही नहीं, बल्कि अलग-अलग ऐतिहासिक युगों के दुर्लभ सिक्के भी खुले बाजार में उपलब्ध थे। हैदराबाद मिंट में तैयार किया गया एक रुपये का बेहद दुर्लभ सिक्का पचास हजार से पचहत्तर हजार रुपये के बीच बिका। इसके साथ ही, वर्ष 2021 में देश की आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर जारी किया गया पांच रुपये का एक विशेष सिक्का भी पचास हजार रुपये तक की भारी भरकम कीमत पर बिकता हुआ नजर आया। बंगाल से पधारे एक प्रतिष्ठित संग्रहकर्ता के सोने और चांदी के सिक्कों वाले स्टॉल पर सबसे अधिक खरीदार और दर्शक एकत्रित हुए। उनके व्यक्तिगत संग्रह में अवध रियासत, विजयनगर साम्राज्य और प्राचीन बंगाल के दुर्लभ स्वर्ण मुद्राएं शामिल थीं, जिनकी कीमत ढाई लाख से चार लाख रुपये तक आंकी गई। इन ऐतिहासिक सोने के सिक्कों को देखने के साथ-साथ उन्हें अपने संग्रह में शामिल करने के लिए लोगों ने काफी उत्सुकता दिखाई।
डाक टिकटों और विंटेज अखबारों ने भी खींचा ध्यान
यह राष्ट्रीय प्रदर्शनी केवल धातु के सिक्कों और कागजी नोटों तक ही सीमित नहीं रखी गई थी, बल्कि इसमें इतिहास के कई अन्य पहलू भी शामिल किए गए। यहां विभिन्न कालों के दुर्लभ पोस्टकार्ड, पुराने डाक टिकट, कई दशक पुराने विंटेज अखबार और पुरानी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा विज्ञापन के लिए उपयोग की जाने वाली प्रचार सामग्री भी प्रदर्शित की गई। अतीत के इन जीवंत साक्ष्यों ने विशेष रूप से छात्र वर्ग और युवाओं को देश की सामाजिक एवं आर्थिक विकास यात्रा को बहुत नजदीक से समझने का एक सुनहरा अवसर उपलब्ध कराया।




















