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ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तट पर 15 मछुआरे लापता, समंदर में ट्रॉलर का नहीं मिल रहा कोई सुरागभारत
10 जुल॰ 2026, 11:21 pm (110 दिन पहले)· 3

ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तट पर 15 मछुआरे लापता, समंदर में ट्रॉलर का नहीं मिल रहा कोई सुराग

कीमती हिल्सा मछली पकड़ने निकले 15 मछुआरे मां काली ट्रॉलर समेत गहरे समंदर में गायब हो गए हैं, जिससे परिवारों में कोहराम मचा है। खराब मौसम के कारण भारतीय कोस्ट गार्ड के रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी बाधा आ रही है।

गहरे समंदर की लहरों का रौद्र रूप और खराब मौसम अक्सर किसी बड़ी आपदा का संकेत बन जाता है, और यही डर अब ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में बसने वाले 15 परिवारों के लिए सच साबित हो रहा है। कीमती हिल्सा मछली पकड़ने की उम्मीद लेकर समंदर में उतरे 15 मछुआरे अचानक लापता हो गए हैं, और कई दिन बीत जाने के बाद भी उनका कोई अता-पता नहीं चल पा रहा है। इन मछुआरों का ट्रॉलर समंदर के किस हिस्से में खो गया या वे किसी अनहोनी का शिकार हो गए, इस गहरे सस्पेंस ने पूरे प्रशासन और उनके परिजनों को सदमे में डाल दिया है। हालांकि भारतीय कोस्ट गार्ड ने उन्हें ढूंढ निकालने के लिए मोर्चा संभाल लिया है, लेकिन कुदरत इस समय सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। मौसम इतना खराब है कि बचाव कार्य के लिए जरूरी रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी उड़ान भरने में असमर्थ हैं, जिससे लापता लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।

मां काली ट्रॉलर का संपर्क टूटा

यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब 15 मछुआरे आने वाले सीजन के लिए हिल्सा मछली पकड़ने के उद्देश्य से 'मां काली' नामक कमर्शियल ट्रॉलर पर सवार होकर शंकरपुर बीच से रवाना हुए थे। हालात तब बिगड़े जब 2 जुलाई के बाद से ही इस ट्रॉलर और उस पर सवार सभी क्रू मेंबर्स का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गया। जब वायरलेस संदेशों और सैटेलाइट के जरिए भी नाव का कोई संकेत नहीं मिला, तो मछुआरों के परिवारों में कोहराम मच गया। लापता हुए लोगों में ओडिशा के बालासोर जिले के भोगराई ब्लॉक के उलुदा गांव के तीन निवासी जयराम माझी, रवींद्र माझी और जगन्नाथ माझी शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर पूरा गांव चिंतित है।

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प्रशासनिक स्तर पर तेज हुई हलचल

मछुआरों के संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि खोज अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों को तत्काल सेवा में लगाया जाए। बालासोर के जिला कलेक्टर सूर्यवंशी मयूर विकास ने भी मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए बताया कि पूरा प्रशासन हाई अलर्ट पर है। उन्होंने इस कठिन परिस्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं

  • स्थानीय प्रशासन लगातार पश्चिम बंगाल के दीघा के सब-कलेक्टर और जिला कलेक्टर के साथ समन्वय बनाए हुए है ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई कमी न रहे।
  • पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट राज्य के विशेष राहत आयुक्त को भेज दी गई है, जिसके बाद राज्य स्तर पर व्यापक पैमाने पर खोजबीन की तैयारी की जा रही है।
  • भारतीय कोस्ट गार्ड के जहाज लगातार समंदर में गश्त कर रहे हैं, हालांकि भारी बारिश और बेहद कम विजिबिलिटी के कारण उनके रेस्क्यू हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे हैं।

फिलहाल लापता मछुआरों के परिजन समुद्र के किनारे बैठकर केवल एक चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं और सरकार से अपने अपनों की सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। प्रशासन और कोस्ट गार्ड की टीमें मौसम साफ होते ही सर्च ऑपरेशन को और अधिक तीव्रता देने की जुगत में हैं।

सवाल-जवाब

कितने मछुआरे लापता हैं?
इस घटना में कुल 15 मछुआरे लापता हैं जो हिल्सा मछली पकड़ने के लिए समुद्र में गए थे।
मछुआरों से संपर्क कब टूटा?
इन मछुआरों और उनके ट्रॉलर 'मां काली' से अंतिम संपर्क 2 जुलाई को टूटा था।
बचाव कार्य में देरी क्यों हो रही है?
भारी बारिश और कम विजिबिलिटी के कारण भारतीय कोस्ट गार्ड के रेस्क्यू हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे हैं।
प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?
स्थानीय प्रशासन पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है और मामला राज्य के विशेष राहत आयुक्त को सौंप दिया गया है।
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