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रात के दस बजते ही कैसे बदल जाता है इंसान का शरीर, जानिए अंदरूनी बदलावों का पूरा सचस्वास्थ्य
31 अग॰ 2026, 10:29 am (58 दिन पहले)· 3

रात के दस बजते ही कैसे बदल जाता है इंसान का शरीर, जानिए अंदरूनी बदलावों का पूरा सच

रात के दस बजते ही हमारे शरीर में जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम के तहत कई बड़े बदलाव शुरू हो जाते हैं। इस समय मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है और शरीर रात की ‘नाइट शिफ्ट’ के जरिए मरम्मत के काम में जुट जाता है।

रात के दस बजते ही मानव शरीर में एक खास तरह की प्राकृतिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसे शरीर का आराम मोड कहा जाता है। हमारे भीतर एक बेहद सटीक जैविक घड़ी काम करती है, जिसे विज्ञान की भाषा में सर्केडियन रिदम यानी सर्केडियन चक्र के नाम से जाना जाता है। यह आंतरिक प्रणाली चौबीस घंटे के एक चक्र के आधार पर हमारी नींद, जागने के समय, भूख, शरीर के तापमान और अन्य कई जरूरी शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित और प्रभावित करती है। जैसे-जैसे रात गहरी होने लगती है, हमारे शरीर को संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं कि अब दिनभर की भागदौड़ और गतिविधियों को थामने तथा विश्राम की तैयारी करने का वक्त आ गया है।

मेलाटोनिन हार्मोन का बढ़ता स्तर

शाम ढलने के बाद जैसे-जैसे चारों तरफ अंधेरा बढ़ने लगता है, हमारे शरीर के भीतर मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर ऊपर उठने लगता है। यही वह प्रमुख हार्मोन है जो इंसान को गहरी नींद के आगोश में जाने के लिए पूरी तरह से तैयार करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि रात के दस बजे के आसपास कई लोगों को अचानक से आंखों में भारीपन और नींद का दबाव महसूस होने लगता है। हालांकि, यह जैविक प्रक्रिया हर इंसान के शरीर में बिल्कुल एक जैसी नहीं होती है। किसी व्यक्ति को ठीक दस बजे नींद आने लगती है, तो किसी की अंदरूनी बॉडी क्लॉक थोड़ा देर से काम करती है। इसके अलावा, हर रोज सोने और जागने का तय पैटर्न भी इस पूरी प्रक्रिया पर अपना गहरा असर डालता है.

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पाचन तंत्र को भी चाहिए होता है विश्राम

अगर किसी व्यक्ति की रात दस बजे के बाद भारी भोजन करने, तला-भुना खाने या फिर बार-बार कुछ न कुछ स्नैक्स खाने की आदत है, तो उसके पाचन तंत्र को विश्राम मिलने के बजाय अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। देर रात को पेट भरकर खाना खाने से कई लोगों को शरीर में भारीपन, एसिडिटी की समस्या या फिर रात की नींद में खलल जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि रात दस बजे के बाद कुछ भी खाना हर इंसान के लिए हमेशा नुकसानदायक ही साबित हो। असली और मुख्य बात आपकी पूरे दिन की दिनचर्या, आपके द्वारा खाए गए भोजन की मात्रा और आपके सोने के सही समय के बीच के तालमेल पर निर्भर करती है.

नींद के दौरान शरीर की आंतरिक मरम्मत

जब कोई व्यक्ति रात के समय पर्याप्त और बेहतरीन गुणवत्ता वाली नींद लेता है, तो उस दौरान शरीर सिर्फ सुस्ती या आराम की अवस्था में नहीं रहता है। नींद के उस सुनहरे दौर में शरीर के भीतर क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत का काम, रोग प्रतिरोधक तंत्र यानी प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं और कई तरह की महत्वपूर्ण हार्मोनल गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं। यही कारण है कि लगातार कम सोने की बुरी आदत अगले दिन सिर्फ महसूस होने वाली थकान से कहीं ज्यादा और गहरे स्तर पर हमारे पूरे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। रात के अंधेरे में शरीर की यह अदृश्य ‘नाइट शिफ्ट’ बिल्कुल चुपचाप अपना काम करती रहती है। ऐसे में हर रोज एक निश्चित समय पर सोने की आदत डालना, सोने से ठीक पहले कमरे की रोशनी और मोबाइल या टीवी की स्क्रीन को कम करना तथा बहुत भारी भोजन करने से बचना हमारे शरीर की प्राकृतिक लय को बनाए रखने में बेहद मददगार साबित हो सकता है.

सवाल-जवाब

सर्केडियन रिदम क्या होती है?
यह हमारे शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी है जो चौबीस घंटे के चक्र के हिसाब से नींद, भूख और तापमान को नियंत्रित करती है।
मेलाटोनिन हार्मोन का शरीर में क्या काम है?
अंधेरा होने पर यह हार्मोन बढ़ने लगता है और इंसान को नींद के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है।
रात दस बजे के बाद खाने से क्या नुकसान हो सकता है?
इससे पाचन तंत्र को आराम नहीं मिलता और भारीपन, एसिडिटी या नींद में परेशानी की समस्या हो सकती है।
नींद के दौरान शरीर में कौन सी प्रक्रियाएं चलती हैं?
नींद के समय ऊतकों की मरम्मत, प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी प्रक्रियाएं और कई हार्मोनल गतिविधियां चलती रहती हैं।
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