त्योहारी सीजन शुरू होते ही आम तौर पर बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, लेकिन फरीदाबाद के बल्लभगढ़ बाजार में इस बार माहौल काफी बदला हुआ नजर आ रहा है. हर साल दिवाली के मौके पर लोग निजी इस्तेमाल के लिए कंबलों की जमकर खरीदारी करते थे और बड़ी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को उपहार देने के लिए थोक में कंबल खरीदती थीं. इस वर्ष बाजार में कंबलों की मांग में अप्रत्याशित कमी देखी जा रही है. दाम में भारी वृद्धि होने के कारण खरीदार दुकानों से खाली हाथ लौट रहे हैं या फिर अन्य सामान की तरफ रुख करने को मजबूर हैं.
कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी से बिगड़ा समीकरण
बाजार में कंबलों की सुस्त पड़ती मांग की मुख्य वजह इनके भाव में आया उछाल है. व्यापारियों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस बार कंबलों की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस मूल्य वृद्धि ने खरीदारों की जेब पर सीधा असर डाला है. बाजार में आने वाले ग्राहक जब बढ़े हुए रेट सुनते हैं, तो वे अपनी योजना बदलकर अन्य उपहारों या सामान की खरीदारी करने लगते हैं. नतीजतन दुकानों पर स्टॉक जमा पड़ा है और त्योहारी मौसम में होने वाली सामान्य बिक्री पर भी गहरा असर पड़ा है.
व्यापारियों को 50 प्रतिशत तक बिक्री गिरने की आशंका
बल्लभगढ़ बाजार में करीब 20 वर्षों से दुकान संचालित कर रहे व्यापारी विजय विरमानी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है. उनकी दुकान पर सिंगल बेड और डबल बेड के कंबलों से लेकर इंपोर्टेड कंबलों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है, जिनकी कीमतें 500 रुपये से लेकर 4 से 5 हजार रुपये तक जाती हैं. व्यापारी के मुताबिक पहले कॉरपोरेट जगत की बड़ी कंपनियां कर्मचारियों के दिवाली उपहार के तौर पर भारी संख्या में कंबल खरीदती थीं. इस बार कंबलों के बढ़े दामों की वजह से कंपनियों ने अपना रुख बदल लिया है और वे अपने निर्धारित बजट में क्रॉकरी व अन्य सामान खरीद रही हैं.
मूल्य वृद्धि के गणित को समझाते हुए व्यापारी ने बताया कि जो कंबल पिछले वर्ष 1000 रुपये में बिक रहा था, उसका दाम अब बढ़कर 1200 रुपये हो गया है. ग्राहक पुराने दामों का अनुमान लगाकर बाजार पहुंचते हैं, लेकिन नए रेट सुनते ही वे कंबल खरीदने से पीछे हट जाते हैं. हालात को देखते हुए इस त्योहारी सीजन में पिछले साल की तुलना में बिक्री में लगभग 50 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है.
आम खरीदार बोले, बजट से बाहर हुआ मनपसंद सामान
बाजार में खरीदारी के लिए आए आम लोगों की परेशानी भी कम नहीं है. सीकरी से बल्लभगढ़ बाजार में कंबल की खरीदारी करने पहुंचे ग्राहक पंकज सिंह ने बताया कि कंबलों की दरों में काफी उछाल आया है. जो कंबल बीते साल 500 से 600 रुपये के दायरे में आसानी से मिल जाता था, उसी के लिए अब 700 से 800 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. लगभग 20 प्रतिशत दाम बढ़ जाने से घरेलू बजट पर सीधा दबाव पड़ रहा है, जिसकी वजह से वे अब कंबल के स्थान पर कोई दूसरा उपयोगी सामान खरीदने पर विचार कर रहे हैं.
गुणवत्ता और कीमतों के बीच संतुलन बनाना हुआ कठिन
बाजार में पहुंचे एक अन्य ग्राहक गौरव ने बताया कि इस बार कंबलों की कीमतें उम्मीद से काफी अधिक हैं. उपभोक्ता हमेशा अपने तय बजट को ध्यान में रखकर ही बाजार का रुख करते हैं. जब पसंद आने वाला कंबल तय बजट की सीमा पार कर जाता है, तब अन्य विकल्पों की तलाश करनी पड़ती है. पहले जिस बजट में बेहतरीन गुणवत्ता का कंबल उपलब्ध हो जाता था, वर्तमान में उसी राशि में केवल सामान्य या हल्की गुणवत्ता का सामान ही मिल पा रहा है. इसी कारण ग्राहक अब कोई भी फैसला लेने से पहले कई दुकानों पर जाकर रेट और माल की गुणवत्ता की गहन पड़ताल कर रहे हैं.























