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नोएडा में मानसिक तनाव के चलते 16 वर्षीय किशोर ने सोते पिता की ली जान, सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पर खुदकुशी कीउत्तर प्रदेश
15 अग॰ 2026, 12:19 am (29 दिन पहले)· 2

नोएडा में मानसिक तनाव के चलते 16 वर्षीय किशोर ने सोते पिता की ली जान, सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पर खुदकुशी की

नोएडा के गढ़ी चौखंडी गांव में पारिवारिक कलह और तनाव के कारण 16 वर्षीय नाबालिग ने अपने पिता की हत्या कर दी और बाद में मेट्रो ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली।

उत्तर प्रदेश के नोएडा से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़के ने कथित तौर पर अपने सो रहे पिता की हत्या करने के बाद मेट्रो ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। यह दुखद वारदात बुधवार को घटी, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि माता-पिता के अलग रहने और पिता के व्यवहार को लेकर किशोर लंबे समय से मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहा था।

मेट्रो स्टेशन पर कूदकर दी जान और अस्पताल में हुई मौत

घटनाक्रम के अनुसार, बुधवार के दिन सेक्टर 49 पुलिस स्टेशन को डायल 112 के माध्यम से एक आपातकालीन सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस को बताया गया कि सेक्टर 52 स्थित मेट्रो स्टेशन पर एक किशोर अचानक चलती मेट्रो ट्रेन के सामने कूद गया है। हादसे के तुरंत बाद वहां मौजूद मेट्रो स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों ने सतर्कता दिखाते हुए लड़के को ट्रैक से बाहर निकाला और इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में मृतक की पहचान नोएडा के सेक्टर 73 के रहने वाले 16 साल के एक नाबालिग लड़के के रूप में हुई, जो राजू शर्मा का बेटा था। पुलिस अधिकारियों ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के पश्चात शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और प्रक्रिया संपन्न होने के बाद शव उसकी मां तथा मामा को सौंप दिया।

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पारिवारिक तनाव और डिप्रेशन बनी घटना की वजह

पुलिस जांच के दौरान इस आत्मघाती कदम के पीछे के कारणों का विश्लेषण किया गया, जिसमें पारिवारिक कलह और डिप्रेशन की बात सामने आई। मृतक किशोर अपने पिता राजू शर्मा के साथ गढ़ी चौखंडी गांव में स्थित एक किराए के मकान में रहता था। राजू शर्मा पेशे से एक ट्यूटर थे और घर पर ही बच्चों को पढ़ाते थे। वर्ष 2020 में आई कोविड 19 महामारी के बाद से ही लड़के की मां अपने पति राजू से अलग रहने लगी थी। मां के दूर रहने और घर में पिता के कथित कठोर व सख्त व्यवहार के कारण किशोर मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था। पुलिस के अनुसार, इसी डिप्रेशन के चलते बुधवार की तड़के जब राजू शर्मा सो रहे थे, तब नाबालिग ने उनकी हत्या कर दी और फिर खुदकुशी करने के इरादे से सीधे सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पहुंच गया।

कमरे से बदबू आने पर बरामद हुआ पिता का शव

मेट्रो हादसे के समय तक पुलिस को यह जानकारी नहीं थी कि लड़के के पिता की भी हत्या हो चुकी है। इस दौरान राजू शर्मा के भाई अरुण अपने भाई का कोई सुराग न मिलने पर उनके किराए के मकान की तलाश कर रहे थे। उन्होंने मदद के लिए पार्थला और गढ़ी चौखंडी में बनी पुलिस चौकियों से संपर्क किया। इसके बाद गुरुवार की देर रात गढ़ी चौखंडी में तिकोना पार्क के पास स्थित एक मकान के कमरे से तेज दुर्गंध आने की सूचना स्थानीय निवासियों ने पुलिस को दी। सूचना पाते ही पुलिस टीम अरुण के साथ मौके पर पहुंची और जब बंद कमरे को खोला गया, तो अंदर राजू शर्मा का शव बरामद हुआ। शव की स्थिति देखकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

सवाल-जवाब

नोएडा में 16 वर्षीय किशोर ने क्या कदम उठाया?
16 वर्षीय किशोर ने गढ़ी चौखंडी गांव में अपने सो रहे पिता की हत्या कर दी और बाद में सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली।
मृतक पिता कौन थे और वे क्या काम करते थे?
मृतक पिता का नाम राजू शर्मा था, जो नोएडा में पेशे से एक ट्यूटर के रूप में काम करते थे।
पुलिस जांच के अनुसार इस दुखद कदम के पीछे क्या कारण थे?
पुलिस के अनुसार कोविड-19 महामारी के बाद मां के अलग रहने और पिता के कथित कठोर व्यवहार के कारण किशोर गहरे डिप्रेशन और मानसिक तनाव में था।
पिता का शव पुलिस ने किस प्रकार बरामद किया?
गुरुवार देर रात गढ़ी चौखंडी में तिकोना पार्क के पास किराए के कमरे से बदबू आने पर पुलिस और राजू के भाई अरुण ने मौके पर पहुंचकर शव बरामद किया।
किशोर के शव का पोस्टमार्टम के बाद क्या किया गया?
कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने और पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने नाबालिग के शव को उसकी मां और मामा को सौंप दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·28 दिन पहले

यह दर्दनाक घटना हमारे समाज में किशोर मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक कलह के गंभीर परिणामों को उजागर करती है। कोविड-19 के बाद घरेलू बिखराव और माता-पिता के अलगाव ने बच्चों के कोमल मन पर जो दबाव डाला है, वह डरावना है। यह मामला स्पष्ट करता है कि बच्चों में बढ़ते डिप्रेशन की पहचान समय पर करना और उन्हें मनोवैज्ञानिक सहायता देना कितना अनिवार्य हो गया है, अन्यथा ऐसे घातक परिणाम सामने आते रहेंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 दिन पहले

यह दर्दनाक घटना केवल एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि किशोरों में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट और पारिवारिक विघटन के गहरे सामाजिक प्रभावों पर एक गंभीर नीतिगत सवाल है। कोविड महामारी के बाद से परिवारों में बढ़ता तनाव और मनोवैज्ञानिक परामर्श की कमी युवाओं को इस चरम सीमा तक धकेल रही है। यदि समाज और शासन स्तर पर स्कूली एवं सामुदायिक जीवन में सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र को अनिवार्य नहीं बनाया गया, तो इस प्रकार के हालात भविष्य में और अधिक गंभीर संकट का रूप ले सकते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·28 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि पारिवारिक कलह और घरेलू तनाव किस तरह गंभीर अपराध और आत्महत्या जैसी चरम सीमाओं तक पहुँच सकते हैं। कोविड-19 महामारी के बाद से घरों के भीतर बढ़ते मानसिक दबाव और मनोवैज्ञानिक अलगाव को समय पर पहचानना और उसका समाधान करना बेहद जरूरी हो गया है। जब तक किशोरों और परिवारों के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श तंत्र को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक इस तरह की सामाजिक और मनोवैज्ञानिक त्रासदियों को रोक पाना कठिन होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

यह घटना किशोरों में बढ़ते मानसिक अवसाद और पारिवारिक विघटन के बेहद खतरनाक परिणामों को उजागर करती है। कोविड महामारी के बाद से बढ़ता अलगाव और संवादहीनता बच्चों पर भारी पड़ रही है। कानून-व्यवस्था और पुलिस जांच के साथ-साथ यह मामला समाज और अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·28 दिन पहले

यह दर्दनाक मामला इस बात का गंभीर उदाहरण है कि कैसे पारिवारिक विघटन और घरेलू कलह बच्चों की मानसिकता पर अमिट और घातक प्रभाव डालते हैं। कोविड के बाद की परिस्थितियों ने जिस तरह सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित किया है, उसके प्रभाव अब धरातल पर ऐसे भीषण अपराधों के रूप में सामने आ रहे हैं। राज्य में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की काउंसलिंग के लिए स्कूल स्तर से लेकर सामुदायिक केंद्रों तक एक मजबूत तंत्र विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा ऐसी त्रासदियां रुकेंगी नहीं।

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