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ऑनलाइन कारोबार की मार से हरिद्वार का ऐतिहासिक कटहरा बाजार खाली, कारोबारियों की बिक्री 90 फीसदी घटीउत्तराखंड
12 अक्तू॰ 2026, 5:51 pm (25 दिन पहले)· 3

ऑनलाइन कारोबार की मार से हरिद्वार का ऐतिहासिक कटहरा बाजार खाली, कारोबारियों की बिक्री 90 फीसदी घटी

हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित सौ साल पुराने कटहरा बाजार में ई-कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते प्रभाव के चलते करीब 90 प्रतिशत ग्राहक घट चुके हैं, जिससे त्योहारी सीजन में भी दुकानदार खाली बैठने को मजबूर हैं।

उत्तराखंड के धर्मनगरी हरिद्वार स्थित ज्वालापुर क्षेत्र का कटहरा बाजार जिले का सबसे बड़ा और एक सदी से भी अधिक पुराना व्यापारिक केंद्र रहा है। किसी दौर में कपड़े, गहने, बर्तन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के लिए यह बाजार ग्राहकों से खचाखच भरा रहता था और यहां तिल रखने की भी जगह नहीं होती थी। वक्त के साथ ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती लोकप्रियता ने इस ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र की आर्थिक रीढ़ को हिलाकर रख दिया है। अमेजन, फ्लिपकार्ट और मीशो जैसी डिजिटल कंपनियों के चलते इस परंपरागत बाजार की रौनक गायब हो गई है और दुकानदारों का कहना है कि उनके लगभग 90 प्रतिशत ग्राहक कम हो चुके हैं।

साल 2017 के बाद तेजी से बिगड़े हालात

बाजार के स्थानीय कारोबारी अशोक गुप्ता, जो 1991 से अपनी पुश्तैनी दुकान चला रहे हैं, बताते हैं कि परंपरागत व्यापार में असली गिरावट साल 2017 के आसपास शुरू हुई। उनके मुताबिक बड़ी ऑनलाइन कंपनियों और विशाल स्टोरों के प्रसार ने छोटे व्यापारियों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। चाय की पत्ती से लेकर किराना और गारमेंट्स तक का कारोबार सीमित उद्योगपतियों के नियंत्रण में जाने लगा है। उनका कहना है कि इस बदलाव से देश की पूंजी विदेशी कंपनियों के पास जा रही है, जबकि दशकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को संभालने वाले छोटे खुदरा व्यापारी अब त्योहारों के सीजन में भी ग्राहकों का इंतजार करने को मजबूर हैं।

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तस्वीरों के आकर्षण बनाम धरातल की गुणवत्ता

अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे इस बाजार के एक अन्य कारोबारी वीरेंद्र अरोड़ा का मानना है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों और एडिट की गई आकर्षक तस्वीरों के जरिए लोगों को लुभाया जा रहा है। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यमों पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को कई बार वह गुणवत्ता नहीं मिलती जो स्क्रीन पर दिखाई देती है, और अक्सर सामान की बनावट को लेकर शिकायतें रहती हैं। इसके विपरीत, कटहरा बाजार जैसे पारंपरिक बाजारों में ग्राहक अपनी आंखों के सामने कपड़े और अन्य सामग्री को परखते थे और उचित मोलभाव के साथ वास्तविक उत्पाद खरीदते थे। डिजिटल माध्यमों की तेज रफ्तार ने त्योहारी दिनों में बाजारों में उमड़ने वाली भीड़ और सामाजिक जुड़ाव की रौनक को काफी हद तक छीन लिया है।

कपड़ों के फैब्रिक की परख और स्थानीय कारोबार का भविष्य

व्यापारी पौरुष अरोड़ा भी मानते हैं कि त्योहारी सीजन में भी दुकानों पर ग्राहकों की उपस्थिति काफी कम रह गई है। उनका कहना है कि ऑनलाइन मंचों पर कपड़ों का फैब्रिक, धागे की मजबूती और वास्तविक रंग का अंदाजा लगाना संभव नहीं होता। परंपरागत दुकानों में व्यापारी ग्राहक को सामान की पूरी जांच कराकर और संतुष्ट करके ही बेचते हैं, जिससे विश्वास का रिश्ता बनता था। डिजिटल युग की ओर लोगों के बढ़ते झुकाव की वजह से हरिद्वार जिले का यह सबसे पुराना और प्रतिष्ठित व्यापारिक केंद्र अब वीरान नजर आने लगा है, जिससे जुड़े सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर गहरा असर पड़ रहा है।

सवाल-जवाब

कटहरा बाजार कहां स्थित है और इसकी क्या खासियत है?
कटहरा बाजार उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के ज्वालापुर क्षेत्र में स्थित है, जो 100 साल से भी अधिक पुराना और जिले का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र है।
कटहरा बाजार के व्यापारियों का कारोबार कितना घट गया है?
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों के कारण बाजार से लगभग 90 फीसदी ग्राहक कम हो चुके हैं।
व्यापारियों के अनुसार कारोबार में गिरावट कब से तेज हुई?
दुकानदारों के मुताबिक साल 2017 के बाद बड़े ऑनलाइन मंचों और कॉर्पोरेट स्टोर्स के विस्तार से छोटे दुकानदारों का कारोबार तेजी से गिरा।
व्यापारियों ने ऑनलाइन शॉपिंग की क्या कमियां बताई हैं?
व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन में कपड़ों का फैब्रिक और गुणवत्ता जांची नहीं जा सकती और विज्ञापनों की आकर्षक तस्वीरों के मुकाबले असल सामान अक्सर अलग निकलता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·24 दिन पहले

साल 2017 से सब बदलना शुरू हुआ, अंक ज्योतिष में भी सात का अंक बदलाव और ठहराव दोनों लाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

कटहरा बाजार की रौनक ऑनलाइन से ही घटी है, पर क्या सिर्फ इसी वजह से लोग दुकान जाना छोड़ बैठे?

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

रविकेश जी, अशोक गुप्ता जी ने ठीक कहा कि 2017 के बाद से ही हालात ज्यादा तेजी से बिगड़े हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

कटहरा बाजार की ये हालत देखकर दुख होता है। कभी यहां पैर रखने की जगह नहीं होती थी और आज दुकानदार खाली बैठे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग ने सच में छोटे दुकानदारों की कमर तोड़ दी है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

रोहन भाई, बात सही है कि ऑनलाइन का असर पड़ा है, पर सिर्फ इसी को दोष देना पूरा सच नहीं लगता। दुकानों में भीड़ घटने की वजह कुछ और भी हो सकती है।

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