ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी के चयन को लेकर कानूनी विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने इस प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की महत्वपूर्ण बैठक को तत्काल स्थगित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया है कि 18 अगस्त तक राज्य के नए पुलिस प्रमुख के नाम पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। यह आदेश प्रकाश सिंह मामले में तय किए गए ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद जारी किया गया है।
चिदंबरम ने अदालत में उठाई प्रक्रियागत अनियमितता
वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने एक जनहित याचिका का उल्लेख किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकार डीजीपी चयन प्रक्रिया को पूरा करने में स्थापित नियमों को दरकिनार कर रही है। चिदंबरम ने अदालत को सूचित किया कि यूपीएससी उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए आज ही बैठक करने की तैयारी में था, जिस पर तुरंत हस्तक्षेप करना आवश्यक हो गया था।
अपनी दलीलों में पी. चिदंबरम ने आरोप लगाया कि याचिका की सुनवाई से ठीक एक दिन पहले एक अधिकारी को रातोरात पदोन्नति दी गई। उन्होंने दावा किया कि यह जल्दबाजी इसलिए की गई ताकि उस अधिकारी का नाम यूपीएससी को भेजे जाने वाले संभावित दावेदारों के पैनल में शामिल किया जा सके। उनके अनुसार, यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस सुधारों के संदर्भ में दिए गए प्रकाश सिंह फैसले के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।
राज्य सरकार का पक्ष और शुरुआती अदालती टिप्पणी
दूसरी तरफ, ओडिशा सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि चयन की प्रक्रिया में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने सेवा से जुड़े मामलों में जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर भी सवाल खड़े किए और तर्क दिया कि ऐसी याचिकाओं के जरिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि इस चयन प्रक्रिया से प्रभावित किसी भी अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है। इस अवलोकन के बाद एक समय ऐसा लग रहा था कि अदालत तुरंत कोई अंतरिम रोक लगाने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन मामले में आगे आए नए मोड़ ने स्थिति को बदल दिया।
एमिकस क्यूरी के बयान के बाद बदला अदालत का रुख
मामले में नया मोड़ तब आया जब पीठ ने प्रकाश सिंह मामले के न्याय-मित्र यानी एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से राय मांगी। राजू रामचंद्रन ने जनहित याचिका का समर्थन करते हुए अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि ओडिशा में अपनाई जा रही प्रक्रिया में वास्तव में उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। एमिकस क्यूरी के इस रुख ने पूरे मामले की गंभीरता को बढ़ा दिया।
एमिकस क्यूरी की राय को ध्यान में रखते हुए सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने अपना रुख बदला और यूपीएससी के वकील को तुरंत निर्देश जारी किए। अदालत ने आदेश दिया कि आज प्रस्तावित बैठक को स्थगित किया जाए और 18 अगस्त तक चयन की प्रक्रिया पर अंतिम मुहर न लगाई जाए। अब इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 18 अगस्त को विस्तृत सुनवाई करेगा, जिसके बाद ही राज्य के नए डीजीपी के चयन का रास्ता साफ हो सकेगा।




















