छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के नवापारा इलाके में एक ऐसा पारंपरिक देसी ठिकाना मौजूद है, जहां के आलू चाप और उड़द दाल के बड़े का स्वाद शहर भर में बेहद लोकप्रिय है। इस छोटी सी दुकान पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग नाश्ता करने पहुंचते हैं और यह जगह यहां के स्थानीय निवासियों की पहली पसंद बनी हुई है। इस प्रतिष्ठान की शुरुआत साल 2004 में अजीत कुमार तिग्गा द्वारा नवापारा चौक के नजदीक एक छोटे से होटल के रूप में की गई थी। स्थानीय लोग इस जगह को मुख्य रूप से अजीत होटल के नाम से ही पहचानते हैं। यह कोई आलीशान या बड़ा रेस्टोरेंट नहीं है, बल्कि एक ऐसा पारंपरिक और साधारण स्नैक्स कॉर्नर है जहां आज भी पुराने तरीकों से ही खाने-पीने की चीजें तैयार की जाती हैं।
रोजाना आते हैं दर्जनों ग्राहक
दुकान के संचालक अजीत कुमार तिग्गा के मुताबिक, उनके इस होटल में हर दिन लगभग 100 से 150 ग्राहक नाश्ते का आनंद लेने आते हैं। इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो नियमित रूप से यहां आते हैं और उनके हाथ के बने जायके को बेहद पसंद करते हैं। इस छोटे से व्यवसाय से होने वाली कमाई इतनी हो जाती है कि उनके परिवार का भरण-पोषण बहुत अच्छी तरह से चल जाता है और किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
पारंपरिक विधि से तैयार होता है नाश्ता
इस होटल के मेनू में मुख्य रूप से उड़द दाल के बड़े और आलू चाप को ही शामिल किया गया है। अजीत कुमार तिग्गा बताते हैं कि बड़ा बनाने के लिए सबसे पहले शुद्ध उड़द दाल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें बारीक कटे हुए प्याज, हरी मिर्च, अदरक और लहसुन जैसे मसाले मिलाए जाते हैं ताकि इसका स्वाद बेहतरीन बन सके। दूसरी ओर, आलू चाप तैयार करने के लिए सबसे पहले आलू को उबाला जाता है और फिर उन्हें छीलकर विशेष मसाले मिलाए जाते हैं। इसके बाद इस मिश्रण को बेसन की परत में लपेटकर कड़ाही में तला जाता है, जिससे यह क्रिस्पी और स्वादिष्ट बनता है।
लकड़ी के चूल्हे का जादू और खास चटनी
अजीत के इस होटल की एक और सबसे बड़ी खासियत यहां पर परोसी जाने वाली टमाटर की चटनी है, जो साल के बारह महीने यानी हर मौसम में ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाती है। गरमा-गरम बड़ा और आलू चाप के साथ इस अनोखी चटनी का मेल खाने वालों को बहुत भाता है। आज के इस आधुनिक दौर में जहां हर जगह गैस चूल्हे और इंडक्शन का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं अजीत आज भी पूरी तरह से पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर ही सारा नाश्ता तैयार करते हैं। लकड़ी की धीमी आंच पर पकने के कारण इन व्यंजनों का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है, जो ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है।



















