जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने पाकिस्तान को एक फ्रॉड और विद्रोही शासन करार दिया है। उनका कहना है कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई दुनिया को गुमराह करने में जुटी है। एफएटीएफ की टीम के संभावित दौरे से पहले 19 आतंकियों को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है, जबकि भारतीय खुफिया एजेंसियों की पुख्ता जानकारी के मुताबिक वे सभी आतंकी पाकिस्तान की सीमा के भीतर ही मौजूद हैं।
एसपी वैद ने पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान की डीप स्टेट यानी आईएसआई और वहां की फौज लगातार दुनिया को बेवकूफ बनाने का काम कर रही है। चाहे वह फिया की सूची में हेरफेर हो या अन्य तरीकों से आतंकियों को फरार दिखाना हो। एफएटीएफ की टीम वहां जाने वाली है और पाकिस्तान यह दिखाना चाहता है कि ये लोग भगोड़े हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। हमारी खुफिया रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि वे सभी वहीं छिपे हुए हैं और पाकिस्तानी हुक्मरान उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं करना चाहते। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर दुनिया कब तक पाकिस्तानी सेना के इन सफेद झूठों को सहन करती रहेगी। इसके अलावा मुंबई हमले और मसूद अजहर से जुड़े 19 लोगों का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि वे शातिर कहां छिपे हैं।
पूर्व डीजीपी ने आगे बताया कि मसूद अजहर को लेकर पहले यह फैलाया गया था कि वह अफगानिस्तान में है, लेकिन अफगान सरकार ने साफ कर दिया कि वह उनके यहां नहीं है। जब वह भारत आ नहीं सकता और पाताल में जाने का कोई रास्ता है नहीं, तो वह आखिर कहां जाएगा। आसमान में जाने का विकल्प उसके पास है नहीं, क्योंकि पिछली बार जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ था, तब उसके परिवार के 11 सदस्य मारे जाने पर उसे बिलखते हुए देखा गया था। बाकी अन्य सभी आतंकवादी संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी हैं, जो किसी भी तरह की अंतरराष्ट्रीय यात्रा नहीं कर सकते। ऐसे में पाकिस्तान केवल वैश्विक समुदाय की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रहा है।
एफएटीएफ के दौरे के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वैश्विक संगठनों को यह भली-भांति समझ लेना चाहिए कि पाकिस्तान किस तरह का विद्रोही शासन चला रहा है। वहां सच की कोई जगह नहीं है, और केवल वही होता है जो वहां की सेना चाहती है क्योंकि आतंकवाद को बढ़ावा देना ही उनकी मुख्य नीति बन चुकी है। पहलगाम हमले के मामले में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन समेत सभी देशों ने हस्ताक्षर कर उस आतंकी हमले की खुलकर निंदा की थी। ऐसे में पाकिस्तान जैसे राष्ट्र से और क्या उम्मीद की जा सकती है। दुनिया को इसका कड़ा संज्ञान लेते हुए पाकिस्तान के इस फरेब को बेनकाब करना चाहिए।
दूसरी ओर, रक्षा विशेषज्ञ डीपी पांडे ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए कहा कि साल 2025 के मुकाबले वहां सैनिकों की तैनाती में कुछ कमी आई है। उन्होंने माना कि चीन के रुख में नरमी के संकेत जरूर मिले हैं, मगर भारत को ड्रैगन पर कभी भी आँख मूंदकर सौ प्रतिशत भरोसा नहीं करना चाहिए। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल से लेकर अब तक एलएसी पर फौज की मौजूदगी में गिरावट दर्ज की गई है। यह बात सच हो सकती है क्योंकि गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों की सीमाओं पर भारी तनाव पैदा हो गया था और दोनों पक्षों ने भारी सैन्य बल जमा कर लिया था। बाद में चीन को यह अहसास हो गया कि भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत ही एकमात्र बेहतर विकल्प है। जब भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि जब तक सरहद पर हालात सामान्य नहीं होते, तब तक व्यापार और अन्य प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जाएगी, तब जाकर बीजिंग के तेवर नरम पड़े।
रक्षा विशेषज्ञ ने आगे कहा कि इसी कूटनीतिक संतुलन के आधार पर दोनों देशों के बीच सुरक्षा मामलों को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स सम्मेलन के सिलसिले में भारत आए थे और प्रधानमंत्री के साथ उनकी जो बैठक हुई थी, उसका केंद्र बिंदु भी सुरक्षा ही था। हालांकि द्विपक्षीय संबंधों में धीरे-धीरे सुधार की गुंजाइश है, लेकिन हमें अपनी सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढील नहीं देनी चाहिए और चीन पर पूर्ण विश्वास करने से बचना चाहिए। हमारी सेना के शीर्ष अधिकारियों को वहां लगातार पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि आज चीन खुद अंदरूनी मोर्चे पर कई गंभीर समस्याओं और बाहरी चुनौतियों से घिरा हुआ है।














